जिन्होंने अरबों का 'एपल' चखकर छोड़ दिया

रोनाल्ड जी वेन
    • Author, डेव ली
    • पदनाम, तकनीकी संवाददाता, उत्तरी अमरीका
  • प्रकाशित

एपल कंपनी हाल ही में 40 साल की हो गई. ऐसे में यह सही वक़्त है कि उस आदमी को तलाशें, जिसने कंपनी शुरू करने में मदद की और फिर छोड़कर चला गया.

लास वेगास से नेवादा रेगिस्तान में एक घंटे की यात्रा के बाद आप जब आप ऐसी जगह पहुँचें जहां लगे कि इंसानी आबादी पीछे छूट गई है, वहां से और आगे बढ़ जाएं.

आप पाहरंप पहुँचेंगे. यहां आपको दुनिया की सबसे क़ीमती और शायद सबसे ताक़तवर कंपनी के सह-संस्थापक मिलेंगे.

रोनाल्ड जी वेन अब 81 साल के हैं. जब वह 41 साल के थे, तब वह अटारी में काम करते थे. वहां उन्हें युवा, आसानी से प्रभाव में आने योग्य स्टीव जॉब्स मिले, जो हमेशा तरह-तरह की सलाह लेने उनके पास आया करते थे.

स्टीव जॉब्स

जॉब्स ने पूछा कि क्या उन्हें स्लॉट मशीन बनाने का व्यवसाय शुरू करना चाहिए. वेन ने कहा-नहीं.

जॉब्स ने पूछा कि क्या उन्हें ख़ुद की तलाश के लिए भारत जाना चाहिए. वेन ने कहा, अगर बहुत ज़रूरी हो तभी, लेकिन सावधान रहना.

एक दिन जॉब्स ने आखिरकार वह सवाल पूछा जिससे इतिहास की दिशा बदल गई. "क्या आप स्टीव वॉज़निएक को समझाने में मेरी कुछ मदद कर सकते हैं?"

वेन ने कहा, "उसे घर लाओ. हम लोग बैठते हैं, बात करते हैं."

आकर्षक व्यक्तित्व वाले, प्यारे से वॉज़निएक, आप उन्हें वॉज़ कह सकते हैं- जॉब्स के साथ मिलकर व्यावसायिक कंप्यूटरों को तोड़कर निजी कंप्यूटर बनाने में जुटे थे.

स्टीव जॉब्स और वॉज़निएक

ये दोनों लोग अब बदनाम हो चुके होमब्रयू कंप्यूटर क्लब में नियमित रूप से जाते थे. ये कंप्यूटर के प्रति जिज्ञासु और उत्साही ऐसे लोगों का समूह था, जो सर्किट बोर्ड को टुकड़ा-टुकड़ा करते और फिर उसे नए ढंग से तैयार करते. ठीक उसी मज़े के साथ जैसे छह साल का एक कल्पनाशील बच्चा लेगो के बक्से के साथ करता है.

वॉज़ इनमें सबसे अच्छे थे. उन्होंने एक सर्किट बोर्ड बनाया, जो एपल 1, कंपनी के पहला कंप्यूटर का आधार हो सकता था और ऐसा बनाया जो 2015 की नीलामी में 2.41 करोड़ रुपए से ज़्यादा में बिका.

जॉब्स चाहते थे कि वॉज़ का दिमाग़ सिर्फ़ एपल के लिए काम करे. वॉज़ इस पर सहमत नहीं थे. क़रीब 45 मिनट की बातचीत में वेन ने पूरी तस्वीर पलट दी.

"यही वह क्षण था जब स्टीव जॉब्स ने कहा, 'हम लोग एक कंपनी शुरू करेंगे. इसका नाम होगा एपल कंप्यूटर कंपनी."

ronald g wayne

वेन ने तभी वहीं एक आईबीएम टाइपराइटर पर दस्तावेज़ टाइप करने शुरू कर दिए और वॉज़ वेन की प्रतिभा पर यक़ीन नहीं कर पाए कि उन्होंने चार पन्ने का क़ानूनी दस्तावेज़ अपनी याददाश्त से तैयार कर दिया.

एपल की हिस्सेदारी में कोई समस्या नहीं हुई. जॉब्स और वॉज़निएक 45 फ़ीसदी के हिस्सेदार बने. वेन 10 फ़ीसदी और किसी भी क़िस्म के विवाद की स्थिति में तार्किक बात करने वाले भी.

12 दिन बाद वेन इस अनुबंध से बाहर आ गए.

एपल के 600 अरब डॉलर की कंपनी बनने और उस घटना के 40 साल बाद वह कहते हैं, "मैंने वह फ़ैसला बहुत अच्छी वजह से किया था, जो मुझे आज भी एकदम सही लगती हैं."

स्टीव जॉब्स

जॉब्स बहुत अच्छे सेल्समैन थे. उन्होंने एपल के लिए पहला बड़ा सौदा हासिल किया था. एक छोटी कंप्यूटर चेन बाइट शॉप 50 मशीन ख़रीदना चाहती थी. पैसा पाने के लिए एपल को 1500 डॉलर उधार लेने पड़े.

मगर वेन ने सुना था कि हालांकि अब उन्हें उस स्रोत का नाम याद नहीं कि बाइट शॉप की छवि अपने बिलों का भुगतान करने के मामले में अच्छी नहीं थी.

वेन ने स्टीव जॉब्स से कहा कि वह उनकी जितनी मदद हो, करना चाहते हैं पर वह आधिकारिक रूप से कंपनी का हिस्सा नहीं बने रह सकते.

उनका एक आख़िरी योगदान कंपनी का पहला लोगो बनाना था. न्यूटन की एक तस्वीर बनानी थी, जिसमें वह एक पेड़ के नीचे बैठे हैं और एक सेब उनके सिर पर गिर रहा है.

वेन ने इस तस्वीर पर हस्ताक्षर कर दिए, लेकिन जॉब्स का ध्यान इस पर चला गया. वेन को याद आता है कि उन्होंने (जॉब्स ने) कहा, "हटा दो उसे!" वह मजबूर हो गए.

एपल से अपने संबंध औपचारिक रूप से ख़त्म करने के महीनों बाद वेन को एक चिट्ठी मिली.

वे बताते हैं, "इस चिट्ठी में लिखा था कि आपको एपल कंप्यूटर कंपनी में हरसंभव हित छोड़ना होगा और आपको चेक मिल जाएगा." इसके बदले में उन्हें 1500 डॉलर दिए गए.

"जहां तक मेरा सवाल था. यह 'पड़ा हुआ पैसा था'. इसलिए मैंने हस्ताक्षर कर दिए."

आज एपल के 10 फ़ीसदी शेयर 60 अरब डॉलर के होते. अगर वेन को अपने फ़ैसले पर पछतावा है, तो वह इसे छिपाने में कमाल कर लेते हैं.

"मैं इमारत के पिछले हिस्से में बहुत बड़े दस्तावेज़ विभाग का प्रमुख होकर रह जाता और अपनी ज़िंदगी के अगले 20 साल कागज़ घिसता रहता. मैं अपने लिए ऐसा भविष्य नहीं चाहता था."

रोनाल्ड जी वेन का घर
इमेज कैप्शन, रोनाल्ड जी वेन का घर

वेन अपने प्रशंसकों के पत्रों को अपनी पढ़ाई की मेज़ के एक छोटे से कोने में एक डिब्बे में रखते हैं. यह ऑटोग्राफ़ के आग्रहों, मांगी जाने वाली सलाहों और तारीफ़ के संदेशों से भरा पड़ा है.

जेसन नाम के एक प्रशंसक के एक पत्र में मज़ाक है कि अति आत्मविश्वास और जुझारूपन के लिए बदनाम स्टीव जॉब्स क्या उस रचनात्मक आलोचना को झेल पाते, जो वेन कर सकते थे.

वेन कहते हैं, "वह एक दिलचस्प आदमी था." "किसने एपल को वह बनाया जो वह है? बेशक जॉब्स ने."

"क्या वह एक अच्छा आदमी था? कई मायनों में नहीं. लेकिन इससे क्या फ़र्क पड़ता है."

हालांकि एपल में अपनी अपनी स्थिति छोड़ देने का वेन को कोई मलाल नहीं है, लेकिन एक बात उन्हें परेशान करती है.

उन्होंने उस मूल अनुबंध को 500 डॉलर में बेच दिया था, जिस पर तीनों के हस्ताक्षर थे.

रोनाल्ड जी वेन

2011 में वही दस्तावेज़ एक नीलामी में 16 लाख डॉलर में बिका. एक और 'काश' इस सूची में जुड़ जाता है.

वेन के घर पर नज़र डालने पर आपको एपल का कोई उत्पाद नहीं दिखता. वह अपने लिए तकनीक को ख़ुद तैयार और संशोधित करना पसंद करते हैं. कहते हैं- ऐसे ज़्यादा मज़ा आता है.

2011 में किसी ने उन्हें आईपैड 2 उपहार में दिया था लेकिन जीवन में बहुत सी चीज़ों की तरह वेन ने इसे भी किसी को दे दिया.

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