ये फ़ोन नंबर मिला, वो सिम तैयार...फिर खाते की ख़ैर नहीं

कैशलेस ट्रांजै़क्शन, ऑनलाइन बैंकिंग, इंटरनेट धोखाधड़ी
    • Author, आशुतोष सिन्हा
    • पदनाम, टेक्नॉलॉजी एक्सपर्ट
  • प्रकाशित

आपके बारे में जानकारी पर अब हर तरह के उचक्कों की नज़र है.

जाने अनजाने में अगर आपकी पर्सनल जानकारी गलत हाथ में पड़ जाए तो बैंक अकाउंट साफ़ होने तक की स्थिति आ सकती है.

हो सकता है जो भी आपके बैंक अकाउंट पर हाथ साफ़ कर रहा है उसे आपने जानकारी नहीं दी हो लेकिन फिर भी उसके पास आपकी पूरी जानकारी हो सकती है.

इस खबर के अनुसार पुलिस ने 33 साल के पूरण गुप्ता को एक करोड़ लोगों के डेटा को बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

मोबाइल नंबर का ये डेटा लोगों के ऑनलाइन पासवर्ड के लिए काम आने वाला है. ऐसे डेटा बेचने वाले लोग अखबारों में विज्ञापन भी देते हैं.

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ऑनलाइन उचक्के

पुलिस के अनुसार, दिल्ली के एक निवासी के अकाउंट से डेढ़ लाख रुपये गायब होने के बाद गुप्ता को पूर्वी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया.

इससे कुछ ही दिन पहले फर्जी सिम कार्ड बनाकर अकाउंट से पैसे निकालने की ये घटना भी चौंकाने वाली नहीं है.

देश के कई हिस्सों से अब ऐसी खबरें आ रही हैं जहां लोगों के बारे में जानकारी इकठ्ठा करके उनके पैसे लेकर कुछ उचक्के चंपत हो गए हैं.

आपके बारे में हर जानकारी अब ऑनलाइन उचक्कों के लिए बेशकीमती है.

कई बार मोबाइल फ़ोन नंबर पता लगाना बहुत आसान होता है क्योंकि लोग अपने नंबर सभी जगह दे देते हैं.

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मोबाइल नंबर

नंबर मिलने के बाद ऐसे उचक्के सिम की क्लोनिंग करके आपके नंबर का एक और सिम बना लेते हैं और आपके अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं.

बैंक के मैसेज उस नंबर पर आने से उन्हें आपके खाते के पैसे के बारे में भी पता चल जाता है.

अगर ऑनलाइन खरीदारी करते हैं तो उसके बारे में भी मोबाइल फ़ोन नंबर के ज़रिये पता लगाना बहुत आसान है.

एक बार मोबाइल फ़ोन नंबर हाथ लग जाए और नकली सिम तैयार हो जाए उसके बाद ट्रांसक्शन के लिए पिन भी मोबाइल पर आ सकता है.

कई बैंक चाहते हैं कि अपने मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करके फ़ोन करें.

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आधार नंबर

अगर जन्मतिथि और दूसरी जानकारी हाथ लग जाए तो ऑनलाइन पैसे उड़ाना बहुत ही आसान हो जाता है.

कुछ समय से ऐसी भी ख़बरें आ रही हैं कि लोगों के आधार नंबर को गलती से ऑनलाइन छाप दिया गया है. इस बात को सरकार ने भी माना है.

इस बारे में खबर आप यहां, यहां और यहां देख सकते हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2015 में देश भर में तरह तरह के 11592 साइबर क्राइम हुए थे.

उनमे इस 8045 केस आईटी एक्ट के तहत दर्ज किये गए. इसके मुकाबले 2014 में 7201, 2013 में 4356 और 2012 में 2876 केस दर्ज किये गए थे.

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ऑनलाइन घपला

इन आंकड़ों में सभी तरह के अपराध शामिल हैं लेकिन पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन क्राइम सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है.

देश में अब 100 करोड़ से भी ज़्यादा मोबाइल फ़ोन कनेक्शन हैं, जिनमें से करीब 80 करोड़ लोग हर दिन मोबाइल ज़रूर इस्तेमाल करते हैं.

ऐसे में अगर ऑनलाइन घपला करने के लिए रोज़ के चंद हज़ार लोगों के भी फ़ोन नंबर हाथ लग जाएं तो उचक्कों का काम आसान हो जाता है.

स्मार्टफोन पर डाउनलोड किये गए ऐप को सभी लोग अपने मैसेज और फ़ोन पर रखी जानकारी पढ़ने की भी इजाज़त देते हैं.

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छोटी रकम

अगर बैंक की ज़रूरत के लिए फ़ोन नंबर रखें और वो स्मार्टफोन नहीं रहे तो उसमे आने वाले मैसेज को कोई नहीं पढ़ सकता है.

आपके लिए उससे थोड़ी परेशानी होगी लेकिन आपके बैंक और पैसे की जानकारी किसी और तक नहीं पहुंचेगी.

अपने बैंक अकाउंट पर हमेशा नज़र रखना चाहिए. ऑनलाइन चोर कभी कभी छोटी रकम निकाल कर ये देखते हैं कि आपकी नज़र उसपर पड़ती है कि नहीं.

पैसे आपके हैं तो उसे सुरक्षित रखने के लिए इतनी परेशानी उठाना ज़रूरी है.

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