इतिहास के पन्नों में सात दिसंबर

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इतिहास में 7 दिसंबर को कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं. इसी दिन विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने पर्ल हार्बर पर बमबारी की और तालेबान ने कंधार पर कब्ज़ा छोड़ दिया.

1941: जापानी विमानों की पर्ल हार्बर पर बमबारी

पर्ल हार्बर पर जापानी बमवर्षक विमानों के हमले में 2400 से ज़्यादा अमरीकी सैनिक मारे गए थे
इमेज कैप्शन, पर्ल हार्बर पर जापानी बमवर्षक विमानों के हमले में 2400 से ज़्यादा अमरीकी सैनिक मारे गए थे

सात दिसंबर 1941 को दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापानी वायुसेना ने हवाई के पर्ल हार्बर स्थित अमरीकी नौसैनिक अड्डे पर अचानक हमला कर दिया और ब्रिटेन और अमरीका के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी.

जापानी बमवर्षक विमानों ने अमरीकी जंगी जहाज़ों, विमानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था.

हमले में छह जंगी जहाज़, 112 नौकाएं और 164 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए थे और 2400 से ज़्यादा अमरीकी सैनिक मारे गए थे.

लड़ाई में क़रीब 100 जापानी सैनिक भी मारे गए थे.

ये हमला अमरीका के लिए बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि उस दौरान वॉशिंगटन में जापानी प्रतिनिधियों की अमरीकी विदेश मंत्री कॉर्डेल हल के साथ जापान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को ख़त्म करने को लेकर बातचीत चल रही थी.

अमरीका ने ये प्रतिबंध चीन में जापान के बढ़ते हस्तक्षेप के बाद लगाए थे.

जापान ने 1931 में उत्तरी चीन के मंचूरिया पर कब्ज़ा कर लिया था. उसके बाद से ही जापान और अमरीका के संबंध ख़राब हो गए थे और 1940 में अमरीका ने जापान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया था.

1940 के ही सितंबर महीने में जापान ने इटली और जर्मनी के साथ एक त्रिपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर किया था लेकिन साथ ही अमरीका के साथ आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की बातचीत भी कर रहा था.

ख़ुद पर लगे अमरीकी प्रतिबंधों और चीन को मित्र सेना की मदद से नाराज़ हो कर ही जापान ने अमरीका के ख़िलाफ़ युद्ध का एलान कर दिया था.

उसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति फ़्रैंकलीन डी रूज़वेल्ट ने भी जापान के ख़िलाफ़ लड़ाई की घोषणा कर दी थी.

2001: तालेबान ने कंधार पर कब्ज़ा छोड़ा

तालिबान ने सितंबर 1996 से अक्टूबर 2001 तक अफ़गानिस्तान के कुछ हिस्सों पर शासन किया था.
इमेज कैप्शन, तालिबान ने सितंबर 1996 से अक्टूबर 2001 तक अफ़गानिस्तान के कुछ हिस्सों पर शासन किया था.

7 दिसंबर 2001 को तालेबान शासन ने कंधार का अपना गढ़ छोड़ दिया और इस तरह अफ़ग़ानिस्तान में 61 दिन की लड़ाई के अंत की शुरुआत हुई.

अफ़ग़ानिस्तान के नए अंतरिम प्रशासन के प्रमुख हामिद करज़ई और तालेबान शासन के बीच हुए समझौते के आधार पर ही कट्टरपंथी तालेबान अपने धार्मिक गढ़ कंधार को छोड़ने के लिए तैयार हुए थे.

हालांकि अमरीका इस समझौते के उन प्रावधानों से नाराज़ था जिसमें तालेबान नेता मुल्ला उमर को संरक्षण देने की बात कही गई थी.

अमरीकी रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड का कहना था कि मुल्ला उमर को सम्मान के साथ जीवित रहने का अधिकार दिया जाना उन्हें क़तई स्वीकार नहीं है.

उन्होंने कहा कि अगर मुल्ला उमर को किसी तरह का संरक्षण दिया गया तो अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका के रिश्तों पर इसका असर पड़ेगा और अमरीका सैन्य और वित्तीय मदद का अपना वादा पूरा नहीं कर सकेगा.

कंधार के पतन के बाद अमरीकी और विपक्षी ताक़तें अपने संसाधन अलक़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को दक्षिणी जलालाबाद की तोराबोरा पहाड़ियों में तलाशने में लगा सकती थीं.

अमरीका और उसके सहयोगी देशों द्वारा कई हफ़्तों की बमबारी के बाद ही कंधार का पतन हुआ था.

तालेबान ने राजधानी काबुल और जलालाबाद नवंबर महीने में ही छोड़ दिया था.

तालेबान ने सितंबर 1996 से अक्टूबर 2001 तक अफ़ग़ानिस्तान के कुछ हिस्सों पर शासन किया था.

पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने उसे मान्यता भी दी थी.