सीजेआई ने क्यों कहा, 'बेरोज़गार युवा कॉकरोच जैसे, कुछ पत्रकार और एक्टिविस्ट बन कर सिस्टम पर करते हैं हमला'

इमेज स्रोत, Getty Images
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक वकील को फटकार लगाई.
लाइव लॉ के मुताबिक़, वकील 'सीनियर' डेजिग्नेशन के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के ख़िलाफ़ बार-बार याचिकाएं दायर कर रहा था. खुद पेश होते हुए वकील ने बताया कि यह तीसरी बार है जब वह कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा रहा है.
उसने दलील दी कि हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के उस पिछले निर्देश का पालन करने में विफल रहा है, जिसमें टाल दी गई या खारिज की गई याचिकाओं पर जल्द से जल्द पुनर्विचार करने को कहा गया था.
याचिका पर नाखुशी ज़ाहिर करते हुए चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "पूरी दुनिया शायद 'सीनियर' पदनाम के लिए योग्य हो सकती है, लेकिन कम से कम आप तो बिल्कुल नहीं हैं. अगर हाई कोर्ट आपको 'सीनियर' का दर्जा देता भी है, तो हम आपके पेशेवर आचरण को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देंगे."
इस दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने वकील से पूछा, "क्या आपके पास कोई और मुक़दमा नहीं है, सर? सिवाय अपने 'सीनियर' पदनाम को पक्का करवाने के? क्या यही उस व्यक्ति का लेवल है जो 'सीनियर' पदनाम की उम्मीद कर रहा है?"
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “पहले अवमानना का मामला दर्ज करो, फिर आवेदन करो.”
लाइव लॉ के मुताबिक, सीजेआई ने एक आदेश जारी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता किसी भी 'सीनियर' पदनाम का हकदार नहीं है, क्योंकि वह बेबुनियाद याचिकाएं दायर कर रहा था.
इसके बाद वकील ने माफ़ी मांगी और अनुरोध किया कि इस आदेश को वापस ले लिया जाए.
जस्टिस बागची ने कहा कि 'सीनियर' पदनाम एक ऐसी मान्यता है जो अदालत देती है, न कि इसे पाने के लिए पीछे भागा जाता है.
सीजेआई ने कहा कि वह एक ऐसे उचित मामले का इंतज़ार कर रहे हैं जिसके ज़रिए दिल्ली के कई वकीलों की एलएलबी डिग्रियों की सीबीआई जांच का आदेश दिया जा सके. ये वकील सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चीज़ें पोस्ट करते रहते हैं.
उन्होंने कहा, "मुझे उनकी लॉ डिग्रियों की प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह है. वे फ़ेसबुक, यूट्यूब वगैरह पर जो चीज़ें पोस्ट कर रहे हैं, क्या उन्हें लगता है कि हम उन्हें देख नहीं रहे हैं?"
वकील के बार-बार माफ़ी मांगने के बाद, बेंच ने अपना आदेश वापस ले लिया.
सीजेआई ने कहा कि समाज में पहले से ही काफ़ी "पैरासाइट्स" मौजूद हैं जो न्यायपालिका पर हमला कर रहे हैं, और कहा कि वकीलों को उनके साथ हाथ नहीं मिलाना चाहिए.
लाइव लॉ के मुताबिक, मुख्य न्यायधीश ने कहा, "समाज में पहले से ही ऐसे पैरासाइट्स हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं, और आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? कुछ युवा कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें कोई रोज़गार नहीं मिलता और पेशे में भी उनकी कोई जगह नहीं होती.”
“उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ अन्य तरह के कार्यकर्ता बन जाते हैं, और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं. और आप लोग अवमानना याचिकाएं दायर करते हैं."
लाइव लॉ के मुताबिक वकील ने कहा कि वह अपने पेशे को लेकर बहुत गंभीर हैं, और उनके पांच और मामले आज सुप्रीम कोर्ट में ही लिस्टेड हैं.
जस्टिस बागची ने उनसे कहा, "आप उन मामलों पर ध्यान दें. सीनियर एडवोकेट का दर्जा ऐसी चीज़ है जो दी जाती है, इसके लिए पीछे नहीं पड़ा जाता. क्या यह सही लगता है कि आप सीनियर डेज़िग्नेशन का दर्जा पाने के लिए दुनिया के अंत तक पीछे पड़े रहें?"
बेंच ने आखिरकार इस अर्ज़ी को वापस ली गई मानकर खारिज कर दिया.
वकील ने पिछले साल एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उन्हें सीनियर डेज़िग्नेशन के लिए विचार न करने के फैसले को चुनौती दी थी. बाद में, उन्होंने एक अवमानना याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया कि हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के एक निर्देश का पालन नहीं किया. पिछले साल दिसंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अवमानना याचिका खारिज कर दी थी.
हाई कोर्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने पीठ को सूचित किया कि 'सीनियर' पदनाम प्रक्रिया के लिए फिलहाल इंटरव्यू चल रहे हैं.






















