लाइव, इसराइल और लेबनान के बीच इस शर्त के साथ हुआ युद्धविराम समझौता

अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इसराइल और लेबनान ने सीज़फ़ायर लागू करने पर सहमति जताई है, हालाँकि इसके लिए एक शर्त यह है कि हिज़्बुल्लाह को अपने हमले पूरी तरह रोकने होंगे.

सारांश

  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में सैन्य कार्रवाई से रोकने के लिए अमेरिकी संसद के सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स ने एक प्रस्ताव पास किया है
  • अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इसराइल और लेबनान ने सीज़फ़ायर लागू करने पर सशर्त सहमति जताई है
  • ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक गार्ड्स कॉर्प्स के प्रवक्ता ने कहा है कि उन्होंने कुवैत एयरपोर्ट के पैसेंजर टर्मिनल पर कोई मिसाइल हमला नहीं किया है
  • अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इसराइल और लेबनान युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं

लाइव कवरेज

चंदन कुमार जजवाड़े

  1. इसराइल और लेबनान के बीच इस शर्त के साथ हुआ युद्धविराम समझौता, डेविड ग्रिटन और हेलेन सुलीवन

    बुधवार को दक्षिणी लेबनान में इसराइली हवाई हमले के बाद की तस्वीर

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    इमेज कैप्शन, बुधवार को दक्षिणी लेबनान में इसराइली हवाई हमले के बाद की तस्वीर

    अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इसराइल और लेबनान ने सीज़फ़ायर लागू करने पर सहमति जताई है, हालाँकि इसके लिए एक शर्त यह है कि हिज़्बुल्लाह को अपने हमले पूरी तरह रोकने होंगे.

    यह सहमति तब बनी जब बुधवार को दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमलों में कम से कम नौ लोग मारे गए और हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर रॉकेट हमले किए.

    अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान में कहा, "सभी देशों ने इस बात की पुष्टि की है कि इसराइल और लेबनान के बीच संबंधों का भविष्य दोनों संप्रभु सरकारों को ही तय करना चाहिए. उन्होंने किसी भी देश या नॉन स्टेट एक्टर की ओर से लेबनान के भविष्य को बंधक बनाने के किसी भी प्रयास को ख़ारिज किया."

    यह समझौता इस शर्त पर भी आधारित है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल के नियंत्रण वाले उस क्षेत्र से "हिज़्बुल्लाह के सभी लड़ाकों को हटा दिया जाए". यह इलाक़ा लिटानी नदी से लेकर सीमा तक फैला हुआ है और जिसे समझौते में 'साउथ लिटानी सेक्टर' कहा गया है.

    मार्च के अंत में, इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा था कि आईडीएफ़ दक्षिणी लेबनान के एक बड़े इलाक़े में एक सुरक्षा क्षेत्र स्थापित करेगा, और जब तक उत्तरी इसराइल सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक विस्थापित हुए हज़ारों निवासियों को वहां वापस लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

    यह सीज़फ़ायर समझौता सोमवार को हुई एक आंशिक सीज़फ़ायर सहमति के बाद आया है. लेबनान ने कहा था कि इस सहमति के तहत इसराइल बेरूत पर बमबारी नहीं करेगा, जिसके बदले में हिज़्बुल्लाह इसराइल पर हमला नहीं करेगा.

    दोनों देश 22 जून को फिर मिलेंगे ताकि "एक व्यापक समझौते तक पहुंचने के मक़सद से" आगे की बातचीत की जा सके. हिज़्बुल्लाह ने अभी तक इस घोषणा पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है.

  2. ईरान युद्ध पर राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिकी संसद ने दिया बड़ा झटका, क्वासी ग्यांफ़ी असीडू, वॉशिंगटन

    ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से मंज़ूरी नहीं ली थी

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स ने एक प्रस्ताव पास किया है.

    यह प्रस्ताव 208 के मुक़ाबले 215 वोटों से पास हुआ. ऐसा तब संभव हुआ जब चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेटिक पार्टी का साथ दिया.

    अमेरिकी संसद में युद्ध को लेकर असहमति का ऐसा सार्वजनिक प्रदर्शन कभी-कभार ही देखने को मिलता है.

    ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका ने इसी साल फ़रवरी में युद्ध शुरू किया था. यह चौथी बार है जब हाउस ने ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों पर लगाम लगाने की कोशिश की है.

    आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ने इन शक्तियों के लिए संसद की मंज़ूरी नहीं ली थी.

    हाउस के इस प्रस्ताव को अभी भी रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली अमेरिकी सीनेट की मंज़ूरी मिलना बाकी है.

    भले ही यह प्रस्ताव सीनेट में पास हो जाए, लेकिन इस बात की संभावना कम ही है कि यह ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से रोक पाएगा.

    ट्रंप इस प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो इसे रद्द करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत होगी.

    सीनेट ने मई में भी इसी तरह का एक प्रस्ताव आगे बढ़ाया था. सात पिछली नाकाम कोशिशों के बाद यह प्रस्ताव आगे बढ़ा था, लेकिन अभी तक इस पर पूरे सदन में वोटिंग नहीं हुई है.