लाइव, न्यूयॉर्क कैपिटल पर हमले की साज़िश के आरोप में महिला गिरफ़्तार

शिकायत के मुताबिक, बोवी ने कथित तौर पर अंडरकवर एजेंटों से कहा था, “मैं इमारत का जितना हो सके उतना हिस्सा नष्ट करना चाहती हूं और सीनेटरों को मारना चाहती हूं."

सारांश

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल

  1. न्यूयॉर्क कैपिटल पर हमले की साज़िश के आरोप में महिला गिरफ़्तार, मैक्स मात्ज़ा

    बोवी

    इमेज स्रोत, DOJ/FBI

    इमेज कैप्शन, पुलिस ने बोवी की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें वह एक शॉपिंग ट्रॉली के साथ स्थानीय हार्डवेयर स्टोर पर कथित तौर पर बम बनाने के पार्ट्स खरीदते हुए दिखाई दे रहा रही हैं

    अमेरिकी जांच एजेंसी एफ़बीआई ने न्यूयॉर्क की एक महिला को गिरफ़्तार किया है. उस पर आरोप है कि वह ऑल्बनी में राज्य की कैपिटल बिल्डिंग को बम से उड़ाकर वहां मौजूद सांसदों को मारने की योजना बना रही थी.

    अभियोजकों के मुताबिक, 35 साल की जेसिका बोवी ने पहले ही इस्लामिक स्टेट के प्रति अपनी वफादारी जताई थी. उस पर एक ऐसे विदेशी आतंकी संगठन को मदद या संसाधन देने का आरोप लगाया गया है, जिसे अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है.

    अभियोजकों का कहना है कि बोवी ने इस इमारत की कई बार निगरानी की थी. गिरफ़्तारी के समय उसके पास एक नकली बम और एक ख़राब बंदूक थी. ये दोनों चीजें कथित तौर पर अंडरकवर एजेंटों ने उसे दी थीं, क्योंकि उन्हें उस पर शक था.

    क्रिमिनल शिकायत के मुताबिक, बोवी ने कथित तौर पर अंडरकवर एजेंटों से कहा था, “मैं इमारत का जितना हो सके उतना हिस्सा नष्ट करना चाहती हूं और सीनेटरों को मारना चाहती हूं."

    अभी यह साफ नहीं है कि बोवी अपने ऊपर लगे आरोपों के ख़िलाफ़ अदालत में मुकदमा लड़ेंगी या नहीं.

    ऑल्बनी की रहने वाली बोवी ने कथित तौर पर एफ़बीआई के मुखबिरों के साथ अपनी योजना पर चर्चा की थी. वह कई हफ्तों तक ऐसे एजेंटों के संपर्क में भी रही, जो खुद को आईएस के सदस्य बताकर उससे मिले थे.

    अभियोजकों के मुताबिक, बोवी ने न्यूयॉर्क की स्टेट कैपिटल बिल्डिंग को इसलिए चुना क्योंकि उसे लगा कि यह व्हाइट हाउस की तुलना में आसान निशाना होगा.

  2. डोनाल्ड ट्रंप: ज़रूरत पड़ती तो ईरान पर 100 बार और हमला करता

    डोनाल्ड ट्रंप

    इमेज स्रोत, Finn Gomez/Getty Images

    इमेज कैप्शन, एक रेडियो इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अगर वो ईरान पर कार्रवाई नहीं करते, तो आज इसराइल और पूरा मध्य-पूर्व तबाह हो चुका होता

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए ज़रूरत पड़ती, तो वह ईरान पर 100 बार और हमला करने से भी पीछे नहीं हटते.

    एक रेडियो इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अगर वो ईरान पर कार्रवाई नहीं करते, तो आज इसराइल और पूरा मध्य-पूर्व तबाह हो चुका होता.

    ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का आदेश उस समय दिया था, जब उनके मुताबिक ईरान परमाणु हथियार बनाने से सिर्फ दो हफ्ते दूर था.

    होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर भी ट्रंप ने दावा किया कि इसका नियंत्रण अमेरिका के हाथ में है. उन्होंने एक बार फिर कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी कमज़ोर कर दिया है और उसकी अर्थव्यवस्था ढहने की कगार पर है.

    ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते (बराक ओबामा के दौर का परमाणु समझौता) को “एक आपदा” बताया.

    उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका का इस समझौते से बाहर निकलना ज़रूरी था.

    ट्रंप ने ईरान को “मध्य-पूर्व का दबंग” बताते हुए कहा कि ईरान ने क़तर, बहरीन, कुवैत और यूएई जैसे देशों पर भी हमला किया, जो कुछ हद तक ईरान का समर्थन कर रहे थे.

    उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान इन सभी देशों को तबाह कर देता और इसके बाद अमेरिकी ज़मीनी हमला करने की तैयारी करता.

    क्या बोले अमेरिकी वित्त मंत्री

    अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अमेरिकी सहयोगी देशों से ईरान की अर्थव्यवस्था को “तहस-नहस” करने की अमेरिका की कोशिश में साथ देने की अपील की है.

    बेसेंट ने न्यूज चैनल सीएनबीसी से बातचीत में कहा, “हम इस शासन को गिराने जा रहे हैं. अब वक्त आ गया है कि हमारे सहयोगी और दुनिया के बाकी देश फैसला करें.”

    उन्होंने आगे कहा, “या तो आप हमारे साथ हैं या हमारे ख़िलाफ़.”

    बेसेंट का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो भी देश ईरान के शासन को “किसी भी तरह की मदद या सहारा” देगा, उसे “भयंकर आर्थिक नतीजे” भुगतने पड़ेंगे.

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