लाइव, जेन अल्फ़ा के 'स्कूल ठीक करो' आंदोलन के बीच यूपी के स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक

उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में जेन अल्फ़ा छात्र-छात्राएं स्कूलों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

सारांश

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  • गृह मंत्री अमित शाह
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
  • ई20 पेट्रोल से लोगों की दिक्कतें
  • मिड-डे मील का खाना खाने से बच्चे बीमार
  • जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा पर स्टूडेंट्स ने यूं मनाया जश्न
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
  • पश्चिम बंगाल: बीरभूम के होटल में आग से 7 लोगों की मौत

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल, दीपक मंडल

  1. कार्टून: स्कूल में होमवर्क

    आज का कार्टून
    इमेज कैप्शन, बिहार के स्कूल में मिड-डे मील में नमक की जगह डिटर्जेंट डालने की घटना पर आज का कार्टून
  2. जेन अल्फ़ा के 'स्कूल ठीक करो' आंदोलन के बीच यूपी के स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक, गौरव गुलमोहर, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए

    स्कूल में प्रदर्शन
    इमेज कैप्शन, लखनऊ में स्कूल में बेहतर सुविधाओं की मांग करती छात्राएं

    उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों और यूट्यूबर्स के प्रवेश को लेकर कई ज़िलों में आदेश जारी किए गए हैं.

    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे आदेश सामने आए हैं.

    इस बीच, उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में जेन अल्फा छात्र-छात्राएं स्कूलों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

    जिसके बाद आजमगढ़, बलिया, आगरा, बस्ती, अयोध्या और बलरामपुर समेत कई जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बिना अनुमति बाहरी लोगों के स्कूल परिसर में प्रवेश और फोटो या वीडियोग्राफी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं.

    अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लाल चन्द्र ने आदेश जारी करते हुए बाहरी व्यक्तियों और युट्यूबर के प्रवेश पर रोक लगा दी है.

    बेसिक शिक्षा अधिकारी लाल चन्द्र ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "हमारे शिक्षकों और शिक्षक संघ की ओर से मांग के बाद यह आदेश जारी किया गया है."

    स्कूल में महिला शिक्षक और बालिकाएं पढ़ाई करती हैं, उनकी सुरक्षा को देखते हुए आदेश जारी किया गया है.

    क्या जेन अल्फ़ा आंदोलन को देखते हुए यह आदेश जारी किया गया है?

    इस सवाल के जवाब उन्होंने कहा, "जेन अल्फ़ा के आंदोलन को देखते हुए नहीं बल्कि ऐसे लोगों को प्रवेश की मनाही है जो वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन करके प्रवेश करते हैं. स्कूल में मौजूद प्रिंसिपल की अनुमति या प्रॉपर चैनल के इस्तेमाल के बाद प्रवेश कर सकते हैं."

    बलरामपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चंद्र श्रीवास्तव ने भी आदेश जारी करते हुए बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाया है.

  3. जंतर-मंतर प्रोटेस्ट: सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के सदस्यों के नामों को सार्वजनिक किया

    जंतर-मंतर

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    इमेज कैप्शन, कमेटी पुलिस के बलप्रयोग समेत पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जांच करेगी

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान सामने आए कई मुद्दों की जांच के लिए पूर्व जज आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है.

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ही इस कमेटी की घोषणा की थी लेकिन नामों को सार्वजनिक नहीं किया था.

    कमेटी से कहा गया है कि वो प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के ज़रूरत से ज़्यादा बलप्रयोग और पुलिसकर्मियों के घायल होने समेत कई आरोपों की जांच करे.

    जंतर-मंतर

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    इमेज कैप्शन, दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई महीने में स्टूडेंट प्रदर्शन हुआ था

    सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व हाई कोर्ट जज आरके झा और शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक आरके शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डीजीपी एलआर बिश्नोई को भी कमेटी का सदस्य बनाया है.

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई महीने में हुए स्टूडेंट प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जरूरत से ज्यादा बलप्रयोग के आरोप लगाए थे. साथ पुलिसकर्मियों की ओर से पैलेट गन के इस्तेमाल के भी आरोप लगे थे.

  4. झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाएं रद्द करने के फ़ैसले पर स्टे लगाया

    झारखंड हाई कोर्ट ने जेपीएससी की परीक्षाएं रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के फ़ैसले पर स्टे लगा दिया है

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    इमेज कैप्शन, झारखंड हाई कोर्ट ने जेपीएससी की परीक्षाएं रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के फ़ैसले पर स्टे लगा दिया है

    झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर स्टे लगा दिया है.

    इन परीक्षाओं में सफल और इनके आधार पर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि सरकार ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना एकतरफ़ा तरीके से परीक्षाएं और उनके बाद हुई नियुक्तियां रद्द कर दीं.

    इनमें से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी चयन के बाद सरकारी नौकरी ज्वाइन भी कर चुके थे. सरकार के फ़ैसले से उनकी नौकरियां सीधे ख़तरे में पड़ गईं.

    झारखंड

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    इमेज कैप्शन, झारखंड की राजधानी रांची में इन परीक्षाओं को रद्द करने, कथित गड़बड़ियों की जांच कराने और परीक्षा में सुधार की मांग को लेकर स्टूडेंट्स ने आंदोलन किया था

    झारखंड सरकार ने कहा था कि झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित और एजेंसी टीडीपीएल के ज़रिए कराई जा रही परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं.

    सरकार के मुताबिक, सीआईडी की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इन परीक्षाओं को रद्द किया गया.

    झारखंड की राजधानी रांची में इन परीक्षाओं को रद्द करने, कथित गड़बड़ियों की जांच कराने और परीक्षा में सुधार की मांग को लेकर स्टूडेंट्स ने आंदोलन किया था. इसके बाद राज्य सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का फ़ैसला किया था.

  5. बांग्लादेश के अधिकारी ने कहा - तारिक़ रहमान की भारत यात्रा की संभावना कम, बताई वजह

    तारिक़ रहमान

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    इमेज कैप्शन, बांग्लादेशी अधिकारी के मुताबिक़ पीएम तारिक़ रहमान की भारत यात्रा की संभावना कम

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत की ओर से सम्मानजनक निमंत्रण और पारस्परिक विश्वास पर आधारित माहौल बनने तक यात्रा की संभावना कम है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि पीएम तारिक़ रहमान की अगले महीने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा की संभावना कम है.

    उन्होंने बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस से बातचीत में कहा कि जब तक पारस्परिक विश्वास पर आधारित उपयुक्त माहौल नहीं बनता और भारत की ओर से "सम्मानजनक निमंत्रण" नहीं मिलता, तब तक दौरे की संभावना कम है.

    कबीर ने कहा कि राष्ट्रीय हितों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किए बिना बांग्लादेश किसी शीर्ष स्तर की यात्रा कराने की जल्दबाजी में नहीं है.

    उनका इंटरव्यू गुरुवार को प्रकाशित हुआ है, लेकिन बातचीत 17 अगस्त को रिकॉर्ड की गई थी.

    ये टिप्पणियां 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रहमान की नई दिल्ली यात्रा को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आई हैं.

    बांग्लादेश की ओर से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बना हुआ है.

    उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच "पारस्परिक विश्वास" और सहमति के आधार पर "उपयुक्त" द्विपक्षीय माहौल तैयार किया जाता है, तो बांग्लादेश ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी को सकारात्मक रूप से देख सकता है.

    कबीर सत्तारूढ़ बीएनपी की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के संयुक्त महासचिव भी हैं.

    उन्होंने कहा कि बांग्लादेश-भारत संबंधों की दिशा और पीएम की यात्रा का फ़ैसला भारतीय नेतृत्व के दृष्टिकोण में बदलाव और बांग्लादेश के सियासी हालात पर निर्भर करेगा.

    हुमायूं ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि शेख़ हसीना को भारत में सियासी गतिविधियों की अनुमति दी जा रही है.

    उन्होंने कहा कि इस मुद्दे ने बांग्लादेश में नाराजगी पैदा की है और आरोप लगाया कि जिन लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिन्हें सजा सुनाई जा चुकी है, उन्हें राजनीतिक या मीडिया मंच उपलब्ध कराना भारत की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है.

    भारतीय विदेश मंत्रालय कह चुका है कि हसीना से जुड़े मीडिया कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और उस मंच से बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का वह समर्थन नहीं करता.

  6. इसहाक़ डार ने हूती विद्रोहियों के हमले में घायल पाकिस्तानी नाविकों के बारे में क्या बताया?

    इसहाक डार
    इमेज कैप्शन, इसहाक़ डार ने पाकिस्तानी नाविकों के शव पाकिस्तान पहुंचाने में मदद करने के लिए यमन की तारीफ़ की है

    पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा है कि तंज़ानिया के झंडे वाले एक कमर्शियल जहाज़ पर हूती विद्रोहियों के हमले में घायल हुए छह पाकिस्तानी नाविक सुरक्षित पाकिस्तान लौट आए हैं.

    इस हमले में दो पाकिस्तानी नाविक मारे गए थे. दोनों के शव पाकिस्तान पहुंचा दिए गए हैं.

    सभी संबंधित पक्षों को उनके सुरक्षित, सम्मानजनक और जल्द से जल्द स्वदेश लौटने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था.

    इसहाक़ डार ने कहा है कि यमन में पाकिस्तान का कोई राजनयिक मिशन नहीं है. इसके बावजूद यमन ने पाकिस्तान के नाविकों को वापस लेने में अहम भूमिका निभाई.

    इसहाक़ डार ने कहा कि समुद्री जहाज़ों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए.

  7. कीएव पर रूस के हमले में 13 लोगों की मौत, यूक्रेन के पास एयर डिफ़ेंस मिसाइलों की कमी

    कीएव

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    इमेज कैप्शन, यूक्रेन की राजधानी कीएव में रूसी हमले में 13 लोगों की मौत हुई है

    रूस के ताज़ा हमलों में यूक्रेन की राजधानी कीएव में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है और 40 लोग घायल हुए हैं.

    यूक्रेन के प्रधानमंत्री ने यह जानकारी दी. यूक्रेन लगातार एयर डिफ़ेंस मिसाइलों की कमी का सामना कर रहा है.

    यूक्रेन की स्टेट इमरजेंसी सर्विस के मुताबिक़ रातभर हुए हमलों में शहर के कई अपार्टमेंट ब्लॉक और गोदामों को निशाना बनाया गया. एक बच्चों के अस्पताल और स्कूल को भी नुक़सान पहुंचा है.

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि एयर डिफ़ेंस मिसाइलों की कमी की वजह से ये मौतें हुईं. यूक्रेन अपने एयर डिफ़ेंस के लिए पश्चिमी देशों से मिलने वाली मिसाइलों पर निर्भर है.

    कीएव

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    इमेज कैप्शन, लारिसा बोंदारुक उन लोगों में शामिल हैं, जिनका घर इन हमलों में तबाह हो गया

    कीएव के मेयर विताली क्लित्स्को ने बीबीसी न्यूज़ से एक तबाह अपार्टमेंट ब्लॉक के बाहर कहा कि यूक्रेन को "गोला-बारूद और मिसाइल रोधी सिस्टम की ज़रूरत है. हमें अपने सहयोगियों के समर्थन की ज़रूरत है."

    क्लित्स्को नुक़सान का जायज़ा लेने सोलोमियांस्की ज़िले में पहुंचे थे.

    उनके आसपास राहत और बचावकर्मी मलबे को हटाकर लोगों की तलाश कर रहे थे, जबकि कई लोग अपने तबाह हो चुके घरों के बाहर खड़े थे.

  8. कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय में एबीवीपी और लेफ़्ट छात्र संगठनों के बीच झड़प

    जादवपुर यूनिवर्सिटी
    इमेज कैप्शन, कोलकाता स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में छात्र संगठनों के बीच झड़प की ख़बर है. (फ़ाइल फ़ोटो)

    पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में देर रात हंगामा हुआ है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, एबीवीपी के साथ एसएफ़आई समेत कई छात्र संगठनों के बीच झड़प हुई. एसएफ़आई की ओर से बुलाई गई जनरल बॉडी की बैठक को लेकर तनाव पैदा हुआ. इस बैठक को बुलाने के अधिकार पर एबीवीपी ने सवाल उठाया था.

    पीटीआई के मुताबिक़, एबीवीपी का आरोप है कि एसएफ़आई समेत वामपंथी छात्र संगठनों के समर्थकों ने उनके समर्थकों पर हमला किया.

    इसके बाद एबीवीपी समर्थक जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुए और आरोप है कि उन्होंने एसएफ़आई समेत वामपंथी छात्र संगठनों के समर्थकों पर हमला किया.

    पीटीआई के मुताबिक़, फ़िलहाल यूनिवर्सिटी में स्थिति सामान्य है.

  9. अब मुझे यानी बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल को इजाज़त दीजिए. अब से रात दस बजे तक बीबीसी संवाददाता दीपक मंडल आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी हिन्दी के पेज पर मौजूद कुछ बड़ी ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए हुए लिंक्स पर क्लिक करें.

    - 91 फ़ीसदी पाकिस्तानियों की इंडिया पर है ये राय, प्यू रिसर्च के सर्वे पर क्या बोले विशेषज्ञ

  10. अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया

    अमित शाह

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    इमेज कैप्शन, अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस कार्यसमिति का यह फैसला “देशविरोधी” है (फ़ाइल फ़ोटो)

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ पूरा गाने की जगह केवल दो अंतरे गाने के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है.

    अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस कार्यसमिति का यह फैसला “देशविरोधी” है और संसद द्वारा बनाए गए कानून की खुली अवहेलना है.

    दरअसल कांग्रेस पार्टी ने वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद ही गाने का फ़ैसला किया है.

    उन्होंने दावा किया कि 1937 में तुष्टीकरण की राजनीति के तहत कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के दो हिस्से किए, जिससे दो-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली और आगे चलकर देश का विभाजन हुआ.

    शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर मोदी सरकार ने इस ऐतिहासिक ग़लती को सुधारते हुए पूरे गान को कानूनी स्वरूप दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टीकरण के रास्ते पर जा रही है.

    अमित शाह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के इस फैसले के ख़िलाफ़ एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश पहले ही ‘वंदे मातरम्’ को लेकर हुई इस ग़लती के परिणाम भुगत चुका है.

    कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा

    कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "हम 1937 से ‘वंदे मातरम्’ गाते आ रहे हैं, यानी 90 साल से भी ज़्यादा समय से. हमारे लिए इसमें नया क्या है? बीजेपी स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं थी. ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा था. यह हमारे लिए भावनात्मक मुद्दा है, लेकिन उनके (बीजेपी) लिए राजनीतिक मुद्दा है. वे पेपर लीक, चंदे की चोरी और अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ जैसे वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं."

  11. झारखंडः छात्रों का आंदोलन हुआ ख़त्म, जिनकी नौकरी गई, अब वो धरने पर, आनंद दत्त, बीबीसी हिन्दी के लिए रांची से

    जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम

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    इमेज कैप्शन, प्रदर्शन खत्म होने के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम बुधवार की शाम तक खाली हो गया

    झारखंड में बीते 25 जुलाई से चल रहा छात्रों का आंदोलन बुधवार, 19 अगस्त को ख़त्म हो गया. आंदोलन में मौजूद छात्र अपने घरों को लौट गए हैं.

    छात्रों का ये प्रदर्शन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हो रहा था. बुधवार की शाम तक ये स्टेडियम खाली हो गया था.

    इससे पहले आंदोलन समाप्ति की घोषणा करते हुए जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने कहा कि फिलहाल इसे स्थगित किया जाता है. हम सरकार को अगले 60 दिनों का समय दे रहे हैं. इस अवधि में अगर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो हम दोबारा आंदोलन पर विचार करेंगे.

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि आंदोलन खत्म करने का मतलब मांगों से पीछे हटना नहीं है. आगामी 60 दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो छात्र दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे.

    वहीं, दूसरी तरफ झारखंड सरकार ने जिन परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की घोषणा की है, उनमें पूर्व में पास हुए और नौकरी कर रहे लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया है.

    बीते मंगलवार की शाम जैसे ही सीएम हेमंत सोरेन ने जेपीएससी-जेएसएससी से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की बात कही, नौकरी कर रहे छात्रों का हुजूम राज्य सचिवालय परिसर में उमड़ पड़ा.

    इन छात्रों का कहना है कि सरकार हमारी जांच कर ले कि कौन पैसे देकर नौकरी कर रहा है और कौन मेरिट के बूते. जो दोषी पाए जाते हैं, उन्हें जेल भेजे और नौकरी से निकाले. लेकिन जो अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर नौकरी पाए हैं, उन्हें एक झटके में नौकरी से नहीं निकाल सकती है.

    इन छात्रों ने बुधवार की दोपहर सरकार के इस फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है.

    वहीं, मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सीआईडी से जांच कराने का फैसला ही विवादास्पद है. जब तक इसकी जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, इसकी निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती है.

  12. अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ पर क्या बोले किरेन रिजिजू

    किरेन रिजिजू

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    इमेज कैप्शन, रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार सीमा के आसपास के इलाक़ों में सड़क, कनेक्टिविटी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को तेज़ी से मज़बूत कर रही है (फ़ाइल फ़ोटो)

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित नई घुसपैठ के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पहले सीमा से लगे इलाक़ों की अनदेखी की जाती थी, लेकिन अब ये नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है.

    रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार सीमा के आसपास के इलाक़ों में सड़क, कनेक्टिविटी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को तेज़ी से मज़बूत कर रही है.

    उन्होंने इस दौरान पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के 2013 में संसद में दिए बयान का भी ज़िक्र किया. एंटनी ने उस समय माना था कि भारत की पुरानी नीति सीमा से लगे इलाक़ों को विकसित नहीं करने की थी.

    हालांकि, एंटनी ने अपने बयान में यह भी कहा था कि यह नीति यूपीए सरकार के सत्ता में आने से काफी पहले ही खत्म कर दी गई थी और उसके बाद की सरकारों ने भी इस नीति को जारी नहीं रखा.

    रिजिजू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. उन्होंने सरकार की मौजूदा सीमा नीति और बॉर्डर इलाकों में किए जा रहे विकास कार्यों को सामने रखते हुए इन दावों का जवाब दिया.

  13. अब्बास अराग़ची ने ट्रंप के ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पर साधा निशाना, क्या कहा

    अब्बास अराग़ची

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    इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची (फ़ाइल फ़ोटो)

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिका की ओर से ईरान के ख़िलाफ़ घोषित किए गए तथाकथित “इकोनॉमिक डी-डे” पर निशाना साधा है.

    उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह कदम असल में उसकी अपनी आर्थिक परेशानियों से ध्यान भटकाने की कोशिश है.

    अराग़ची ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका का “इकोनॉमिक डी-डे” उसकी अपनी आर्थिक मुश्किलों से ध्यान हटाने का तरीका है.

    बुधवार शाम को सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ़ "इकोनॉमिक डी-डे" (आर्थिक मोर्चे पर निर्णायक कार्रवाई) शुरू कर रहे हैं, क्योंकि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने में नाकाम रहा था.

    इसके बाद अब्बास अराग़ची ने अमेरिका के बढ़ते सरकारी कर्ज और ब्याज के बढ़ते खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि पुरानी और नाकाम नीतियों को दोहराने से अमेरिका को आगे भी हार और ईरानियों की नाराज़गी ही मिलेगी.

    उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी आर्थिक आतंकवाद पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और देशों की संप्रभुता के लिए ख़तरा बन रहा है.

    अराग़ची की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है. अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त तक कुल राष्ट्रीय कर्ज करीब 40.05 ट्रिलियन डॉलर था. यानी पिछले करीब एक दशक में अमेरिकी कर्ज दोगुने से भी ज्यादा हो गया है.

  14. यूएनएससी में भारत बोला, 'सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को ‘वैध’ ठहराने के लिए नहीं होना चाहिए'

    योडना पटेल

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    इमेज कैप्शन, भारत ने यूएनएससी में कहा कि सिर्फ राजनीतिक वजहों से किसी संगठन को आतंकी घोषित करना या किसी आतंकवादी का नाम प्रतिबंधों की सूची से हटाने की कोशिश करना सही नहीं है (फ़ाइल फ़ोटो)

    भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैध ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

    भारत ने यह भी कहा कि सिर्फ राजनीतिक वजहों से किसी संगठन को आतंकी घोषित करना या किसी आतंकवादी का नाम प्रतिबंधों की सूची से हटाने की कोशिश करना सही नहीं है.

    बुधवार को सुरक्षा परिषद में कामकाज के तरीकों पर हुई खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि की प्रभारी चार्ज डी’अफेयर्स और राजदूत योजना पटेल ने आतंकियों और आतंकी संगठनों को प्रतिबंध सूची में शामिल करने या उससे हटाने की प्रक्रिया में ज़्यादा पारदर्शिता और निष्पक्षता की ज़रूरत बताई.

    योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता अपने साथ बड़ी ज़िम्मेदारियां लेकर आती है और इसका इस्तेमाल सीमित राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के मंच के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए.

    उन्होंने कहा, "आतंकियों और आतंकी संगठनों को सूची में शामिल करने या हटाने के मामले में प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए. सुरक्षा परिषद में किसी देश की मौजूदगी का इस्तेमाल आतंकवादियों को प्रतिबंध सूची से हटाकर उन्हें वैध ठहराने या बिना किसी ठोस मानदंड और दस्तावेजी सबूत के राजनीतिक आधार पर किसी दूसरे संगठन को आतंकी घोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए."

    भारत लंबे समय से यूएनएससी की प्रतिबंध समितियों में आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को सूचीबद्ध करने से जुड़े फैसलों में अपनाई जाने वाली कथित अपारदर्शी प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है.

  15. दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बने ढांचे पर चला बुलडोजर, ये है वजह

    पाकिस्तान हाई कमीशन

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    इमेज कैप्शन, नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर का नज़ारा

    नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बने कुछ ढांचों को गुरुवार को अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि, जांच में पाया गया कि ये ढांचे हाई कमीशन की मंज़ूर सीमा से बाहर बनाए गए थे.

    संबंधित एजेंसियों ने जेसीबी मशीन की मदद से यह कार्रवाई की. हाई कमीशन के बाहर वाली लेन में बनाए गए ढांचों और बैरिकेड्स को हटाया गया.

    इनमें वीजा सेक्शन के पास लोगों की कतार संभालने के लिए लगाए गए इंतज़ाम भी शामिल थे.

    कार्रवाई के बाद हाई कमीशन के बाहर मलबा बिखरा नज़र आया. मौके पर टूटी हुई लोहे की रेलिंग और गेट, मुड़े हुए धातु के फ्रेम, छत की चादरें, ईंटें, कंक्रीट और प्लास्टर के टुकड़े पड़े दिखाई दिए.

  16. राहुल गांधी को 30 शर्तों के साथ मिली पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की मंजूरी

    राहुल गांधी

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    इमेज कैप्शन, बुधवार को जारी पुलिस के अनुमति आदेश के मुताबिक, कार्यक्रम में आठ हज़ार से दल हज़ार लोगों के शामिल होने की संभावना है.

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 22 अगस्त को पुणे में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पुलिस ने मंजूरी दे दी है. हालांकि, पुलिस ने कार्यक्रम के लिए 30 शर्तें तय की हैं.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस ने आयोजकों को ऐसे बैनर, पोस्टर या तस्वीरें लगाने से मना किया है, जिन्हें आपत्तिजनक माना जा सकता है. साथ ही, आयोजकों को धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाने का निर्देश दिया गया है.

    ‘छात्रों की गूंज’ खास तौर पर महिला छात्रों के लिए आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम में शिक्षा, सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के अवसरों जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.

    यह कार्यक्रम 22 अगस्त को शाम 4:30 बजे से रात 9:30 बजे तक शहर के आरटीओ चौक के पास स्थित एसएसपीएमएस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा.

    बुधवार को जारी पुलिस के अनुमति आदेश के मुताबिक, कार्यक्रम में 8,000 से 10,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है.

  17. इस देश में सोने की खदान धंसी, 100 से ज़्यादा लोगों की मौत, पॉल न्जी, बीबीसी अफ़्रीका

    माइनिंग साइट

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    इमेज कैप्शन, माइनिंग साइट पर लैंडस्लाइड के बाद बचाव और राहत कार्य जारी है

    सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक (सीएआर) के पश्चिमी हिस्से में, कैमरून की सीमा के पास एक सोने की खदान में भूस्खलन होने से 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है. एक स्थानीय अधिकारी ने बीबीसी को यह जानकारी दी.

    सामने आए वीडियो में खदान का एक हिस्सा लोगों के ऊपर गिरता दिखाई दे रहा है. इस दौरान कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते नज़र आए.

    कैमरून की सीमा से लगे शहर गरुआ-बुलाई के मेयर अदमो अब्दोन ने बीबीसी को बताया कि यह हादसा मंगलवार दोपहर हुआ.

    घटना के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है.

    अभी यह साफ नहीं है कि खदान में भूस्खलन किस वजह से हुआ. अब्दोन ने बताया कि अब तक 107 शव मलबे से निकाले जा चुके हैं.

    हादसे में बचे एक खनिक सेड्रिक मबांगो ने एएफ़पी को बताया, "ज़मीन पूरी तरह धंस गई और लोग मलबे में दब गए. मेरे आपसे बात करने के वक्त भी कुछ लोग अभी मलबे में फंसे हुए हैं."

    कैमरून के ईस्ट रीजन के गवर्नर के मुताबिक, मारे जाने वालों में कम से कम तीन लोग कैमरून के नागरिक थे. उनके शव अंतिम संस्कार के लिए वापस कैमरून भेजे जा रहे हैं. वहीं, घायलों के इलाज के लिए भी इंतज़ाम किए जा रहे हैं.

    एएफ़पी के मुताबिक, घायलों और हादसे में बचे लोगों को खदान से करीब 50 किलोमीटर दूर सीएआर के बाबुआ शहर के अस्पताल ले जाया जा रहा है.

    स्थानीय मीडिया के अनुसार, अधिकारियों ने हादसे की वजह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. बाबुआ के सरकारी अभियोजक के हवाले से बताया गया है कि शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि खदान के अंदर कई सुरंगें धंसने की वजह से यह हादसा हुआ.

    इस इलाक़े में छोटे स्तर पर पारंपरिक तरीके से खनन बड़ी संख्या में परिवारों की कमाई का मुख्य जरिया है. लेकिन यहां काम करने की परिस्थितियां खराब हैं और खनिकों को स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े कई खतरों का सामना करना पड़ता है.

    खदानों का धंसना और भूस्खलन इस इलाक़े में असामान्य नहीं है. अक्सर खदानों के गड्ढों को ठीक से बंद नहीं किया जाता और तेज बारिश के कारण मिट्टी कमज़ोर पड़ जाती है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बढ़ जाता है.

  18. रूस के मिसाइल हमले में कीएव और आसपास के इलाक़ों में कम से कम 5 लोगों की मौत

    कीएव

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    इमेज कैप्शन, गुरुवार को कीएव में हुए हमलों में से एक हमले वाली जगह से उठता धुआं

    रूस की ओर से रातभर किए गए मिसाइल हमलों में यूक्रेन की राजधानी कीएव और आसपास के इलाक़ों में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई है. हमलों में कम से कम 23 लोग घायल हुए हैं.

    यूक्रेन की स्टेट इमरजेंसी सर्विस (डीएसएनएस) ने बताया कि गुरुवार को बड़े पैमाने पर किए गए हमले में इमारतों और गोदामों को निशाना बनाया गया.

    हमलों के बाद राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं. बचावकर्मी अब तक एक व्यक्ति को मलबे से ज़िंदा निकाल चुके हैं.

    इस बीच, रूस के यूक्रेन पर हमलों के बीच पोलैंड की सेना ने “एहतियाती सैन्य विमान अभियान” शुरू करने का ऐलान किया है.

    कीएव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने बताया कि रात के हमलों में एक बच्चों का अस्पताल भी क्षतिग्रस्त हुआ है. अस्पताल की खिड़कियां टूट गईं और आसपास कई कारों में आग लग गई.

    मेयर के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी कीव के सोलोमियांस्की ज़िले में स्थित एक औद्योगिक इलाक़े को भी मिसाइलों से निशाना बनाया गया.

    वहीं, कीएव क्षेत्र के ब्रोवरी ज़ेले में हुए एक हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया. क्षेत्रीय गवर्नर तिमुर तकाचेंको ने इसकी जानकारी दी.

    क्षेत्रीय प्रशासन ने रात में ही लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की चेतावनी जारी कर दी थी. प्रशासन ने कहा था कि इलाक़े में हवाई सुरक्षा अभियान चलाए जा सकते हैं.

    रातभर क्षेत्रीय अधिकारियों की ओर से मिसाइल हमलों को लेकर लगातार नए अलर्ट जारी किए जाते रहे.

  19. कीनिया में हेलीकॉप्टर क्रैश: इक्वाडोर के इंटेलिजेंस चीफ, उनकी पत्नी समेत सात लोगों की मौत

    केन्या

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि हादसे में पांच अमेरिकी नागरिक भी मारे गए हैं

    कीनिया में बुधवार को हुए एक हेलीकॉप्टर क्रैश में इक्वाडोर के इंटेलिजेंस चीफ़ और उनकी पत्नी की मौत हो गई. हादसे में पांच अमेरिकी नागरिकों समेत कुल सात लोगों की जान गई है.

    अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि हादसे में पांच अमेरिकी नागरिक भी मारे गए हैं.

    इक्वाडोर के इंटेलिजेंस चीफ़ मिशेल सेंसी कॉन्टोगी और उनकी पत्नी स्टेफनी होलिहान उन सात लोगों में शामिल थे, जिनकी मौत सांबुरु काउंटी में हुई.

    कीनिया सिविल एविएशन अथॉरिटी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर लुईसाबा के एक संरक्षित वाइल्डलाइफ़ इलाक़े से इवासो न्यीरो नदी की तरफ एक हवाई यात्रा पर निकला था. इवासो न्यीरो कीनिया के कई इलाक़ों से होकर बहने वाली एक प्रमुख नदी है.

    अथॉरिटी ने बताया कि कीनिया के परिवहन मंत्रालय और एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन विभाग हादसे की जांच करेंगे. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हेलीकॉप्टर किस वजह से हादसे का शिकार हुआ और इसके पीछे की पूरी परिस्थितियां क्या थीं.

  20. प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल ब्रिटेन वापस लौटने की तैयारी में, सितंबर से ब्रिटिश स्कूल में पढ़ेंगे बच्चे

    प्रिंस हैरी और मेघन मार्कल

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    इमेज कैप्शन, रिपोर्ट के मुताबिक, हैरी और मेगन इसी महीने के आखिर में अमेरिका छोड़कर लंदन के बाहर एक प्राइवेट, गैर-शाही घर में शिफ्ट होने वाले हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    बीबीसी न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक, ड्यूक और डचेस ऑफ़ ससेक्स प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल अमेरिका से ब्रिटेन वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं.

    डेली टेलीग्राफ और द सन की रिपोर्ट के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, हैरी और मेगन इसी महीने के आखिर में लंदन के बाहर एक प्राइवेट, गैर-शाही घर में शिफ्ट होने वाले हैं.

    उनके दोनों बच्चे, 7 साल के प्रिंस आर्ची और 5 साल की प्रिंसेस लिलिबेट का सितंबर से ब्रिटेन के एक स्कूल में दाखिला कराया गया है.

    बताया जा रहा है कि किंग चार्ल्स को रविवार को इस फैसले की जानकारी दी गई. हालांकि, फिलहाल प्रिंस हैरी या मेगन के दोबारा शाही परिवार के कामकाजी सदस्य यानी वर्किंग रॉयल्स के तौर पर अपनी भूमिका शुरू करने की कोई योजना नहीं है.

    इस साल जुलाई में हैरी, मेगन और उनके बच्चे किंग चार्ल्स से उनके हाईग्रोव स्थित घर पर मिले थे. हालांकि, समझा जाता है कि उस मुलाक़ात के दौरान ब्रिटेन वापस लौटने की योजना पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.

    बीबीसी के मुताबिक, किंग चार्ल्स को पिछले हफ़्ते के आखिर तक इस फैसले की जानकारी नहीं थी. हालांकि, वो निजी और पारिवारिक तौर पर ससेक्स परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिलने का स्वागत कर रहे हैं.

    लेकिन हैरी और मेगन की आधिकारिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा. दोनों आगे भी शाही परिवार के कामकाजी सदस्यों के बजाय निजी नागरिकों के तौर पर ही रहेंगे.

    प्रिंस विलियम और प्रिंसेस कैथरीन को भी हैरी और मेगन के ब्रिटेन लौटने की योजना के बारे में जानकारी दे दी गई है.