राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के
सौ साल पूरे होने पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का आज अंतिम दिन था और संघ प्रमुख मोहन
भागवत ने कई मुद्दों पर अपनी राय ज़ाहिर की.
उन्होंने अपने रिटायरमेंट, बीजेपी और
संघ के रिश्ते, घुसपैठ और इस्लाम पर बात की.
उनके भाषण की पांच प्रमुख बातें-
'75 साल के बाद क्या राजनीति से रिटायर हो जाना चाहिए' सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने कहा, "मैंने ये बात मोरोपंत जी के बयान का हवाला देते हुए उनके विचार रखे थे...मैंने ये नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए... हम जिंदगी में किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं और संघ हमसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, हम संघ के लिए उस समय तक काम करने के लिए भी तैयार हैं."
संघ और बीजेपी के बीच झगड़ा है?
बीजेपी और संघ के बीच संबंधों पर भागवत ने कहा, "सिर्फ इस सरकार के साथ नहीं हर सरकार के साथ हमारा अच्छा समन्वय रहा है...कहीं कोई झगड़ा नहीं है..."
उन्होंने कहा, "मतभेद के कोई मुद्दे नहीं होते. हमारे यहां मतभेद के विचार कुछ हो सकते हैं लेकिन मनभेद बिल्कुल नहीं है. एक दूसरे पर विश्वास है...क्या बीजेपी सरकार में सब कुछ संघ तय करता है? ये पूर्णतः ग़लत बात है. मैं कई साल से संघ चला रहा हूं, वे सरकार चला रहे हैं. सलाह दे सकते हैं लेकिन उस क्षेत्र में फैसला उनका है, इस क्षेत्र में हमारा है...हम तय करते तो इतना समय लगता क्या? हम तय नहीं करते..."
मोहन भागवत ने कहा, "पहले दिन इस्लाम जब भारत में आया उस दिन से इस्लाम यहां है और रहेगा. ये मैंने पिछली बार भी कहा था. इस्लाम नहीं रहेगा ये सोचने वाला हिंदू सोच का नहीं है. हिंदू सोच ऐसी नहीं है. दोनों जगह ये विश्वास बनेगा तब ये संघर्ष खत्म होगा. पहले ये मानना होगा कि हम सब एक हैं."
उन्होंने कहा, “घुसपैठ को रोकना चाहिए. सरकार कुछ प्रयास कर रही है, धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है. अपने देश में भी मुसलमान नागरिक हैं. उन्हें भी रोज़गार की ज़रूरत है. मुसलमान को रोज़गार देना है तो उन्हें दीजिए. जो बाहर से आया है उन्हें क्यों दे रहे हो? उनके देश की व्यवस्था उन्हें करनी चाहिए."
त्योहार के दौरान मांसाहार पर क्या बोले
भागवत ने कहा, "व्रत में लोग शाकाहारी रहना चाहते हैं और अगर उन दिनों कोई ऐसा दृश्य सामने आए तो हो सकता है भावनाओं को ठेस पहुंचे. दो तीन दिन की बात है. समझदारी की बात है कि ऐसे समय इन चीजों से परहेज रखना चाहिए. तो क़ानून भी नहीं बनाना पड़ेगा."
भागवत ने कहा कि भारत के हर नागरिक के तीन-तीन बच्चे होने चाहिए.
उन्होंने कहा, “जनसंख्या नियंत्रित रहे और पर्याप्त रहे. इस लिहाज से तीन ही बच्चे होने चाहिए. तीन से ज़्यादा नहीं होने चाहिए. ये हर किसी को स्वीकार करना चाहिए."