लाइव, संसद भवन के बाहर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, क्या बोलीं महुआ मोइत्रा

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सत्तापक्ष के प्रदर्शन पर निशाना साधा.

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल

  1. संसद भवन के बाहर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, क्या बोलीं महुआ मोइत्रा

    महुआ मोइत्रा

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    इमेज कैप्शन, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सत्तापक्ष के प्रदर्शन पर निशाना साधा (फ़ाइल फ़ोटो)

    गुरुवार को संसद भवन के मकर द्वार के सामने सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखे. दोनों पक्ष हाथों में तख्तियां लेकर एक दूसरे के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे.

    सत्ता पक्ष के सांसदों के हाथों में 'राहुल गांधी जवाब दो' के प्ले कार्ड हैं, वहीं विपक्ष 'चंदा चोर, गद्दी छोड़' वाली तख्तियां लेकर नारे लगा रहा है.

    इस दौरान टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सत्तापक्ष के प्रदर्शन पर निशाना साधा.

    उन्होंने कहा, "क्या आपने ऐसा कभी देखा है? पिछले 12 साल से सत्ता में रहने वाली सरकार संसद में नेता प्रतिपक्ष के ख़िलाफ़ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगा रही है. उनकी हालत ऐसी हो गई है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद में आने से डर रहे हैं."

    "कल सीढ़ियों पर इंटरव्यू दिया गया. प्रधानमंत्री पूरे सत्र में एक दिन भी संसद नहीं आए. आज मानसून सत्र का आखिरी दिन है और ट्रेजरी बेंच हमारे साथ मुकाबला कर रही है और आज सीढ़ियों पर खड़ी है."

    दरअसल, विपक्ष संसद में नीट और राम मंदिर चंदे में अनियमितता के मुद्दे पर सरकार से चर्चा की मांग कर रहा है. वहीं, सत्ता पक्ष का आरोप है कि झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने चुप्पी साधे रखी.

    बुधवार को अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वो संसद में नीट पर चर्चा और विपक्ष के सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं.

    जिसके बाद राहुल गांधी ने कहा था कि अमित शाह की कल्पनाएं सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है.राहुल गांधी ने आगे सवाल किया, "क्या अमित शाह ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था? अगर दिया था, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए."

  2. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के बारे में कहा, 'आप अमित शाह से अपनी तुलना करेंगे'

    गिरिराज सिंह

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    इमेज कैप्शन, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा

    केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी 'मनमानी' करते हैं.

    उन्होंने कहा, "वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और कहते हैं- ‘चैलेंज करता हूं.’ किस बात की चुनौती दे रहे हैं? संसदीय व्यवस्था की अपनी मर्यादा होती है. क्या आप अमित शाह से तुलना करेंगे?”

    उन्होंने आगे कहा, "अमित शाह ने काम करके दिखाया है. अनुच्छेद 370 कैसे हटाया गया, 35ए कैसे खत्म हुआ और सीएए कैसे लागू हुआ, उन्होंने करके दिखाया है. आप देश में आतंक फैलाना चाहते हैं. आप अर्बन नक्सल की भूमिका में हैं. अगर हिम्मत है तो संसदीय व्यवस्था के मुताबिक बात कीजिए और दूसरों की बात भी सुनिए. आप हिट एंड रन की राजनीति करते हैं."

    गिरिराज सिंह ने कहा, "अमित शाह ने उनके सारे पोल खोल दिए. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष में नीट पर चर्चा करने की हिम्मत नहीं है. जब पेलेट गन के मुद्दे पर चर्चा होगी, तब नीट पर भी चर्चा होगी. उस दौरान देश के दूसरे राज्यों की भी चर्चा होगी, पंजाब की, कर्नाटक की, हिमाचल प्रदेश की और झारखंड की भी. इसलिए उनमें हिम्मत नहीं हुई.”

    उन्होंने कांग्रेस पर भी हमला बोलते हुए कहा, “कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए. खड़गे जी जैसे इतने वरिष्ठ नेता भी राहुल गांधी की ‘चमचागिरी’ करने में लगे हुए हैं."

    दरअसल बुधवार को अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वो संसद में नीट पर चर्चा और विपक्ष के सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं.

    जिसके बाद राहुल गांधी ने कहा था कि अमित शाह की कल्पनाएं सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है.राहुल गांधी ने आगे सवाल किया, "क्या अमित शाह ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था? अगर दिया था, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए."

  3. झारखंड: एफ़आईआर को लेकर विद्यार्थियों का विरोध

    रविंद्र पासवान

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    इमेज कैप्शन, एफ़आईआर को लेकर रविंद्र ने कहा कि विद्यार्थियों पर एफ़आईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए थी

    रांची में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के दौरान एफ़आईआर दर्ज होने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है.

    स्टूडेंट लीडर रविंद्र पासवान ने कहा कि प्रदर्शन को लेकर सरकार और प्रशासन को विद्यार्थियों के साथ संयम और संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए.

    उनका कहना है कि अगर प्रदर्शन के दौरान किसी ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की है, तो प्रशासन ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई करे, लेकिन इसके लिए सभी प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है.

    रविंद्र पासवान ने कहा, "हमारे प्रतिनिधिमंडल की मंत्री के साथ दो दौर की बातचीत हुई है. इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने पक्ष को तार्किक तरीके से सरकार के सामने रखा."

    उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत में मुख्यमंत्री की मौजूदगी होनी चाहिए, ताकि वे खुद विद्यार्थियों की समस्याओं और उनके नजरिए को समझ सकें. इससे विद्यार्थियों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा.

    एफ़आईआर को लेकर उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों पर एफ़आईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए थी.

    रविंद्र पासवान ने कहा, “हमारे खिलाफ एफ़आईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए थी. कल कानून-व्यवस्था को लेकर हमारी एसएसपी के साथ बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने एफ़आईआर जैसी किसी कार्रवाई का जिक्र नहीं किया था. उन्होंने कुछ असामाजिक तत्वों के होने की बात जरूर कही थी."

    "हमने भी कहा था कि ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. लेकिन अगर प्रशासन को लगता है कि कुछ छात्र गुमराह हुए या उन्होंने किसी तरह की गलती की, तो उसके लिए सभी विद्यार्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता."

    "सरकार को असामाजिक तत्वों की पहचान कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए. जब सरकार भीड़ तक अपनी बात सही तरीके से नहीं पहुंचा पाती है, तो विद्यार्थियों में गुस्सा और नाराजगी होना स्वाभाविक है. प्रशासन को अपना काम करना चाहिए, लेकिन विद्यार्थियों के मामले में संयम बरतना चाहिए और नैतिकता का भी ध्यान रखना चाहिए."

    उन्होंने आगे कहा, “जहां भी हमें लगा कि इस आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश हो रही है, हमने खुद को उससे अलग कर लिया. हमारी किसी से कोई दुश्मनी या रंजिश नहीं है. हम सभी का आशीर्वाद चाहते हैं. इसलिए हमने खुले मंच से भी कहा है कि हमें सभी का नैतिक समर्थन चाहिए. "

    रविंद्र पासवान ने कहा कि कांग्रेस के लोग सबसे पहले यहां पहुंचे थे. जेएमएम और बीजेपी के लोग भी यहां आए हैं, उन्होंने अपनी बात रखी और हमें नैतिक समर्थन दिया है.”

  4. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने फ्रांस को क्या नसीहत दी?

    अब्बास अराग़ची

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    इमेज कैप्शन, अब्बास अराग़ची ने कहा कि फ्रांस जैसे देशों को दुनिया को मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भाषण देना बंद कर देना चाहिए

    ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने फ्रांस पर तीखा हमला बोला है.

    उन्होंने कहा कि फ्रांस जैसे देशों को दुनिया को “मानवाधिकार” और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भाषण देना बंद कर देना चाहिए.

    अब्बास अराग़ची ने ग़ज़ा में इसराइल की कार्रवाई के लिए फ्रांस के समर्थन और ईरान के ख़िलाफ़ कथित आक्रामकता का जिक्र करते हुए कहा कि इन नीतियों ने फ्रांस के उस "ऊंचे नैतिक स्थान" को खत्म कर दिया है, जिसे वह अपने लिए मानता था.

    अराग़ची ने एक्स पर लिखा कि इस मामले में “पाखंड साफ नजर आता है और यह शर्मनाक है.”

    अराग़ची का यह बयान फ्रांस की विदेश नीति और मध्य-पूर्व में उसकी भूमिका को लेकर ईरान की कड़ी नाराजगी को दर्शाता है.

  5. डब्ल्यूएचओ की चेतावनी, 'इबोला साबित हो सकता है बेहद घातक', टाबी विल्सन

    टेड्रोस गेब्रियेसस

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    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रियेसस ने चेतावनी दी है कि अगर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में फैला इबोला का मौजूदा प्रकोप अगर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो यह अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन सकता है.

    टेड्रोस ने पत्रकारों से कहा कि 2026 का यह प्रकोप मौजूदा रफ्तार पर 2014-2016 के इबोला प्रकोप को भी पीछे छोड़ सकता है. उस दौरान कम से कम 11 हज़ार लोगों की मौत हुई थी.

    इस साल के इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी. अब तक कम से कम 4,300 मामले सामने आ चुके हैं और 2,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

    तीन महीने में फैलाव रोकने की कोशिश

    डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को कहा कि वह अगले तीन महीनों में वायरस के फैलाव को काबू में करने की कोशिश कर रहा है.

    हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने साफ किया कि इसका मतलब तीन महीने में बीमारी को पूरी तरह खत्म करना नहीं है. लक्ष्य फिलहाल संक्रमण को फैलने से रोकना और उसकी रफ्तार कम करना है.

    स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इबोला का यह प्रकोप मई में आधिकारिक तौर पर घोषित होने से कम से कम तीन महीने पहले ही शुरू हो गया था.

    डब्ल्यूएचओ अफ्रीका के निदेशक डॉ. मोहम्मद जनाबी ने बुनिया शहर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "हम वायरस का पीछा कर रहे हैं, लेकिन वायरस हमसे आगे है."

    उन्होंने बताया कि रिसर्च से पता चला है कि वायरस फरवरी से ही फैलना शुरू हो गया था. शुरुआत में कई मरीजों में इबोला की पहचान नहीं हो पाई और उनके लक्षणों को मलेरिया या टाइफाइड समझ लिया गया.

  6. सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास का सवाल- 'क्या अमित शाह की बैठक में मेरे परिवार को डराने-धमकाने की रणनीति बनाई गई थी?'

    सौरव दास

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    इमेज कैप्शन, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास (फ़ाइल फ़ोटो)

    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार को डराने-धमकाने के लिए पुडुचेरी पुलिस की कार्रवाई केंद्र सरकार के इशारे पर की गई.

    अब उन्होंने इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया पुडुचेरी दौरे से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया है.

    सौरव दास ने एक्स पर लिखा, "सिर्फ दो दिन पहले अमित शाह पुडुचेरी में थे, जहां उन्होंने वहां के गृह मंत्री और उपराज्यपाल से मुलाक़ात की थी. क्या इस बैठक में डराने-धमकाने की यह रणनीति बनाई गई थी?"

    उन्होंने पुडुचेरी के उपराज्यपाल के बारे में यह भी दावा किया कि वे गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कथित तौर पर "आंख और कान" के नाम से जाने जाते थे.

    दरअसल सौरव दास ने दावा किया कि उनके घर पर बुधवार को पुडुचेरी पुलिस पहुंची थी.

    उन्होंने शाम 7.10 बजे किए गए पोस्ट में लिखा है, ‘’दो घंटे पहले पुडुचेरी पुलिस मेरे परिवार के घर पहुंची और उनसे तरह-तरह के सवाल पूछकर उन्हें परेशान किया. यह उत्पीड़न क्यों किया जा रहा है? इसका आदेश किसने दिया और किस मकसद से? क्या यही कानूनी प्रक्रिया है?’’

    ''पुडुचेरी की बीजेपी सरकार मेरे परिवार को क्यों डरा-धमका रही है? यह पुडुचेरी सरकार का चरित्र नहीं है. यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर किया जा रहा है.''

  7. ब्रिटेन और यूरोप में दिखा करीब 30 साल का सबसे शानदार सूर्य ग्रहण

    एडिनबरा

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    इमेज कैप्शन, एडिनबरा के कैल्टन हिल पर सूर्य ग्रहण देखने के लिए भारी भीड़ जमा हुई

    ब्रिटेन और यूरोप के लोगों ने करीब 30 साल बाद इतना शानदार सूर्य ग्रहण देखा.

    ब्रिटेन में लोगों को आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिला. यह ग्रहण स्थानीय समय शाम करीब 7 बजे के बाद अपने चरम पर पहुंचा. उस वक्त ज्यादातर इलाकों में चंद्रमा ने सूर्य का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ढक लिया था.

    हालांकि, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन के कुछ हिस्सों में लोगों को पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने का मौका मिला. इन जगहों पर कुछ समय के लिए दिन में ही पूरी तरह अंधेरा छा गया और लोगों ने इस अद्भुत नजारे का अनुभव किया.

    सूर्य ग्रहण

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    इमेज कैप्शन, बुधवार को उत्तरी स्पेन के रेइनोसा शहर के पास सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक दिया
    सूर्य ग्रहण

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    इमेज कैप्शन, नीदरलैंड्स के एस्टेन से देखा गया आंशिक ग्रहण
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    इमेज कैप्शन, जर्मनी के हर्टेन शहर में लोग 50 सालों में लगने वाले सबसे बेहतरीन आंशिक ग्रहण को देखने के लिए जमा हुए
    सूर्य ग्रहण

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    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन में बुधवार से ज़्यादा पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने के लिए दशकों का इंतज़ार करना होगा
    आर्सेनल की जेराल्डिन रॉयटेलर

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    इमेज कैप्शन, आर्सेनल की जेराल्डिन रॉयटेलर 12 अगस्त, 2026 को स्पेन के कार्टाजेना में ला मांगा क्लब में आर्सेनल महिला टीम के ट्रेनिंग कैंप के दौरान सूर्य ग्रहण देखती हुईं
  8. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट देंगी इस्तीफ़ा, क्या है वजह

    कैरोलिन लेविट

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट इस महीने के आखिर में अपने पद से इस्तीफा दे देंगी.

    ट्रंप ने लेविट को अपने “सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक” बताते हुए कहा कि वह अपने छोटे बच्चों और परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहती हैं. ट्रंप ने कहा कि वह उनके इस फैसले को पूरी तरह समझते और सम्मान करते हैं.

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लेविट अब उनकी शीर्ष बाहरी सलाहकारों में से एक रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी में भी उनकी प्रभावशाली भूमिका बनी रहेगी.

    28 साल की लेविट पिछले साल व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनी थीं. इस पद पर पहुंचने वाली वह अब तक की सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि उनकी जगह अगला प्रेस सचिव कौन होगा.

    लेविट ने मई में एक बेटी को जन्म दिया था. उनका एक दो साल का बेटा भी है. वह पिछले महीने ही मातृत्व अवकाश के बाद काम पर लौटी थीं. उनके पति का नाम निकोलस रिकियो है.

    ट्रंप के ऐलान के बाद लेविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के तौर पर काम करना “उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सम्मान और रोमांच” रहा है.

    उन्होंने कहा कि एक मां बनना, दूसरी संतान का स्वागत करना और दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण नौकरियों में से एक को साथ-साथ निभाना उनकी ज़िंदगी का सबसे सुखद, लेकिन सबसे मुश्किल दौर रहा है.

    लेविट ने आगे कहा कि बेटी के जन्म के बाद व्हाइट हाउस लौटने पर उन्हें लगातार यह महसूस हुआ कि वह अपने दो छोटे बच्चों की अच्छी मां बनने के साथ-साथ प्रेस सचिव की नौकरी के लिए जरूरी लगातार समय, ऊर्जा और ध्यान नहीं दे पा रही हैं.

    इसी वजह से उन्होंने व्हाइट हाउस छोड़ने और जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत करने का फैसला लिया है.

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