नेहा बोरा ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने पर क्या कहा?
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से सोमवार को जारी नोटिस में कहा गया है कि अब इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को निर्धारित किया गया है.
नेहा बोरा ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने पर क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा(फ़ाइल फ़ोटो)
जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल से हटाए जाने पर आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा कि जंतर मंतर को छीन लेने से प्रतिरोध की आवाज़ नहीं दबेगी.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "जंतर-मंतर को अधिसूचित विरोध स्थल से हटाकर लोकतंत्र को खत्म करने की आपकी हर कोशिश नाकाम होगी. जनता की आवाज़ कायम रहेगी. लोकतंत्र फलता-फूलता रहेगा."
जंतर-मंतर की जगह सरकार ने तीन जगहें निर्धारित की हैं.
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से सोमवार को जारी नोटिस में कहा गया है कि अब इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को निर्धारित किया गया है.
उत्तराखंड, केरल समेत छह राज्यों को मिले नए राज्यपाल
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ने सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया है (फ़ाइल फ़ोटो)
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को केरल, तमिलनाडु समेत छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की.
राष्ट्रपति भवन ने प्रेस रिलीज़ जारी कर इसकी जानकारी दी.
राष्ट्रपति ने सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया है. वहीं, केरल के मौजूदा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया है.
राष्ट्रपति की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, बृज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. इसके अलावा डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक और डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है.
साथ ही दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
राजस्थान: बीजेपी के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की पीट-पीट कर हत्या, मोहर सिंह मीणा, जयपुर से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना (फ़ाइल फ़ोटो)
राजस्थान के भरतपुर ज़िले में बयाना से पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की रविवार को पीट-पीट कर हत्या कर दी गई.
जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में सोमवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.
हरियाणा के फरीदाबाद स्थित मृतक अतर सिंह भड़ाना के पैतृक गांव में सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया.
भरतपुर ज़िला पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश मीणा ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से फ़ोन पर बताया है, "परिजनों की शिकायत पर 33 नामजद और सत्तर से अस्सी अन्य के ख़िलाफ़ के ख़िलाफ़ सोमवार रात क़रीब साढ़े सात बजे एफ़आईआर दर्ज की गई है."
एसपी राजेश मीणा के मुताबिक, "वैर पुलिस थाना इलाक़े के भौंडा गांव में क्रेशर के रास्ते को लेकर ग्रामीण और क्रेशर मालिक (मृतक अतर सिंह भड़ाना) के बीच बीते दो साल से रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था. ग्रामीण नहीं चाहते थे कि क्रेशर चले. मामला कोर्ट में भी गया था."
घटना के बाद से गांव के कई युवा और वयस्क फरार हैं. ज़्यादातर घरों पर ताला लगा हुआ है.
वैर पुलिस थाना प्रभारी धीरेन्द्र ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "हम फरार अभियुक्तों की तलाश में दबिश दे रहे हैं. एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है."
मृतक अतर सिंह भड़ाना फरीदाबाद के पाली गांव के रहने वाले थे. वह बीजेपी के टिकट पर बयाना से विधायक रहे और बाद में कांग्रेस से चुनाव लड़े लेकिन हार गए थे.
अतर सिंह भड़ाना की एक बेटी हिमाचल कैडर की आईएएस अधिकारी हैं, दो बेटी डॉक्टर हैं और बेटा फरीदाबाद रहता है. भड़ाना और उनकी पत्नी बयाना में रहते थे.
रविवार शाम करीब छह बजे भौंडा गांव में वह अपने क्रेशर पर गए थे. आरोप हैं कि इसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पहुंच कर लाठी डंडों से अतर सिंह पर हमला कर दिया.
गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें वैर सीएचसी ले गए और वहां से सीधा जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाया गया. यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
केरल कांग्रेस ने चीफ़ जस्टिस का मांगा इस्तीफ़ा, पवन खेड़ा ने दी सफ़ाई
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि उनकी पार्टी इस रुख से पूरी तरह असहमत है (फ़ाइल फ़ोटो)
केरल कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का इस्तीफ़ा मांगा. हालांकि इस पोस्ट को बाद में हटा लिया गया.
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि उनकी पार्टी इस रुख़ से पूरी तरह असहमत है.
उन्होंने कहा, "यह किसने किया, इससे फ़र्क नहीं पड़ता, लेकिन हम इससे पूरी तरह असहमत हैं. यह पूरी तरह ग़लत है. हमें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हम सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं. यही वजह है कि हम अपनी बात लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और उसका दरवाज़ा खटखटाया, क्योंकि हमें न्यायपालिका पर विश्वास है."
पवन खेड़ा ने आगे कहा, "लोकतंत्र की रक्षा करने और उसे बचाने के लिए हम हर संभव क़ानूनी और लोकतांत्रिक रास्ता अपनाएंगे. हम लोकतंत्र को ज्ञानेश कुमार और उनके दो आकाओं के चंगुल से बाहर निकालना चाहते हैं."
उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दल आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं और जल्द ही अगले कदम के बारे में बताया जाएगा.
दिनभर: पुलिस के दमन चक्र से नहीं बच पाए पत्रकार भी
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कर्नाटकः मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, कई लोग हिरासत में, इमरान क़ुरैशी, बेंगलुरु से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
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बेंगलुरु में सोमवार को वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे विभिन्न संगठनों और कार्यकर्ताओं के करीब 80 लोगों को मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के पास से हिरासत में लिया गया.
ये सभी एसआईआर के खिलाफ़ा प्रदर्शन के लिए सीईओ ऑफ़िस पहुंचे थे.
ये सभी संगठन "माय वोट, माय राइट" नाम के एक साझा मंच का समर्थन करते हैं. उनकी मांग थी कि एसआईआर को रद्द किया जाए और इससे जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी कार्रवाई की जाए.
पुलिस के अनुसार, ये लोग अचानक मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने वाली सड़क से निकलकर वहां पहुंचे और इस दौरान उनकी पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई. इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.
बेंगलुरु पुलिस के सेंट्रल डिविजन के डीसीपी अक्षय मचिंद्र हकाय ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "उन्हें हिरासत में लिया गया क्योंकि मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. उन्होंने प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति भी नहीं ली थी."
"माय वोट, माय राइट" मंच की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, जनवरी 2025 की स्थिति के अनुसार मतदाता सूची को बहाल करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि किसी भी मतदाता का वोट देने का अधिकार न छिने.
मुख्य चुनाव अधिकारी को सौंपे गए एक ज्ञापन में मंच ने दावा किया है कि जिन एक करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, उनमें बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी वाले, प्रवासी मज़दूर, सिंग्ल विमेंस, ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य, दलित और धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हैं.
मंच का कहना है, "अब यह साफ़ होता जा रहा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वे फॉर्म-6 के जरिए भी अपने नाम दोबारा जुड़वाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं. फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने की दर बेहद कम रही है."
मंच ने यह भी आरोप लगाया कि फॉर्म-7 (मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म) का दुरुपयोग किया गया है.
उनके अनुसार, इससे राजनीतिक कारणों से मतदाताओं के नाम हटाने की गुंजाइश बनी और खास तौर पर मुस्लिम तथा दलित समुदायों के मतदाता प्रभावित हुए हैं.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 100 पूर्व छात्रों ने बयान जारी कर दिल्ली पुलिस कार्रवाई की निंदा की
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इमेज कैप्शन, 10 अक्तूबर को प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेती दिल्ली पुलिस
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 100 पूर्व छात्रों ने 10 अक्तूबर को दिल्ली में हुए घटनाक्रम को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया है.
बयान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कथित "पुलिस बर्बरता, गैर-कानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन" की निंदा की गई है.
पूर्व छात्रों ने विशेष रूप से वरिष्ठ वकील शादान फ़रासत के प्रति एकजुटता जताई है, जो हार्वर्ड लॉ स्कूल के 2009 बैच के पूर्व छात्र हैं.
बयान में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया.
बयान में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पॉलिसी हेड मेहर पसरीचा का भी उल्लेख किया गया है, जो हार्वर्ड केनेडी स्कूल की 2025 बैच की पूर्व छात्रा हैं. पूर्व छात्रों ने उनकी हिरासत पर भी चिंता जताई है.
संयुक्त बयान में कहा गया है, "हम सरकार और सभी क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों से अपील करते हैं कि वे तत्काल संवैधानिक अधिकारों के किसी भी उल्लंघन को रोकें, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और क़ानूनी सहायता तक पहुंच का सम्मान करें और कथित दुरुपयोग के लिए ज़िम्मेदार लोगों को क़ानून के मुताबिक़ जवाबदेह ठहराएं."
इंडिया गठबंधन के मार्च के बीच बीजेपी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस, अनुराग ठाकुर ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया
बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया.
सोमवार को विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की कोशिश की. इसमें भारी संख्या में लोग शामिल भी हुए.
विपक्ष के मार्च के दौरान बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने कहा, "राहुल गांधी और कांग्रेस का फंडा साफ है, सत्ता नहीं मिले तो अराजकता फैला दो. देश की जनता को अदालत के सामने अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है."
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस खुद को एक "एक्स्ट्रा-कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी" मानते हैं.
अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस खुद को नियम-कानून से ऊपर समझते हैं.
उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर संविधान को कुचलने का भी आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने खुद धांधली करके चुनाव जीता हो, वही आज चुनावों में धांधली की बात कर रहे हैं."
इंडिया ब्लॉक के मार्च में शामिल हुए शशि थरूर, क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस सांसद शशि थरूर (फ़ाइल फ़ोटो)
इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च में कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी शामिल हुए.
उन्होंने मार्च के दौरान न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, "संविधान की रक्षा किसी भी राजनीति से ऊपर है. नागरिकों के वोट देने के अधिकार को उनसे छीन लिया गया है. 13 करोड़ लोग अपने वोट देने का अधिकार खो चुके हैं."
सोमवार को विपक्षी दलों के सांसदों और नेताओं ने सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ "मार्च फॉर डेमोक्रेसी" की शुरुआत की. यह मार्च बाराखंबा मेट्रो स्टेशन से सुप्रीम कोर्ट तक निकाला जा रहा है.
विपक्षी दलों का कहना है कि वे अपने कथित "वोट चोरी" के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका सौंपेंगे.
मार्च में राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के कई वरिष्ठ नेता, सांसद और विभिन्न दलों के कार्यकर्ता शामिल हैं.
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं, जबकि इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से पहले भी आरोपों को खारिज किया जाता रहा है.
इंडिया गठबंधन के मार्च में भारी संख्या में पहुंचे लोग, देखें तस्वीरें
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इमेज कैप्शन, सोमवार को इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन में जुटे लोग
विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने सोमवार को बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की.
सोमवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत अखिलेश यादव, नेहा बोरा और दूसरे विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए.
इंडिया गठबंधन के मार्च के दौरान सोशल मीडिया में जारी वीडियो और तस्वीरों में भारी भीड़ देखी जा सकती है. बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने भी पुष्टि की है कि इस मार्च में शामिल होने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं.
देखें तस्वीरें-
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इमेज कैप्शन, आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा सीईसी ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन में शामिल हुईं
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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करते लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी
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इमेज कैप्शन, बैटमैन मास्क पहनने में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मदद करते राहुल गांधी
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इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल हुए अखिलेश यादव, क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, अखिलेश यादव ने कहा, "हम लोकतंत्र के लिए अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे. यह लड़ाई जारी रहेगी"
इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च में सोमवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी शमिल हुए.
इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "आंदोलन और धरना-प्रदर्शन जारी रहेंगे. लोकतंत्र को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है. भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है. वे हमेशा सत्ता में बने रहना चाहते हैं."
उन्होंने आरोप लगाया, "फर्जी मतदाता सूचियां बनाई जाती हैं, फर्जी वोट डाले जाते हैं और चुनावी नतीजों में गड़बड़ी की जाती है. हम कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे."
उन्होंने कहा, "सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए और चुनाव आयोग को हटाना चाहिए. भाजपा को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए."
अखिलेश यादव ने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन की जगह बदल देने से समस्या का समाधान नहीं होगा.
धरना स्थल बदलने के सवाल पर उन्होंने कहा, "अगर सरकार लोकतंत्र को मज़बूत करना चाहती है तो उसे विरोध प्रदर्शनों के लिए और जगहें उपलब्ध करानी चाहिए. प्रदर्शन स्थल बदल देने से सरकार की कथित गलतियां छिप नहीं सकतीं."
उन्होंने कहा, "हम लोकतंत्र के लिए अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे. यह लड़ाई जारी रहेगी."
विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट से बाराखंबा तक मार्च निकालते वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी
वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोमवार को राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन से पहले सुप्रीम कोर्ट से बाराखंबा तक वकीलों के साथ मार्च निकाला.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "चलो दिल्ली, लोकतंत्र के लिए सुप्रीम कोर्ट से बाराखंबा तक मार्च में."
इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "आप देख रहे होंगे कि हम सिर्फ़ एक शांतिपूर्ण मार्च निकालना चाहते हैं, लेकिन इस पर पाबंदियां लगा दी गई हैं. हाल ही में मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं, जिससे आम लोग प्रभावित हुए."
"यह पहले से ही लगाया गया एक व्यापक प्रतिबंध था. अगर कोई तोड़फोड़ हुई होती तो हम समझ सकते थे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया है. दरअसल, आप डरे हुए हैं. संविधान हमें विरोध करने का अधिकार देता है."
सोमवार को विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बाराखंबा मेट्रो स्टेशन से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है.
इस मार्च में शामिल होने के लिए विपक्षी दलों के कई नेता बाराखंबा मेट्रो स्टेशन पहुंच चुके हैं.
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को क्या जवाब दिया
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इमेज कैप्शन, सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने पत्र लिखकर कहा कि किसी लंबित मामले पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना संविधान में तय शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के ख़िलाफ़ होगा
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने 11 अक्तूबर को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखा है.
पत्र में कहा गया है कि किसी लंबित मामले पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना संविधान में तय शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के ख़िलाफ़ होगा.
रविवार को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (सीजेआई) से मिलने का वक्त मांगा था. हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था.
कांग्रेस ने जस्टिस सूर्यकांत के जवाब को एक्स पर पोस्ट किया है.
पत्र के मुताबिक,सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के लिए ऐसा कदम न्यायिक मर्यादा और स्थापित परंपराओं के अनुरूप नहीं है. सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट को उन मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, जिनका जिक्र विपक्षी नेताओं के पत्र में किया गया है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा जैसी शक्तियों के तहत सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने और फ़ैसला देने के लिए बाध्य है.
सूर्यकांत ने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और नागरिक क़ानूनी प्रक्रिया के तहत कभी भी अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं.
उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लें और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करें.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि क़ानून के अनुसार ऐसी किसी भी याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी.
इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में कैसा है माहौल: देखें तस्वीरें
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इमेज कैप्शन, नई दिल्ली में सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के पास तैनात सुरक्षाकर्मी
सोमवार को इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का अह्वान किया है.
विपक्ष के इस अह्वान के बाद दिल्ली में प्रदर्शनकारी जुटने लगे हैं.
इससे पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (सीजेआई) से मिलने का वक्त मांगा था. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था.
इस बीच दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया गया है.
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दिल्ली पुलिस ने कहा- जंतर मंतर पर नहीं कर सकेंगे प्रोटेस्ट, ये तीन नई जगहें की तय
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इमेज कैप्शन, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर यह फ़ैसला लिया गया है
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया गया है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर यह फ़ैसला लिया गया है.
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से सोमवार को जारी नोटिस में कहा गया है कि अब इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को निर्धारित किया गया है.
नोटिस के मुताबिक़, "गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति को नागरिकों के विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के अधिकार को ध्यान में रखते हुए मौजूदा निर्धारित स्थलों के विकल्पों की समीक्षा करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी."
नोटिस में कहा गया है कि इन तीनों स्थलों पर विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए एसओपी अलग से जारी की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमने फ़ॉर्म-6 को न तो मंज़ूरी दी है और न ही ख़ारिज किया
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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ़ॉर्म-6 की वैधता पर अभी तक कोई न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया है (फ़ाइल फ़ोटो)
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े नए फ़ॉर्म-6 को न तो मंज़ूरी दी है और न ही ख़ारिज किया है.
लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि इस फ़ॉर्म की वैधता पर अभी तक कोई न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया है.
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह टिप्पणी निर्वाचन आयोग से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील नरेंद्र मिश्रा ने कहा, “5 अक्तूबर को इस कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि फ़ॉर्म-6 को मंज़ूरी नहीं दी गई है. लेकिन निर्वाचन आयोग ने कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट ने मंज़ूरी दी है.”
इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, “नए फ़ॉर्म-6 पर कोई न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है.”
इसके बाद चीफ़ जस्टिस ने वकीलों को टोकते हुए कहा, “कृपया इस तरह ख़बर बनाने के लिए शब्दों को चुनकर पेश न करें.”
जस्टिस बागची ने मामले पर आगे स्पष्ट किया कि चीफ़ जस्टिस की टिप्पणी का आशय केवल इतना था कि मई 2026 में बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले में जब फ़ैसला सुनाया गया था, तब नया फ़ॉर्म-6 अस्तित्व में नहीं था.
उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी का अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने नए फ़ॉर्म-6 को मंज़ूरी दी है या ख़ारिज किया है. कोर्ट इस मुद्दे की जांच करेगा.
पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करने पर सहमति जताई और मामले को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दायर संबंधित याचिकाओं के साथ 27 अक्तूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया.
राहुल गांधी ने कहा- हम ज्ञानेश कुमार को छोड़ेंगे नहीं, बस इंतज़ार कर रहे हैं
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि वो देश को दिखाना चाहते हैं कि पीएम मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचा रहे हैं
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा है उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के भ्रष्टाचार के बारे में पता है.
राहुल गांधी ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "हम वही सवाल उठा रहे हैं जो दो चुनाव आयुक्तों ने पूछा था. ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे रहे हैं? ज्ञानेश कुमार जी हम जानते हैं कि आपकी क्या हालत है, आपको नींद नहीं आती. हम आपको छोड़ेंगे नहीं, आप बचेंगे नहीं. हमें आपके अतीत और आपके भ्रष्टाचार के बारे में पता है, हम बस इंतज़ार कर रहे हैं."
उन्होंने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनकारियों पर हो रही पुलिस कार्रवाई को लेकर कहा कि सरकार बहुत बड़ी ग़लती कर रही है.
राहुल गांधी ने कहा, "दिल्ली में कई दिनों से वोटों की चोरी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन चल रहा है, सवाल यह है कि दिल्ली को जेल में क्यों बदल दिया गया है? लोगों को शहर में आने से रोका जा रहा है, ट्रेनों और बसों में रोका जा रहा है."
उन्होंने कहा, "सरकार बहुत बड़ी ग़लती कर रही है, क्योंकि हम देश को दिखाना चाहते हैं कि मोदी जी ज्ञानेश कुमार को बचा रहे हैं. उन्हें जितनी ज़्यादा सुरक्षा मिलेगी, हम आख़िरकार उनके कंट्रोलर तक उतनी ही आसानी से पहुंच पाएंगे. हमें ऐसी ख़बरें मिल रही हैं कि पुलिसकर्मी परेशान हैं क्योंकि उन्हें युवाओं की पिटाई करने का आदेश दिया जा रहा है, जबकि आरएसएस सदस्यों को खुली छूट देने के निर्देश दिए जा रहे हैं."
गौरतलब है कि राहुल गांधी सोमवार को विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस बाराखंबा जंक्शन से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने वाले हैं.
इससे पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (सीजेआई) से मिलने का वक्त मांगा था. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था.
सीजेआई ने कहा- हर वकील को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार
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इमेज कैप्शन, सीजेआई से पुलिस को संयम बरतने का निर्देश देने की मांग की गई (फ़ाइल फ़ोटो)
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि हर वकील को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार है.
उन्होंने यह टिप्पणी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान वकीलों को हिरासत में लिए जाने और पुलिस की कथित ज्यादतियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की.
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वकीलों के ख़िलाफ़ पुलिस ने कार्रवाई की. साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी कोई आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.
लाइव लॉ के मुताबिक़, शंकरनारायणन ने पीठ से पुलिस को संयम बरतने का निर्देश देने की मांग की.
उन्होंने कहा, "वरिष्ठ वकीलों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है, वकील फरासत को सड़कों पर घसीटा गया. यह बहुत ग़लत और शर्मनाक था. ऐसा नहीं होना चाहिए था. आपने हमसे संयम बरतने के लिए कहा. मुझे उम्मीद है कि एक बार आप पुलिस से भी यही कहेंगे. अब तक इस पीठ की ओर से ऐसा नहीं कहा गया है. मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा. क्योंकि पुलिस जिस तरह की ज्यादतियों को होने दे रही है... गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं और बच्चों पर हमला कर रहे हैं."
शंकरनारायणन ने अदालत से इस मामले को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के ख़िलाफ़ प्रदर्शन से जुड़े अन्य मामले के साथ मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया.
वरिष्ठ अधिवक्ता ने आगे आरोप लगाया कि कुछ निजी तत्व प्रदर्शनकारियों पर हमले कर रहे हैं और पुलिस उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई नहीं कर रही है.
इस पर सीजेआई ने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई.