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मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली ‘स्ट्रेटेजिक, पॉलिटिकल एंड डिफ़ेंस कमेटी’ की बैठक सोमवार को इस्तांबुल में हुई.
दीपक मंडल, रौनक भैड़ा
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मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली ‘स्ट्रेटेजिक, पॉलिटिकल एंड डिफ़ेंस कमेटी’ की बैठक सोमवार को इस्तांबुल में हुई.
इस बैठक में तीनों सदस्य देशों पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों देशों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता हासिल करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया.
संयुक्त बयान में कहा गया है, "तीनों देशों ने मक्का समझौते के तहत सहयोग को और संस्थागत बनाने के लिए एक सचिवालय स्थापित करने पर सहमति जताई है. यह सचिवालय सऊदी अरब में स्थापित किया जाएगा और इसका नेतृत्व एक महासचिव करेगा."
"सचिवालय के शुरुआती महासचिव के तौर पर पाकिस्तान के एक प्रतिनिधि को नियुक्त किया जाएगा. वह तीन साल की अवधि के लिए इस ज़िम्मेदारी को संभालेंगे."

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तीनों देशों ने अपनी रक्षा क्षमताओं और सशस्त्र बलों के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया. इसके लिए रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग, तकनीकी विकास और रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही गई है.
गौरतलब है कि मक्का समझौता 7 अगस्त, 2026 को हुआ था. इस समझौते के तहत यदि तीनों (पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की) में से किसी भी देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी एआई-जेनरेटेड वीडियो के ज़रिए से एक दूसरे पर राजनीतिक हमला करते नज़र आ रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ में अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान एक एआई जेनरेटेड म्यूज़िक वीडियो जारी किया है, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा गया है.
वीडियो में अयोध्या के राम मंदिर में चंदे में गड़बड़ी, महंगाई, बेरोज़गारी, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाए गए हैं. इसमें योगी आदित्यनाथ को एआई की मदद से दान के पैसे गिनते और चिलम पीते हुए दिखाया गया है.
बीजेपी ने इस वीडियो पर आपत्ति जताई
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी पर एआई वीडियो के ज़रिए बीजेपी की छवि ख़राब करने और झूठ फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी लगातार ऐसे वीडियो बना रही है, लेकिन इससे बीजेपी की छवि पर असर नहीं पड़ेगा."
दरअसल, ये पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब 'याद रखेगा यूपी' नाम के एक सोशल मीडिया पेज से कुछ दिनों पहले अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए एक एआई जेनरेटेड म्यूज़िक वीडियो जारी किया गया था. समाजवादी पार्टी का दावा है कि इसके पीछे बीजेपी आईटी सेल का हाथ है.
'यूपी बदनाम हुआ टीपू के मारे' नाम के इस वीडियो में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते प्रदेश में उनके कार्यकाल पर निशाना साधा गया था.
अखिलेश यादव ने आज अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान पहले अपने वीडियो को चलाया और फिर इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ और बीजेपी सरकार को निशाना बनाने वाला नया एआई वीडियो जारी किया.
समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने भी इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया है. पार्टी ने इसे बीजेपी के एआई वीडियो का जवाब बताते हुए कहा कि बीजेपी अगर सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रचार के लिए एआई का इस्तेमाल करेगी, तो समाजवादी पार्टी भी उसके कार्यकाल के मुद्दों को सामने रखेगी.
बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच शुरू हुई इस 'एआई वीडियो वार' को 2027 के विधानसभा चुनाव की शुरुआती डिजिटल लड़ाई के तौर पर भी देखा जा रहा है.

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नेपाल में आई बाढ़ के बीच उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से होकर गुज़रने वाली गंडक (नारायणी) नदी से अज्ञात शवों के मिलने का सिलसिला जारी है.
कुशीनगर प्रशासन के मुताबिक़, अब तक नदी से 13 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें छह पुरुष और सात महिलाओं के शव शामिल हैं.
इनमें से छह शवों को कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी हाउस में रखा गया है. वहीं सीमित जगह होने के कारण सात शवों को गोरखपुर एम्स भेजा दिया गया है.
प्रशासन के मुताबिक़, आगे भी शव मिलने की आशंका के बीच नारायणी नदी में एसडीआरएफ़ और एनडीआरएफ़ की टीमें लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं.
कुशीनगर की प्रभारी जिलाधिकारी और सीडीओ वंदिता श्रीवास्तव ने यहां के स्थानीय पत्रकार गुड्डू निषाद को बताया, ''शवों के संबंध में निर्धारित नियमों के तहत सभी ज़रूरी कार्रवाई की जा रही है. ज़िला प्रशासन नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है और विदेश मंत्रालय के माध्यम से भी नेपाल को बरामद शवों की जानकारी दी जा रही है.''
प्रशासन के मुताबिक़, पोस्टमार्टम और अन्य ज़रूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद शव नेपाल को सौंपे जाएंगे, ताकि उनकी शिनाख्त हो सके और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सके.
प्रशासन ने नेपाल से आने वाले लोगों की मदद के लिए एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है.

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक पटाख़ा फ़ैक्ट्री में सोमवार को हुए विस्फ़ोट में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच घायल हैं. घायलों का इलाज प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में चल रहा है.
कौशांबी के डीएम अमित पाल शर्मा ने बताया है कि हादसे के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई थीं. उनके मुताबिक़ रेस्क्यू ऑपरेशन अब लगभग पूरा हो चुका है.
पटाख़ा फ़ैक्ट्री में ये विस्फ़ोट प्रयागराज-कौशांबी सीमा के पास मोहम्मदपुर गांव में दोपहर क़रीब साढ़े 12 बजे हुआ.
धमाके की वजह से पूरी पटाख़ा फ़ैक्ट्री ढह गई, जबकि आसपास के क़रीब 100 मीटर के दायरे में कई मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.
कौशांबी के डीएम के मुताबिक़, "हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है. इसमें संपत्ति ज़ब्त करने जैसी कार्रवाई भी शामिल है."
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सोमवार को द्विपक्षीय मुलाक़ात हुई.
यह मीटिंग किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर हुई है.
इस दौरान पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि वे यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को ख़त्म करने के पक्ष में हैं, क्योंकि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे धकेल रहा है.
पीएम मोदी ने कहा, "यूक्रेन के विषय पर हम हमेशा चर्चा करते रहे हैं. हमेशा यूक्रेन की स्थिति पर चर्चा की है. जब हम पिछली बार मिले थे, तब भी आपने मुझे सभी विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी. जैसा कि आप जानते हैं, भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी समर्थन करता रहेगा."
"युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की ओर बढ़ाया गया हर क़दम मानवता में नई उम्मीद और आशा भरता है. हमें 'एंडलेस वॉर' से 'एंड ऑफ़ वॉर' की दिशा में जाना चाहिए. यह मानवता की भलाई के लिए ज़रूरी है."
पीएम मोदी ने पुतिन की पिछले भारत दौरे को याद करते हुए उसे एक 'सफल यात्रा' बताया.
मोदी ने कहा, "पिछले साल आपकी भारत यात्रा बहुत सफल और सचमुच यादगार रही. हमारे लिए यह बहुत संतोष की बात है कि हमारा सहयोग नई ऊंचाइयां छू रहा है और हम दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखना हमारा साझा दृष्टिकोण रहा है और भविष्य में भी यही हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत बना रहेगा."
उन्होंने कहा, "कुछ दिनों बाद भारत ब्रिक्स समिट का आयोजन करेगा. सभी भारतीय आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का भारत में स्वागत करने के लिए बहुत उत्साहित हैं. आपकी यात्रा से हमारे द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत होंगे और ब्रिक्स के भीतर बातचीत और सहयोग भी बढ़ेगा."
राष्ट्रपति पुतिन की बातों का अनुवाद करते हुए एक अनुवादक ने कहा, "मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि रूस और भारत के संबंध एक ख़ास और विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी के सिद्धांतों के आधार पर लगातार मज़बूत हो रहे हैं. प्रधानमंत्री जी, रूस-भारत संबंधों पर आपके विशेष ध्यान और हमारे बीच बने व्यावसायिक और दोस्ताना संबंधों से इसमें मदद मिली है. इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं."

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'एक विफल राष्ट्र' बताते हुए दावा किया कि उसकी देश की नौसेना और वायुसेना ख़त्म हो चुकी हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया ईरान के पास मुद्रा नहीं है, वे अपने सैनिकों को पैसे नहीं दे रहे हैं.
ट्रंप ने लिखा, "ईरान आधिकारिक तौर पर एक असफल राष्ट्र है. यह मर चुका है! उनके पास कोई नौसेना नहीं है, कोई वायु सेना नहीं है, उनके पास कोई मुद्रा नहीं है, वे अपने सैनिकों या पुलिस को पैसे नहीं दे रहे हैं, महंगाई 300 फ़ीसदी है. उनका नेतृत्व पूरी तरह बिखरा हुआ है और देश का सही तरीक़े से प्रतिनिधित्व करने में सक्षम नहीं है."
उन्होंने लिखा, "उनके पास सिर्फ़ अमेरिका की फ़ेक न्यूज़ है, अपने प्रदर्शनकारियों को मारने की इच्छा है (अब एक लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. मानवता के ख़िलाफ़ युद्ध अपराधों के लिए उन पर मुक़दमा चलाया जाना चाहिए)."
गौरतलब है कि अमेरिका ने हाल ही में ईरान के लाराक द्वीप पर दो ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. जुलाई के बाद ईरान पर अमेरिका का यह पहला ज्ञात हमला है.

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मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले के एक गांव में संदिग्ध उग्रवादियों की गोलीबारी में तीन ग्रामीणों की मौत हो गई है जबकि इस हमले में चार लोग घायल बताए गए हैं. मरने वाले लोगों में दो महिलाएं शामिल हैं.
गोलीबारी की इस घटना की पुष्टि करते हुए कांगपोकपी के पुलिस अधीक्षक राहुल गुप्ता ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "गोलीबारी की एक घटना आज सुबह हुई है. इसमें तीन लोगों की जान गई है. पुलिस हमलावरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है."
इस हमले की जानकारी देते हुए एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गोलीबारी की यह घटना सोमवार सुबह क़रीब 8 बजे की है. यह हमला टी वाइचोंग सब-डिविज़न के तहत आने वाले कुकी-बहुल तेखांग गांव में हुआ है. आधुनिक हथियारों से लैस कुछ संदिग्ध उग्रवादियों ने गांव पर अंधाधुंध गोलीबारी की और इसके बाद कई घरों में आग भी लगा दी.
इस हमले को लेकर ट्विलांग एरिया कुकी नागरिक संगठन की वर्किंग कमिटी ने आरोप लगाया कि नगा चरमपंथियों ने जान-बूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया है.
ट्विलांग एरिया कुकी संगठन ने एक लिखित बयान जारी कर बताया, "हमलावरों ने ग्रामीणों पर अंधाधुंध गोलीबारी की और बाद में घरों में आग लगा दी. इस आगज़नी में गांव के दो घर पूरी तरह जलकर ख़ाक हो गए."
इसके साथ ही कुकी संगठन ने प्रशासन से इलाक़े में तुरंत पर्याप्त संख्या में सुरक्षा जवानों को तैनात करने और घायलों को अस्पताल ले जाते समय सुरक्षित रास्ता देने की अपील की है. दरअसल मई 2023 से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हुई हिंसा के कारण कुकी लोग न मैतेई बहुल इलाक़े में जाते हैं और न ही मैतेई लोग कुकी बहुल इलाक़ों में प्रवेश करते हैं. वहीं प्रदेश के ज़्यादातर अच्छे अस्पताल इंफ़ाल में हैं.
इस हमले में मारे गए तीनों लोगों की पहचान टिंगनेइचिन (40), होइनेइंग ल्हूजेम (21) और 36 वर्षीय लामतिनथांग ल्हूजेम के तौर पर की गई है. इस साल फ़रवरी से मणिपुर में बसे नगा और कुकी जनजाति के बीच जारी हिंसा में अब तक 30 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है.
तीन दिन पहले कांगपोकपी में संदिग्ध उग्रवादियों ने एक गाड़ी पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें चार नगा लोग मारे गए थे और एक घायल हुआ था. दोनों समुदायों के हथियारबंद गुटों के बीच आए दिन गोलीबारी होती रहती है.
हिंसा होने की आशंका वाले इलाक़ों में सुरक्षा बलों की तैनाती पहले से है लेकिन फिर भी आए दिन निर्दोष लोगों की जान जा रही है.

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भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.
भारत सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक़, एक साल पहले इसी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 फ़ीसदी रही थी.
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि रियल जीडीपी 7.8% की दर से बढ़कर 81.36 लाख करोड़ रुपये रही है. जबकि एक साल पहले यह 75.46 रुपये लाख करोड़ थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के लिए बड़ी कामयाबी बताया है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट शेयर कर लिखा, "वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 फ़ीसदी की शानदार जीडीपी वृद्धि एक बड़ी उपलब्धि है."
"हमारे लोगों की सामूहिक ताक़त ने यह सुनिश्चित किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन की समस्याओं के बावजूद भारत ने इतनी वृद्धि दर्ज की. भारत के बारे में निराशाजनक बातें करने वालों की बातें गलत साबित हुईं और भारत एक बार फिर आगे बढ़ा..."


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उत्तराखंड के कोटद्वार में एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आने के बाद चर्चा में आए जिम ट्रेनर दीपक कुमार कश्यप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दीपक कुमार कश्यप और उनके दोस्त विजय रावत के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर की कार्यवाही पर रोक लगा दी है.
अदालत ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगाई है, जिसमें दोनों को मामले से संबंधित किसी भी तरह की टिप्पणी सोशल मीडिया पर करने या लिखने से रोक दिया गया था.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को मामले में अंतरिम आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला इस साल 26 जनवरी का है. आरोप है कि बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता कोटद्वार में एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार पर उनकी दुकान के बोर्ड से 'बाबा' शब्द हटाने का दबाव बना रहे थे.
इसी दौरान दीपक कुमार कश्यप और विजय रावत ने बीच-बचाव करते हुए इसका विरोध किया था.
जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दीपक से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने ख़ुद को "मोहम्मद दीपक" बताया था.
इसके बाद कोटद्वार के एक निवासी की शिकायत पर पुलिस ने दीपक और विजय रावत के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की दंगा करने और शांति भंग करने जैसी धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज की थी.
हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दी थी याचिका
एफ़आईआर रद्द कराने के लिए दीपक कुमार कश्यप ने उत्तराखंड हाई कोर्ट का रुख़ किया था.
हालांकि, हाई कोर्ट ने मार्च में उनकी याचिका ख़ारिज कर दी थी. अदालत ने अपने आदेश में सोशल मीडिया पर मामले से संबंधित संदेश या वीडियो साझा करने को लेकर भी रोक लगाई थी.
हाई कोर्ट ने कहा था, "अगर कोई सोशल मीडिया पर संदेश और वीडियो भेजता है, तो इससे निश्चित रूप से निष्पक्ष जांच प्रभावित होगी. अदालत ऐसी किसी गतिविधि की अनुमति नहीं दे सकती."
सुप्रीम कोर्ट ने अब इस आदेश पर रोक लगाते हुए मामले में उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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केंद्र सरकार स्टूडेंट प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाख़िल करेगी.
लाइव लॉ के अनुसार, सरकार ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया है.
सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया तुषार मेहता ने सोमवार को इस मामले को मौखिक रूप से सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने रखा.
तुषार मेहता ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए इसे मंगलवार को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिसे सीजेआई ने मंज़ूर कर लिया.
सीजेपी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर 'ओके' लिखा, जबकि इसके फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने अपनी एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वो आंबेडकर की फ़ोटो दिखा रहे हैं.
दरअसल, केंद्र सरकार का यह क़दम दिल्ली में 5 सितंबर के लिए प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले सामने आया है.
गौरतलब है कि सीजेपी ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने जुलाई में पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर में हुए स्टूडेंट प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को वापस लेने के अपने वादे को पूरा नहीं किया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति डॉ मसूद पेज़ेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बैठक की.
भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में पीएम मोदी और पेज़ेश्कियान के बीच हुई बातचीत की जानकारी दी गई है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों पर चर्चा की, उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के हालिया घटनाक्रमों पर भी बात की और बदलती स्थिति को लेकर अपने विचार साझा किए.
जारी बयान के अनुसार, "पीएम मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और भारत के इस लगातार रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए."
"प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की ज़रूरत को भी दोहराया. जहाज़ों की आवाजाही और व्यापार की फ़्रीडम को सुरक्षित रखने की बात कहते हुए ज़ोर दिया कि किसी भी स्थिति में आम लोगों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. इसमें व्यापारिक जहाज़ और उन पर काम करने वाले नाविक भी शामिल हैं."
विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं.

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पीएम मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट लिखकर इस मुलाक़ात की जानकारी दी.
उन्होंने लिखा, "बिश्केक में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से मुलाक़ात की. अलग-अलग क्षेत्रों में भारत और ईरान की लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को और मज़बूत करने की हमारी प्रतिबद्धता दोहराई. हम आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ाना चाहते हैं."
उन्होंने लिखा, "हमने क्षेत्र में मौजूदा स्थिति पर चर्चा की. भारत स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा."
गौरतलब है कि पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर यह मुलाक़ात की है.

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तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद चीन ने दावा किया है कि आपदा से जुड़ी जानकारी पारदर्शिता के साथ साझा की जा रही है.
चीन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बाढ़ से जुड़े एक वीडियो की सेंसरशिप को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
बीबीसी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि चीन में उस फुटेज को सेंसर किया जा रहा है, जिसमें ग्यिरोंग पोर्ट से पानी का तेज़ बहाव गुज़रता हुआ दिखाई दे रहा है.
सोमवार को एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से सेंसरशिप को लेकर सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किए गए हैं और उन्हें व्यवस्थित तरीक़े से आगे बढ़ाया जा रहा है.
गुओ जियाकुन ने कहा, "आपदा का इस्तेमाल करके चीन को जानबूझकर बदनाम करने या स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिशों को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा."
वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने 30 अगस्त 2026 को रात 9:30 बजे तक की स्थिति के आधार पर जारी अपडेट में बताया था कि क़रीब 500 भारतीय नागरिक अभी चीन की तरफ़ मौजूद हैं और सभी सुरक्षित हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध मार्च के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर तत्काल कोई आदेश देने से इनकार कर दिया.
हालांकि, कोर्ट ने सोमवार को याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है, लेकिन मामले को 5 सितंबर से पहले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया.
लाइव लॉ के अनुसार, चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले को 10 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया. इस मामले की सुनवाई स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ की जाएगी.
याचिकाकर्ता के वकील डॉ. रिज़ान अहमद ने मामले की सुनवाई 3 सितंबर को करने की अपील की थी. हालांकि, पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि क़ानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के अधिकार क्षेत्र का विषय है.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी चिंताओं को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के समक्ष उठाने को कहा.
इस मामले में दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी राजेंद्र सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाख़िल कर मांग की है कि राजधानी के संवेदनशील इलाक़ों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन या विरोध मार्च बिना आवश्यक अनुमति के आयोजित न किए जाएं.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश डॉ. अहमद ने कोर्ट को बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक़, प्रदर्शन के आयोजकों ने अब तक अनुमति के लिए कोई आवेदन नहीं दिया है.
उन्होंने यह भी दलील दी कि अगले सप्ताह दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मौजूदगी के बीच राजधानी में विरोध मार्च आयोजित किए जाने को लेकर चिंता है.
बार एंड बेंच के मुताबिक़ इस मामले पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “कम से कम अभी तो हम यही मानकर चलेंगे कि हर कोई बहुत ज़िम्मेदारी से और शांतिपूर्ण व क़ानूनी तरीक़े से काम करेगा और व्यवहार करेगा."
उन्होंने कहा, "हमारे पास शक करने की कोई वजह भी नहीं है. इसलिए अभी हमारे सामने ऐसी कोई मज़बूत वजह नहीं है जिससे यह माना जाए कि कुछ ग़लत होगा.”
गौरतलब है कि सीजेपी ने 5 सितंबर के लिए विरोध मार्च का एलान किया है. पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने जुलाई में पेपर लीक के विरोध में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने का वादा पूरा नहीं किया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बैठक की.
दोनों नेताओं की यह मुलाक़ात किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुई.
बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची भी मौजूद रहे.
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेश्क़ियान की मुलाक़ात से जुड़ा वीडियो और कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं.
फ़िलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि मुलाक़ात के दौरान क्या बातचीत हुई.

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ईरानी मीडिया ने बताया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए हैं.
ईरान के सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक़,पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची का बिश्केक में किर्गिस्तान के उप प्रधानमंत्री ने स्वागत किया.
ईरान के राष्ट्रपति शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ और शंघाई प्लस के राष्ट्राध्यक्षों के श़िखर सम्मेलन में भाग लेने और संबोधित करने के लिए किर्गिस्तान की यात्रा पर हैं. 21 देशों के नेताओं का किर्गिस्तान दौरा निर्धारित है.
अब तक, बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में चीन, रूस, कज़ाकिस्तान, भारत और ईरान के नेताओं की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है.
इस बैठक के दौरान, पेज़ेश्कियान के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की उम्मीद है.
समाचार एजेंसी आईआरएनए का कहना है कि पेज़ेश्कियान की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ यह छठी मुलाकात होगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल पर इथेनॉल की मात्रा की जानकारी अनिवार्य करने और लेबल लगाने की मांग वाली याचिका ख़ारिज कर दी.
क़ानूनी ख़बरों और विश्लेषण की वेबसाइट 'बार एंड बेंच' ने जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत लेकर संबंधित प्राधिकरण के पास जा सकता है.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "(याचिका) ख़ारिज की जाती है. याचिकाकर्ता संबंधित सक्षम प्राधिकरण के पास जाने के लिए स्वतंत्र है."
वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने यह याचिका दायर की थी. इसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि देश के हर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरने वाली हर नोजल पर इथेनॉल की सटीक मात्रा की जानकारी देने वाला अनिवार्य और एक समान लेबल लगाया जाए.
कोर्ट ने शुरुआत में याचिकाकर्ता के अधिकार-क्षेत्र पर सवाल उठाया और पूछा कि उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया, जबकि वह हाई कोर्ट जा सकते थे.
बेंच पूछा, "आप कौन हैं? आप कहां प्रैक्टिस करते हैं? हाई कोर्ट जाइए और वहां याचिका दाखिल कीजिए."
इस पर गोस्वामी ने कहा, "मुझे जानकारी पाने का अधिकार है. मैं यह जानना चाहता हूं. अगर मैं पेट्रोल खरीदता हूं तो वहां ई20 का कोई उल्लेख नहीं होता."
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने याचिका का विरोध किया.
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नोवाक जोकोविच अमेरिकी ओपन के पहले दौर में अर्जेंटीना के मारियानो नवोने से हार के बाद रो पड़े.
24 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके 39 साल के जोकोविच एक रोमांचक मैच के निर्णायक सेट में भावुक होकर रो पड़े.
पूरे मैच के दौरान उन्हें शारीरिक परेशानी से जूझना पड़ा और मैच के दौरान उन्होंने एक समय उल्टी भी की.
चौथी वरीयता प्राप्त जोकोविच ने अपना संघर्षपूर्ण जज़्बा दिखाया, लेकिन न्यूयॉर्क की उमस भरी गर्मी में उन्हें 7-6 (7-5), 5-7, 4-6, 6-2, 6-1 से हार का सामना करना पड़ा.
फ्लशिंग मीडोज़ में यह पहली बार था जब जोकोविच पहले ही दौर में हारकर बाहर हुए. किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के पहले दौर में उनकी यह हार 2006 के बाद पहली बार हुई है.
जोकोविच ने कहा, "मुझे लगता है कि यह साफ़ था कि कोर्ट पर मेरे लिए यह कितना खराब अनुभव था."
उन्होंने कहा, "मैं मारियानो की जीत का श्रेय कम नहीं करना चाहता. उसे बधाई, वह अच्छा इंसान है और एक लड़ाकू खिलाड़ी है. लेकिन मैंने इस मैच का बिल्कुल आनंद नहीं लिया."