'अली से मेरी 30 सालों तक ख़तो किताबत चली'

मोहम्मद अली और स्टेफ़नी मीड
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स्टेफ़नी मीड जब 10 साल की थीं तब उन्होंने बॉक्सर मोहम्मद अली को पहला ख़त लिखा था. इस बात को 30 साल गुज़र जाने के बाद भी दोनों के बीत ख़तो क़िताबत जारी रही.

वॉशिंगटन के सिएटल की स्टेफ़नी ने बीबीसी को बताया कि किस तरह इन ख़तों ने उनकी ज़िंदगी बदल दी.

दुनिया के लिए वो एक महान एथलीट और मानवाधिकार पर मुखरता से बोलने वाले व्यक्ति थे लेकिन मेरे लिए वो एक दोस्त जैसे थे.

मेरी ज़िंदगी पर उनका बहुत बड़ा असर रहा है. मैं जब दस साल की थी तब मैंने मोहम्मद अली को ख़त लिखा था.

सभी ने मुझे बताया कि जवाबी ख़त कभी नहीं आएगा लेकिन तीन सप्ताह बाद ही मेरे ख़त पहुंचने की तारीख़ के दिन लिखा हुआ एक ख़त मुझे मिला. ये हाथ से लिखा हुआ था.

स्टेफ़नी के ख़त

इसमें लिखा था, "प्यारी स्टेफ़नी, इतने प्यारे ख़त के लिए शुक्रिया. मैं उम्मीद करता हूं कि किसी दिन हम मिलेगें. मेरे सभी प्रशंसकों को बोलना कि मैंने उन्हें 'हेलो' कहा है. मेरी तरफ़ से तुम्हारी मां और पिता को शुभकामनाएं. अल्लाह हमेशा तुम्हें सलामत रखे और रास्ता दिखाए. मोहम्मद अली की ओर से प्यार."

मैं कोई सामान्य बच्ची नहीं थी. जब मैं चार साल की थी मेरे पिता विकलांग हो गए थे और इसलिए उस दरम्यान जब अधिकांश बच्चे बाहर खेल रहे होते, तो मैं उनके साथ बैठकर टीवी देख रही होती थी.

हम अली के मैच के वीडियो देखते.

छह साल की उम्र तक तो मैं आपको अली के हर उस मैच की एक-एक बात बता सकती थी, जिसमें उन्होंने हिस्सा लिया था.

जब मैं स्कूल गई तो मेरे दोस्त सुपरमैन के बारे में बातें करते थे, लेकिन मैं उन सबको बेवक़ूफ़ समझती थी क्योंकि मेरे पास अली थे.

वो मेरे अपने सुपरहीरो थे. मैंने उन्हें अपना रिपोर्ट कार्ड भेजा और अपना सबसे गोपनीय राज़ बताया.

बिना नाग़ा किए मोहम्मद अली ने हरेक ख़त का जवाब दिया और मैं हर महीने एक ख़त भेजने की आदी हो गई थी.

मोहम्मद अली के ख़त

मैं हमेशा उनसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर करती तो उनका जवाब होता, "मैं भी तुमसे मिलने की उम्मीद करता हूं. कृपया अपने मम्मी और डैडी को मेरी तरफ़ से हेलो बोलना. भगवान तुम्हे सलामत रखे."

ख़तो किताबत का ये सिलसिला सालों तक चलता रहा, जबतक कि पार्किंसन्स की बीमारी ने उन्हें लिखने के लायक़ भी न छोड़ा. लेकिन मैंने उन्हें कार्ड और ख़त भेजना जारी रखा.

साल 1992 में, जब मैं कॉलेज स्टूडेंट के रूप में संघर्ष कर रही थी, मैंने सुना कि पास के सिएटल में ही उन्हें सम्मानित किया जा रहा है और तब मुझे लगा कि उन्हें देखने का यही मौक़ा है.

मैं उस होटल के बाहर पहुंची जहां वो रुके हुए थे और मैंने वहां के कुछ सुरक्षाकर्मियों से बताया कि अली मुझे ख़त लिखते हैं और उनसे विनती की कि वो उन्हें ये ख़त दिखाएं.

मोहम्मद अली और स्टेफ़नी मीड

इसके बाद मुझे बस इतना याद है कि मुझे मोहम्मद अली के पास ले जाया जा रहा था. मोहम्मद अली ने माइक टायसन से मेरे लिए सीट ख़ाली करने को कहा. आख़िरकार मैं अपने हीरो से मिलने में कामयाब हो गई थी.

उनके बारे में जितना आप अच्छा सोच सकते हैं, वो सारी ख़ूबियां उनमें थीं. उस समय तक उनकी बोली थोड़ी सुस्त पड़ गई थी लेकिन बावजूद इसके यह बहुत असाधारण थी.

पता चला कि ख़त लिखने के अंतराल में वो अपना घर बदल चुके हैं, लेकिन उन्होंने एक काग़ज़ पर अपना नया पता लिखा और ख़त लिखते रहने को कहा.

मैं महीने में एक बार उन्हें एक कार्ड या ख़त भेजती तो उधर से उनकी ओर से टाइप किया हुआ, शायद उनकी पत्नी लोनी उसमें मदद करती थीं, मुझे ख़त मिलता.

मोहम्मद अली और स्टेफ़नी मीड

2014 में उन्होंने मुझे पूरे परिवार के साथ अपने घर आमंत्रित किया. मेरे लिए यह बहुत ख़ास था क्योंकि मेरे विकलांग पिता भी अपने हीरो से आख़िरकार मिल सके.

मैं उन्हें बता रही थी कि मैं उन्हें कितना प्यार करती थी. और बोलने में अक्षम होने के बावजूद उनकी आंखें जीवंत थीं और उन्होंने मेरा हाथ दबाया और गले लगा लिया.

जी, मोहम्मद अली ने मुझे पलटकर प्यार किया. मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती कि मैंने कैसा महसूस किया.

लोनी ने मुझे बराबर ख़त लिखते रहने को कहा और बताया कि वो अली को ख़त पढ़कर सुनाएंगी. उन्होंने कहा कि ये ख़त अली को ख़ुश कर देते हैं.

मोहम्मद अली

दुनिया ने एक महान एथलीट, एक चैंपियन और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को खो दिया. मैंने अपने सबसे बेहतरीन दोस्त को खो दिया.

जो उन्होंने कहा था, वो बिल्कुल सच है, वो हर समय के महान व्यक्ति थे. स्टेफ़नी अली के अंतिम संस्कार में शामिल होने सिएटल से लुईविले जाएंगी.

(हान्ना हेंडर्सन और एंद्री मसीहा, बीबीसी यूजीसी हब एंड सोशल न्यूज़ टीम)

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