कौन सा शहर बन गया है यूरोप का डार्लिंग?

वार्सा
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चलिए आज आपको यूरोप के सबसे तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहे शहर की कहानी सुनाते हैं. इस शहर का नाम है वारसा. ये मध्य यूरोपीय देश पोलैंड की राजधानी है.

ऐसे वक़्त में जब पूरा यूरोप, आर्थिक मंदी की चपेट में है, पोलैंड ज़बरदस्त तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहा है. इसमें राजधानी वारसा का बड़ा योगदान है.

शीत युद्ध के दौर में पोलैंड, सोवियत ब्लॉक का हिस्सा हुआ करता था. मगर, बर्लिन की दीवार गिरने के बाद पोलैंड ने तय किया कि वो अमरीका और पश्चिमी यूरोप के साथ जाएगा.

पिछले तीस सालों में पोलैंड का रंग रूप ही बदल गया है. यहां के लोगों की आमदनी दोगुनी हो चुकी है. 2004 में पोलैंड ने यूरोपीय यूनियन की सदस्यता भी ले ली थी.

तब से इसने तरक़्क़ी की ऐसी रफ़्तार पकड़ी कि पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज पोलैंड में कारोबार शुरू करना बेहद आसान है. आगे चलकर इसके यूरोप की आर्थिक तरक़्क़ी का अगुवा बनने की पूरी उम्मीद है.

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पोलैंड के इस चमत्कारी बदलाव का केंद्र है राजधानी वारसा शहर. वारसा को फ़ीनिक्स सिटी या कभी न ख़त्म होने वाला शहर कहते हैं.

पूर्वी और पश्चिमी यूरोप के बीच में पड़ने वाला ये शहर, कई बार उजड़ा और बसा. आख़िरी बार इस शहर ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तबाही देखी थी.

उसके बाद इस शहर के पुराने हिस्से को बड़ी मेहनत से उसके पुराने रंग रूप में लौटाया गया. साथ ही उस दौर की वामपंथी सरकार ने, आम लोगों के रहने के लिए छोटे मकानों वाले हाउसिंग प्रोजेक्ट चलाए.

इससे ये शहर आज भी दो हिस्सों में बंटा नज़र आता है. एक हिस्सा पूर्वी यूरोप की नुमाइंदगी करता है तो दूसरा पश्चिमी यूरोप के वैभव की.

आज यहां पर गूगल और फ़ेसबुक जैसी कंपनियों के दफ़्तर हैं. जर्मनी की ऑनलाइन फर्नीचर कंपनी हेम ने जब कारोबार शुरू किया तो अपने कारखाने पोलैंड में लगाने का फ़ैसला किया.

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हेम के मालिक फीगम योहानसन कहते हैं कि वारसा का माहौल कारोबार के लिए बहुत अच्छा है. यहां के लोग मेहनती हैं. मज़दूरी भी कम है. यहां से सामान की ढुलाई भी आसान है.

वैसे, खाने और संस्कृति की बात करें तो पोलैंड का दूसरा बड़ा शहर क्राको इस देश की बेहतर नुमाइंदगी करता है. मगर, आर्थिक तरक़्क़ी के इस दौर में वारसा ने क्राको को पीछे छोड़ दिया है.

कारोबार के साथ ही शहर की शक्लो-सूरत भी बदल रही है. नई दुकानें, शॉपिंग मॉल, रेस्तरां और होटल खुल रहे हैं. इस वजह से यहां सैलानियों की आमदो-रफ़्त भी बढ़ रही है.

वारसा के रहने वालों को वर्सोवाइट कहा जाता है. यहां के लोग आम तौर पर विनम्र हैं. लेकिन, मौक़ा पड़ने पर यहां के लोग बिंदास अपनी राय ज़ाहिर करते हैं. फिर चाहे मामला राजनीति का हो या फिर धर्म का.

यूं तो पोलैंड का समाज रूढ़िवादी माना जाता है. मगर, कई बार तो लोग दर्द के बारे में भी खुलकर बात करते हैं.

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वारसा के लोग कहते हैं कि यहां के शहरियों का पसंदीदा काम है शिकायत करना. बल्कि ये कहा जाए कि शिकायत करना पूरे पोलैंड का राष्ट्रीय खेल है तो ग़लत नहीं होगा.

पोलैंड साल 2007 से ही शेनजेन इलाक़े का हिस्सा है. इसका मतलब है कि अमरीका, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन के देशों के नागरिकों को यहां आने के लिए वीज़ा की ज़रूरत नहीं.

इसी वजह से वारसा में हर साल ख़ूब सैलानी आते हैं. यहां का शोपिन हवाई अड्डा पूरे साल व्यस्त रहता है. मशहूर पोलिश संगीतकार फ्रेडरिक शोपिन के नाम पर इसका नाम रखा गया है. ये वारसा शहर से आधे घंटे की दूरी पर है.

टैक्सियां आम तौर पर एयरपोर्ट से शहर लाने के लिए बारह से पंद्रह डालर किराया वसूलती है.

वारसा का सबसे मशहूर होटल है 'एच15'. इसकी इमारत उन्नीसवीं सदी में बनी थी. उसके बाद ये कई बार तोड़ी और बनाई गई. पिछली सदी की शुरुआत में सोवियत संघ ने यहां अपना दूतावास बनाया था.

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब जर्मनी ने यहां हमला किया तो इस होटल की इमारत को छोड़कर पूरा शहर नेस्तनाबूद कर दिया था.

साल 2013 में ये होटल क़रीब सात साल की मरम्मत के बाद खोला गया. इस बार इसको ऐतिहासिक लुक देने की कोशिश की गई है.

वारसा का एक और मशहूर होटल है ब्रिस्टॉल. ये यहां के राष्ट्रपति के महल के क़रीब ही है. ये 1901 से ही बड़े लोगों के रुकने का ठिकाना रहा है. हालांकि एच15 के मुक़ाबले ये महंगा है.

अगर आप वारसा में ज़्यादा वक़्त गुज़ारना चाहते हैं तो इसके लिए मामायसन रेज़िडेंस डायना नाम की जगह आपके लिए सही रहेगी. यहां पर तमाम सुविधाओं से लैस 46 अपार्टमेंट हैं जो किराए पर लिए जा सकते हैं.

हेम ऑनलाइन कंपनी के योहानसन कहते हैं कि किसी वर्सोवाइट के साथ डिनर या लंच पर जाना बड़ा जोख़िम लेने जैसा है. क्योंकि पोलैंड के लोग मेहमान होने पर भी बिंदास ऑर्डर करते हैं. ये आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.

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वो खाने पीने के लिए एलिग्ज़िर या फिर एटेलियर अमारो नाम के रेस्तरां का ज़ायक़ा लेने की सलाह देते हैं. यहां के मशहूर शेफ वोजेशिएक अमारो कहते हैं कि वामपंथियों के राज में पोलैंड अपनी जड़ों से कट गया था.

पिछले बीस सालों से उनकी कोशिश ये है कि पोलैंड के ज़ायक़े को फिर से ज़िंदा किया जाए.

बदलते हुए पोलैंड में यहां की कला और संस्कृति को सहेजने के लिए भी वारसा में कोशिशें हो रही हैं. यहां कई नए म्यूज़ियम और आर्ट गैलरीज़ खुली हैं.

जैसे पोलिन म्यूज़ियम में पोलैंड में रहने वाले यहूदियों का इतिहास बयां किया गया है. वहीं वारसा अपराइज़िंग म्यूज़ियम में हिटलर के ख़िलाफ़ पोलिश नागरिकों की बग़ावत की कहानी बतायी जाती है.

इन गंभीर मसलों से अलग कुछ नया देखना चाहते हैं तो उसके लिए आप वारसा के म्यूज़ियम ऑफ मॉडर्न आर्ट का रुख़ कर सकते हैं.

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वारसा में घूमने की कुछ और जगहों का मज़ा भी लिया जा सकता है. जैसे पैलेस ऑफ कल्चर एंड साइंस. ये वारसा के मेन मेट्रो स्टेशन के बगल में ही है.

पचास के दशक में सोवियत तानाशाह जोसेफ़ स्टालिन ने इस इमारत को पोलैंड को तोहफ़े के तौर पर दिया था. आज यहां बार हैं, म्यूज़ियम है. म्यूज़िक कॉन्सर्ट होते हैं. यहां कैसिनो भी हैं और कॉन्फ्रेंस रूम भी.

पूरे वारसा शहर का नज़ारा देखना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि इस इमारत की तीसरी मंज़िल पर जाने का टिकट कटाएं. फिर आपको एक ही बार में पूरे शहर की ख़ूबसूरती का लुत्फ़ मिल जाएगा.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20160504-this-once-dark-city-is-becoming-the-darling-of-europe" platform="highweb"/></link>, जो बीबीसी <link type="page"><caption> कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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