सड़क में अचानक सामने सीढ़ियां आ जाएँ तो..

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शायद आपने कभी नहीं सोचा होगा कि कुछ तस्वीरों, पेंटिंग्स या स्केच से लोगों की ज़िंदगी बचाई जा सकती है.

भारत सरकार का परिवहन मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहा है.

पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया में कुछ ऐसी तस्वीरें आई हैं, जिनमें इन चीज़ों की मदद से सड़क हादसों को रोकने की बात कही जा रही है.

सड़कें पार करने के रास्तों पर बनी ये पेंटिंग्स, नज़रों को धोखा देती हैं.

गाड़ी चलाने वालों को ये लगता है कि आगे सड़क पर सीढ़ियां हैं, जिन्हें देखकर वो अपनी रफ़्तार कम कर लेते हैं.

सामान्य ज़ीब्रा क्रॉसिंग की बजाय ये ख़ास तरह की पेंटिंग्स, सड़कों पर उभरी हुई सी नज़र आती हैं.

नज़रों को धोखा देने वाली इन पेंटिंग्स का मक़सद सड़क पर चलने वाली गाड़ियों की रफ़्तार धीमी करके हादसों को रोकना है.

असल में ये थ्री डी पेंटिंग्स हैं और यह कोई नया चलन नहीं. सोलहवीं सदी में ऐसी कुछ पेंटिंग बनी थीं.

ऐसी एक पेंटिंग का नाम था 'द एंबेस्डर्स', जिसे जर्मन और स्विस कलाकार हैंस हॉल्बिन ने 1533 में बनाया था.

ये पेंटिंग लकड़ी पर बनाई गई थी और सामने से देखने लगता था कि दो कूटनीतिज्ञ दुनियावी ख़यालों में खोए हुए हैं.

उनके इर्द-गिर्द, वैज्ञानिक उपकरण और संगीत के साज़ो-सामान बिखरे पड़े हैं.

मगर इसी पेंटिंग को आप बांई ओर से, अपनी कनखियों से इस तरह देखें जैसे कि अचानक आपकी नज़र इस पेंटिंग पर पड़ी हो, तो एक खोपड़ी आपकी तरफ़ मुस्कुराती हुई दिखती है.

ये खोपड़ी सामने से पेंटिंग को देखने पर नज़र नहीं आती.

हॉल्बिन का मक़सद लोगों को याद दिलाना था कि आप इस दुनिया में हमेशा के लिए नहीं हैं और आपको एक दिन यहां से जाना ही है.

उस दौर में कई कलाकार अपनी कला में इस तरह के संदेश देने की कोशिश करते थे.

इसमें यह बताया जाता था कि दुनिया में आप हमेशा के लिए नहीं आए हैं, और आपको मोक्ष की कोशिश करते रहना चाहिए.

सोलहवीं सदी में इस तरह की पेंटिंग्स के बढ़ते चलन को देखते हुए हॉल्बिन ने अपनी पेंटिंग में ये संदेश खुलकर नहीं, इशारों में दिया था.

यह संदेश सीधी-सपाट आंखों से नहीं दिखता, इसे देखने के लिए ख़ास नज़र की ज़रूरत होती थी.

जब आप ये खोपड़ी देख लेते हैं, तो पेटिंग की बाक़ी चीज़ों से आपका ध्यान ख़ुद-ब-ख़ुद हट जाता है.

ऐसा लगता है मानो ये खोपड़ी आपको इस दुनिया से आगे की दुनिया में ले जाती है. इस रास्ते में आने वाली हर दुनिया की बाधा अपने आप दूर हो जाती है.

इसी तरह भारत की सड़कों पर 'थ्री-डी' पेटिंग्स का मक़सद लोगों को मौत के ख़तरे से सावधान करना और उन्हें सुरक्षित, धीरे चलने के लिए प्रेरित करना है.

देखना होगा कि ज़ीब्रा क्रॉसिंग पर बनी ये थ्री-डी पेंटिंग्स, अपने मक़सद में कहां तक कामयाब होती हैं.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए<link type="page"><caption> यहां </caption><url href="http://www.bbc.com/culture/story/20160429-how-optical-illusions-can-save-lives" platform="highweb"/></link>क्लिक करें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल </caption><url href="http://www.bbc.com/capital/" platform="highweb"/></link>पर उपलब्ध है.)

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