फ़र्श पर गिरा हुआ भोजन कितना सुरक्षित है?

    • Author, मेलिसा हॉगेनबूम
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
  • प्रकाशित

अक्सर हमारे हाथ से खाने-पीने की चीज़ें फ़र्श पर गिर जाती हैं. अगर वो चॉकलेट या आइसक्रीम जैसी पसंदीदा चीज़ हुई तो उसे फ़ौरन उठाने को हाथ लपकता है. लेकिन, तुरंत ही ये ख़याल भी दिल में आता है कि न जाने कितने बैक्टीरिया अब तक उससे चिपक गए होंगे.

अगर वो घर की साफ़-सुथरी फ़र्श पर गिरा हो, तो हम यह सोचकर उके पक्का उसे उठा लेते हैं कि घर का फ़र्श तो आम तौर पर साफ़ ही होता है.

इस बारे में लोग पांच सेकेंड की थ्योरी पर भी अमल करते हैं. यानी अगर गिरने के पांच सेकेंड के भीतर कोई खाने की चीज़ फ़र्श से उठा ली जाए, तो उस पर कीटाणुओं का हमला नहीं होता.

लेकिन, क्या पांच सेकेंड का ये फ़ॉर्मूला सही है? कहीं, फ़र्श पर गिरी चॉकलेट खाकर हम अपने मुंह में कीटाणु तो नहीं डाल लेते?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बीबीसी अर्थ के समुदाय के लोगों से बात की, कि आख़िर ऐसी स्थिति में वो क्या करेंगे?

इसके कई दिलचस्प जवाब मिले.

एडम हार्म्सवर्थ ने लिखा कि पांच सेकेंड वाला नियम सही है. सभी जीवों को वक़्त के दायरे का एहसास होता है.

इसके जवाब में गैरी बर्च ने एडम का मज़ाक़ उड़ाया. गैरी ने लिखा कि वो पांच नहीं, तीन सेकेंड के फ़ॉर्मूले पर अमल करते हैं, क्योंकि उसके बाद तो उनका कुत्ता ही उनकी फ़र्श पर गिरी चॉकलेट को चट कर जाता है.

वहीं मैनुअल रोडरिग्ज़ ने कहा कि वो ग़रीब छात्र हैं, इसलिए वो पांच मिनट बाद भी फ़र्श से गिरी चीज़ उठाकर खा लेते हैं. वैसे कुछ लोगों ने ये भी कहा कि वो फ़र्श पर गिरे किसी खाने के सामान को फिर नहीं खाते और सीधे कूड़ेदान में फेंक देते हैं.

जॉन बेडेट ने कहा कि ज़मीन पर हर तरफ़ बैक्टीरिया हैं इसलिए फ़र्श पर गिरने वाली किसी भी खाने की चीज़ को अगर तुरंत नहीं उठा सकते तो फिर नहीं खाना चाहिए.

वहीं लेन जैस्पर ने कहा कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आपके हाथ से खाने का कौन सा सामान गिरा है या फिर आप कितने भूखे हैं.

अब, ऐसे जवाब से जब सिर चकराया तो ये सवाल वैज्ञानिकों से पूछा गया. क्या वो ज़मीन पर गिरा हुआ टोस्ट, पिज़्ज़ा या फिर चॉकलेट खाना पसंद करेंगे?

वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसा नहीं है कि ज़मीन पर कीटाणुओं की फौज का कब्ज़ा है कि कोई चीज़ गिरी और उन्होंने उस पर धावा बोला. सच तो ये है कि कीटाणु, पूरे माहौल में ही हैं. आपने चाहे कुछ देर पहले ही किसी कीटाणुनाशक से पोछा लगाया हो, फिर भी कीटाणु माहौल में मौजूद होते हैं. एडम टेलर कहते हैं कि असल में तो पांच सेकेंड जैसा कोई नियम है ही नहीं.

शिकागो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक जैक गिलबर्ट कहते हैं, "जैसे ही कोई चीज़ ज़मीन पर गिरती है, उस पर धूल जम जाती है और इसके साथ ही उससे कीटाणु भी चिपक जाते हैं".

किसी भी वक़्त, हमारे घर की धूल में नौ हज़ार तरह के बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणु मौजूद होते हैं, हालांकि इनमें से ज़्यादातर नुक़सान पहुंचाने वाले नहीं होते.

बैक्टीरिया आपके हाथ में होते हैं, आपके चेहरे पर, आपके मुंह में होते हैं. हम ख़ुद अपनी त्वचा से या फिर सांस निकालकर, माहौल में बैक्टीरिया छोड़ते रहते हैं.

गिलबर्ट कहते हैं कि आप ख़ुद को कीटाणुओं से छुपा नहीं सकते. एक रिसर्च के मुताबिक़ हर इंसान एक घंटे में अपने शरीर से माहौल में क़रीब चार करोड़ बैक्टीरिया छोड़ता है.

इसके बावजूद पिछली एक सदी से हमें बताया जा रहा है कि बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणु हमारे लिए ख़तरनाक हैं.

हम धूल मिट्टी को लेकर इतने डरे हुए हैं कि मत पूछिए. मगर सच ये है कि किसी बीमारी के कीटाणु से हमारा सामना कभी भी हो सकता है.

शिकागो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक जैक गिलबर्ट कहते हैं कि उन्हें ज़मीन पर गिरी चीज़ उठाकर खाने में कोई संकोच नहीं होगा. हां, किसी बीमारी वाली जगह पर, जैसे अस्पताल के फ़र्श पर कुछ गिर जाए तो वो बिल्कुल नहीं उठाएंगे. गिलबर्ट तो यहां तक कहते हैं कि अगर आप अपने घर या टॉयलेट की फ़र्श को चाट भी लें तो बीमार नहीं होंगे.

लेकिन अगर घर में कोई बीमार हो या फिर किसी जगह साफ़-सफ़ाई न हो तो वहां फ़र्श पर गिरा सामान उठाकर नहीं खाना चाहिए.

हां, हमारे आस-पास बीमारियों वाले कुछ कीटाणु ज़रूर मौजूद रहते हैं. अगर वो फ़र्श पर होगा तो घर के दूसरे हिस्से में भी ज़रूर होगा.

जैसे; सालमोनेला कीटाणु, जो घरों में आम-तौर पर पाया जाता है. इसे हम अक्सर खाने पीने की चीज़ों के साथ अपने शरीर में आने का मौक़ा दे देते हैं. इसी की वजह से हमें टाइफ़ाइड होता है.

वैज्ञानिकों की मानें तो बैक्टीरिया को आप अपने पास आने से किसी क़ीमत पर नहीं रोक सकते, इसलिए उनसे डरिए मत. इनके लगातार संपर्क में आने से आपका इम्यून सिस्टम यानी बीमारियों से लड़ने की आपकी ताक़त बेहतर होती है.

अमेरिका की इलीनॉय यूनिवर्सिटी कैथरीन अमाटो कहती हैं कि कीटाणुओं से संपर्क फ़ायदेमंद होता है, इंसान के विकास में इन्होंने अहम भूमिका निभाई है.

हम बचपन से ही कीटाणुओं के संपर्क में आकर, बीमारियों से लड़ने की ताक़त हासिल करते हैं. ऐसे में अगर हम इनसे डरेंगे, दूर भागेंगे, तो हमारा ही इम्यून सिस्टम कमज़ोर होगा.

कुल मिलाकर, ज़मीन पर गिरा सामान उठाकर खाने का पांच सेकेंड का नियम पूरी तरह से बकवास है, क्योंकि इसको मानने से भी आप कीटाणुओं से बच नहीं सकते.

इसलिए अगली बार आपकी पसंदीदा चॉकलेट अगर ज़मीन पर गिर जाए, तो बिंदास खाइए. हां, टॉयलेट सीट से उठाकर खाने वाला आइडिया ज़रा ज़्यादा ही हो जाएगा.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/story/20160322-what-really-happens-to-food-when-you-drop-it-on-the-floor" platform="highweb"/></link> पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी अर्थ</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/uk" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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