इस्लामिक स्टेट के इतने नाम क्यों हैं?

    • Author, फ़ैसल इरशाद
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
  • प्रकाशित

सीरिया और इराक़ के एक बड़े इलाके पर कब्जा जमाए चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट को अंग्रेजी बोलने वाली सरकारें और मीडिया अलग-अलग नाम से संबोधित करती हैं.

संयुक्त राष्ट्र और अमरीका आम तौर पर इस चरमपंथी समूह के लिए 'आईएसआईएल' (इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड द लेवांत) ही इस्तेमाल करते है फिर चाहे ये गुट मध्य-पूर्व, अफ्रीका और एशिया में कही भी अपने पैर क्यों ना पसार चुका हो.

जून 2014 के बाद से इस समूह ने ख़ुद के लिए इस नाम का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है. समूह ने अपना नाम छोटा करके 'इस्लामिक स्टेट' कर लिया है.

यह इसकी विस्तारवादी महत्वकांक्षाओं को दर्शाता है.

तब से बीबीसी न्यूज़ इस नाम का इस्तेमाल करता आ रहा है, लेकिन वो इसे 'इस्लामिक स्टेट समूह' या 'स्व- घोषित इस्लामिक स्टेट' कहता है और संक्षिप्त में इसे 'आईएस' लिखता है.

दूसरे मीडिया संस्थान अब भी 'आईएसआईएल' या 'आईएसआईएस' इस्तेमाल करते हैं जो एक समूह के पुराने नाम 'इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड सीरिया' या 'इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड अल-शाम' पर आधारित है.

लेकिन मध्य-पूर्व और दूसरे इलाकों में इसके लिए 'दाइश' शब्द का ख़ूब इस्तेमाल हो रहा है. इस शब्द के नकारात्मक अर्थ को देखते हुए समूह की वैद्यता को चुनौती देने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.

दाइश एक अरबी शब्द है जो समूह के पुराने अरबी नाम 'अल-दावला अल-इस्लामिया फील इराक़ वा अल-शाम' के शुरुआती अक्षरों से मिलकर बना है.

इस्लामिक स्टेट

हालांकि एक अरबी शब्द के रूप में इसका कोई अर्थ नहीं है. यह सुनने में अच्छा नहीं लगता है और समूह के समर्थक इसके इस्तेमाल पर ऐतराज जताते हैं.

दाइश अरबी भाषा के एक और शब्द जैसा सुनाई देता है जिसका मतलब होता है पैरों तले रौंद देना या किसी चीज़ को कुचल देना.

आईएसआईएल-आईएसआईएस के बीच का फ़र्क़ अरबी शब्द अल-शाम की वजह से है.

पहले मीडिया इस बात को लेकर असमंजस में था इसे अंग्रेजी में कैसे अनुवाद करें क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि अल-शाम का इस्तेमाल समूह किन मायनों में कर रहा था.

अल-शाम के कई अनुवाद 'द लेवांत','ग्रेटर सीरिया', 'सीरिया' या 'दमिश्क' भी हो सकते हैं.

अल-शाम का इस्तेमाल आम तौर पर सातवीं सदी से मुस्लिम खलीफा के शासन के दौरान भूमध्य सागर और युफरेट्स, अनातोलिया (वर्तमान में तुर्की) और मिस्र के बीच के इलाक़े के लिए किया जाता था.

इसका इस्तेमाल बीसवीं सदी के मध्य तक किया गया था जब तक कि ब्रिटेन और फ्रांस ने मध्य-पूर्व में नए देश और सीमाएं नहीं बना दी थी.

'लेवांत' का इस्तेमाल सदियों से अंग्रेजी बोलने वाले लोग भूमध्य सागर के पूर्वी हिस्से और इससे जुड़े द्वीपों और देशों के लिए करते आए हैं.

प्रथम विश्व युद्ध के बाद उपनिवेशवादी ताक़तें इस शब्द का इस्तेमाल मौजूदा सीरिया, जॉर्डन, लेबनान, इसराइल, फ़लस्तीनी क्षेत्र और दक्षिणी-पूर्वी तुर्की के हिस्से के लिए करती थीं.

हालांकि चरमपंथी समूह को 'सीरिया' शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति होगा क्योंकि ये उनकी महत्वाकांक्षा को सिर्फ आधुनिक सीरिया की सीमाओं तक सीमित करता है.

इसलिए कई विशेषज्ञों का मानना है कि अल-शाम का अनुवाद नहीं होना चाहिए.

अरबी भाषी दुनिया में दाइश का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर तो हो रहा है लेकिन अपमानजनक मक़सद के साथ.

चरमपंथी समूह की आपत्ति के बावजूद इस नाम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.

दुनिया के राजनेता और मीडिया संस्थान भी अब इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इसी महीने संसद में कहा है, "वास्तव में मौत का यह सौदागर ना ही इस्लाम की सही नुमाइंदगी करता है और ना ही कोई स्टेट है."

यह बात उन्होंने 'आईएसआईएल' की जगह 'दाइश' का इस्तेमाल करने की फ्रांस की पहल का साथ देते हुए कही.

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