फॉक्सवैगन वापस बुलाएगा पांच लाख गाड़ियां

फोक्सवैगन
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अमरीकी अधिकारियों ने जर्मन कार कंपनी फॉक्सवैगन को आदेश दिया है कि वो अमरीका से अपनी पांच लाख गाड़ियां वापस बुलाए.

अधिकारियों का कहना है कि इन कारों में एक ख़ास तरह का यंत्र लगा है जो प्रदूषण के स्तर की सही जानकारी नहीं देता.

इस यंत्र की मदद से यह कारें मानक स्तर से 40 गुना अधिक प्रदूषण फैलाने के बावजूद प्रयोगशाला की जांच में पास हो जाती हैं.

अमरीका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) ने देश की 'क्लीन एयर ऐक्ट' के तहत यह कदम उठाया है.

इसके तहत कंपनी को 2009 से 2014 तक बनी जेटा, बीटल, आॅडी ए3, गोल्फ और 2014 से 2015 के बीच बनी पसाट को वापस लेना होगा.

फ़ॉक्सवैगन

इतनी बड़ी संख्या में कारों को वापस लेने पर कंपनी को क़रीब 18 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है.

प्रवर्तन और अनुपालन आश्वासन कार्यालय की अधिकारी सिन्थिया जाइल्स कहती हैं, "इस तरह के यंत्रों का इस्तेमाल करना धोखाधड़ी है और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है."

जब इन कारों का परीक्षण किया जाता था तो इसमें लगे यंत्र इस बात को खुद भांप लेते थे और प्रदूषण के स्तर को कम कर देते थे.

लेकिन टेस्ट ख़त्म होने के बाद यानि कि आम इस्तेमाल के समय कार इस यंत्र को बंद कर देती थी जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता था.

पहले भी लगा जुर्माना

कैलिफोर्निया राज्य ने फॉक्सवैगन को एक नोटिस भी जारी किया है.

इससे पहले 2014 में ईपीए ने कोरियन कार निर्माता कंपनी ह्यूंडेई और किया मोटर्स पर 30 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया था.

इन कंपनियों पर आरोप था कि इन्होंने अपनी लगभग 12 लाख़ कारों के फ्यूल इस्तेमाल के ऐवरेज को लेकर ग़लत जानकारी दी थी.

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