मुल्ला उमर की मौत आईएस के लिए वरदान है?

मुल्ला उमर
इमेज कैप्शन, तालिबान ने हाल ही में अपने नेता मुल्ला उमर की मौत की पुष्टि की है.
    • Author, ज़ैनुल आबिद
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
  • प्रकाशित

अफ़ग़ान तालिबान के नेता मुल्ला उमर की मौत की घोषणा चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिए फ़ायदेमंद हो सकती है, जो पहले से ही अफ़ग़ानिस्तान में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल और कमज़ोर पड़ते तालिबान का ये दौर इस्लामिक स्टेट के पैर पसारने के लिए मुफ़ीद साबित हो सकता है.

विलायत ख़ुरासान नाम के नए प्रांत की घोषणा के बाद से ही इस्लामिक स्टेट ने अफ़ग़ानिस्तान में अपनी पकड़ बनाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं.

लेकिन उसे तालिबान और अल क़ायदा से जुड़े जिहादियों के प्रतिरोध के कारण वैसी कामयाबी नहीं मिल सकी जैसी इराक़, सीरिया या मध्यपूर्व के अन्य इलाक़ों में मिली थी.

हालांकि उसे इन दोनों संगठनों से अलग हुए छोटे-छोटे समूहों से समर्थन ज़रूर मिला था.

लेकिन अफ़ग़ानिस्तान पर नज़र रखने वालों का कहना है कि हालात जल्द बदल सकते हैं.

'डर फैलाने की रणनीति'

अफ़ग़ान तालिबान
इमेज कैप्शन, मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान में नेतृत्व संकट पैदा हो गया है.

इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान में पैदा हुए नेतृत्व संकट का इस्लामिक स्टेट ने फ़ायदा उठाना शुरू कर दिया है.

इस्लामिक स्टेट की बढ़ी गतिविधियां इसका सबूत हैं.

इस्लामिक स्टेट ने दस अगस्त को एक वीडियो जारी किया था जिसमें उसके लड़ाके आँखों पर पट्टी बंधे अफ़ग़ान क़ैदियों को विस्फ़ोटकों से उड़ाते दिख रहे हैं. ये मध्यपूर्व में उसकी कार्रवाइयों जैसी ही कार्रवाई थी.

इस वीडियो की तालिबान ने कड़ी आलोचना की थी जो दोनों संगठनों के बीच बढ़ते फ़ासले का स्पष्ट संकेत है.

वीडियो का जारी करने का समय दर्शाता है कि इस्लामिक स्टेट मध्य पूर्व की तरह अफ़ग़ानिस्तान में भी वीडियो जारी करके लोगों और सरकारों में डर पैदा करने की रणनीति को दोहराना चाहता है.

विशेषज्ञ इस बात का अंदेशा भी जता रहे हैं कि तालिबान से अगल होने वाले लड़ाके इस्लामिक स्टेट का हिस्सा बन रहे हैं.

बदलती वफ़ादारियां

मुल्ला उमर की मौत की घोषणा के दो हफ़्ते बाद ही तालिबान के पूर्व सहयोगी 'इस्लामिक स्टेट मूवमेंट ऑफ़ उज़बेकिस्तान' ने इस्लामिक स्टेट के साथ वफ़ादारी का एलान कर दिया.

अफ़ग़ान तालिबान
इमेज कैप्शन, विशेषज्ञों का मानना है कि मुल्ला उमर की मौत के ऐलान के बाद कुछ तालिबान लड़ाके बग़दादी को अपना नेता मान सकते हैं.

6 अगस्त को 'द सेंट्रल एशियन मिलिटेंट ग्रुप' ने एक वीडियो जारी किया जिसमें समूह के नेता और सदस्यों ने आईएस नेता अल बग़दादी के साथ वफ़ादारी का एलान किया.

अफ़ग़ानिस्तान में कई बड़े हमले करने वाले संगठन आईएमयू की ओर से वफ़ादारी का एलान इस्लामिक स्टेट के लिए बड़ी कामयाबी है.

आईएमयू के नेता उस्मान गाज़ी ने मुल्ला उमर की मौत से पहले ही उनके नेतृत्व पर सवाल उठा दिए थे.

आने वाले कुछ महीनों में गाज़ी जैसे जिहादी बड़ी तादाद में इस्लामिक स्टेट के साथ जुड़ सकते हैं.

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस्लामिक स्टेट के प्रति जिहादियों के बढ़ते रुझान के कई कारण हैं.

कई मानते हैं कि तालिबान एक पुराना पड़ रहा संगठन है जो जिहादियों को आकर्षित करने वाले ठोस वैचारिक आधार के बिना टूट सकता है.

तालिबान लड़ाके
इमेज कैप्शन, तालिबान में अफ़ग़ान सरकार से वार्ता को लेकर भी मतभेद है.

आईएस में क्या ख़ास है?

इस्लामिक स्टेट के विपरीत तालिबान एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें अफ़ग़ानिस्तान और पड़ोसी देशों के क्षेत्रीय क़बीलों के लोग शामिल हैं. शरिया क़ानून या एक विस्तृत इस्लामी साम्राज्य कभी उसकी आकांक्षाओं के केंद्र में नहीं रहा है.

इस्लामिक स्टेट कट्टरपंथी वहाबी-सलाफ़ी इस्लाम की वकालत करता है और ख़ुद को एकीकृति वैश्विक इस्लामी सम्राज्य बनाने के उद्देश्य के लिए काम करने वाला वैश्विक जिहादी संगठन बताता है.

साथ ही तालिबान की अस्पष्ट नेतृत्व की प्रकृति के कारण भी कई लड़ाके तालिबान छोड़कर इस्लामिक स्टेट के साथ जुड़ रहे हैं.

इस्लामिक स्टेट के नेता अबु बक्र अल बग़दादी
इमेज कैप्शन, इस्लामिक स्टेट के नेता अबु बक्र अल बग़दादी अपने लड़ाकों को संबोधित करते रहे हैं.

कई जिहादी जो मुल्ला उमर को एक 'ग़ायब नेता' समझते थे, वो करिश्माई और युवा बताए जाने वाले अबु बकर अल बग़दादी को अपना नेता मानने से ज़्यादा ख़ुश होंगे.

बग़दादी अकसर कमांडरों को संबोधित करते हैं और संगठन के वीडियो में भी दिखते हैं.

तालिबान में बिखराव

अफ़ग़ानिस्तान के वनटीवी चैनल ने 23 जुलाई को अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि इस्लामिक स्टेट के उदय के बाद तालिबान तीन समूहों में बंट गया है जिसमें से एक सरकार और अमरीका के ख़िलाफ़ लड़ रहा है, दूसरा इस्लामिक स्टेट के साथ जुड़ गया है और तीसरा सरकार से वार्ता चाहता है.

अभी ये देखना बाक़ी है कि तालिबान अपने नेतृत्व को लेकर जारी संकट से कैसे निबटता है.

इस्लामिक स्टेट
इमेज कैप्शन, इस्लामिक स्टेट ने सीरिया और इराक़ के बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

राजनीतिक टिप्पणीकार हारू अमीरज़ादा ने 29 जुलाई को टोलो न्यूज़ से कहा कि मुल्ला उमर की मौत के बाद ख़ुद को 'यतीम' मान रही तालिबान चरमपंथियों की एक बड़ी जमात अबु बकर अल बग़दादी के प्रति वफ़ादार हो सकती है.

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान का मीडिया हाल के दिनों में जोर-शोर से ये कह रहा है कि इस्लामिक स्टेट की उपस्थिति इस इलाक़े के लिए बेहद ख़तरनाक़ होगी.

मीडिया दोनों देशों की सरकारों से चरमपंथ के ख़िलाफ़ अपनी नीतियों की समीक्षा करने के लिए भी कह रहा है.

कुछ टिप्पणीकारों का मत है कि सरकारों को तालिबान के साथ समझौता कर साझा दुश्मन इस्लामिक स्टेट से निबटना चाहिए.

पाकिस्तान के उर्दू अख़बार 'ख़बरनामा' ने 23 जुलाई के एक संपादकीय में लिखा कि अफ़ग़ान संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान बेहद ज़रूरी है और तालिबान और सरकार को साथ बैठना चाहिए ताकि इस्लामिक स्टेट जैसी घातक प्लैग की बीमारी को फैलने से रोका जा सके.

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