अमरीकी रेस्त्रां कर्मचारियों को खाने के लाले

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    • Author, सलीम रिज़वी
    • पदनाम, न्यूयॉर्क से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

एक अध्ययन से पता चला है कि अमरीका में रेस्त्रां में काम करने वाले बहुत से कर्मचारियों को खाने की कमी है.

इसका मतलब यह है कि अमरीका जैसे धनी देश में बहुत से रेस्त्रां कर्मचारियों के पास ऐसे संसाधन नहीं हैं कि वो इतना खाना खा सकें जिससे वह एक सेहतमंद जीवन गुज़ार सकें.

खाने की कमी का सामना करने वालों में ख़ासकर वेटर, बावर्ची, बर्तन धोने वाले और सफ़ाई करने वाले रेस्त्रां कर्मचारी शामिल हैं.

बदसलूकी और शोषण

भारतीय मूल के सुबाशीष बरुआ पिछले चार सालों से अमरीका में रेस्त्रां कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं.

अमरीकी रेस्तरां कर्मचारी सुबाशीष

सुबाशीष कहते हैं, "यह बिल्कुल सही बात है कि बहुत से रेस्त्रां कर्मचारियों को खाने की कमी है. उनके पास इतना पैसा नहीं होता कि वो ख़रीद कर खाना खाएं और बहुत सी कंपनी उन्हें खाना नहीं देती हैं."

"वे 12-12 घंटे बग़ैर खाने के काम करते रहते हैं और इसीलिए बहुत से कर्मचारियों की तबियत ख़राब हो जाती है."

रेस्त्रां कर्मचारियों पर आई ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, अमरीका की पूरी आबादी के मुक़ाबले रेस्त्रां कर्मचारियों को खाने की कमी दोगुनी पाई गई है.

और न्यूयॉर्क में 41 प्रतिशत रेस्त्रां में कर्मचारियों को खाने की कमी का सामना करना पड़ता है.

यह रिपोर्ट रेस्त्रां और खाद्य उद्योग से जुड़ी कई संस्थाओं ने मिलकर जारी किया है, जिनमें फ़ूड चेन वर्कर्स अलाएंस और रेस्त्रां ऑपर्च्यूनिटीज़ सेंटर नामक संस्थाएं शामिल हैं.

इस सेंटर से जुड़ी कैथरीन बारनेट कहती हैं, "बहुत से रेस्त्रां कर्मचारियों को सही मेहनताना नहीं मिलता."

कैथरीन बारनेट

"रिपोर्ट का उद्देश्य यह है कि रेस्त्रां कर्मचारियों को जो समस्याएं पेश आ रही हैं उनको दूर करने के लिए ऐसे क़ानून बनाए जाएं."

शोषण

इस रिपोर्ट के अनुसार, रेस्त्रां कर्मचारियों के काम करने के हालात ख़राब होते हैं, उनके साथ बदसलूकी होती है और उनका शोषण किया जाता है.

कुल रेस्त्रां कर्मचारियों में से आधे कर्मचारियों को पूरे हफ़्ते काम करने के बावजूद अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू किए गए कार्यक्रम के तहत मदद का सहारा लेना पड़ता है.

यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क औऱ सैन फ़्रांसिस्को के 280 रेस्त्रां कर्मचारियों के सर्वेक्षण और साक्षात्कार पर आधारित है.

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जिन रेस्त्रां कर्मचारियों के पास अमरीका में काम करने के लिए सही दस्तावेज़ नहीं हैं उनमें से 67 प्रतिशत कर्मचारियों को खाने की कमी तो है ही, अन्य कर्मचारियों के मुकाबले यह 24 प्रतिशत ज़्यादा भी मिली है.

सुबाशीष बरुआ के पास भी अमरीका में काम करने के लिए सही दस्तावेज़ नहीं हैं.

वो कहते हैं, "ऐसे लोगों को रेस्त्रां मालिक धमकाते भी हैं कि अगर मेहनताने के पैसे मांगे तो अधिकारियों को बुलाकर अमरीका से निकलवा देंगे. डर के कारण बहुत से कर्मचारी कम पैसे में 12-12 घंटे काम करते हैं और कई तो कई महीने तक मेहनताना भी नहीं लेते."

इसके अलावा अधिकतर रेस्त्रां कर्मचारी कम पढ़े-लिखे होते हैं. वो अंग्रेज़ी पढ़ और बोल नहीं पाते, जिससे वो अपने अधिकारों को लेकर सजग भी नहीं होते.

25 साल से नहीं बढ़ा वेतन

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रेस्त्रां कर्मचारियों की कोई मज़बूत यूनियन भी नहीं है, लेकिन रेस्त्रां कर्मचारियों की मदद करने वाली संस्थाएं इन कर्मचारियों को संगठित करके अपनी मांगें मनवाने के लिए अकसर रैली और प्रदर्शन करते रहते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़, जिन रेस्त्रां कर्मचारियों को खाने की कमी है उनमें टिप वाले रेस्त्रां कर्मचारियों की संख्या अन्य कर्मचारियों के मुक़ाबले 30 प्रतिशत अधिक है.

अमरीका में रेस्त्रां कर्मचारियों को ग्राहक द्वारा टिप देने का चलन आम है. इसीलिए रेस्त्रां मालिक मेहनताना भी कम देते हैं.

अमरीकी क़ानून के तहत टिप पाने वाले रेस्त्रां कर्मचारियों को महज़ 2.13 डॉलर प्रति घंटा की दर से मेहनताना मिलता है, जो पिछले 25 सालों से बढ़ाया नहीं गया है.

रेस्त्रां ऑपर्च्यूनिटीज़ सेंटर से जुड़े भारतीय मूल के प्रभु सीगामनि रेस्त्रां कर्मचारियों को प्रशिक्षण देते हैं.

प्रभु सीगामनि

प्रभु सीगामनि कहते हैं, "दक्षिण एशियाई मूल के भी बहुत से रेस्त्रां कर्मचारियों को बहुत कम मेहनताना मिलता है, कभी-कभी तो कुछ भी नहीं मिलता."

"उन्हें खाना भी नहीं मिलता, उनको काम पर आने-जाने की मुश्किल होती है, उनके पास घर नहीं होता, यहां तक कि वह सरकारी योजनाओं के तहत भी आर्थिक मदद नहीं ले पाते."

बढ़ेगा मेहनताना

अमरीका में रेस्त्रां उद्योग एक फलता-फूलता उद्योग माना जाता है, लेकिन रेस्त्रां कर्मचारियों को अन्य कर्मचारियों के मुकाबले सबसे कम मेहनताना दिया जाता है.

रेस्त्रां मालिकों का तर्क है कि अगर वह कर्मचारियों का मेहनताना बढ़ाएंगे तो उन्हें कर्मचारियों की संख्या कम करनी पड़ेगी जिससे बेरोज़गारी बढ़ेगी.

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कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर टिप वाले रेस्त्रां कर्मचारियों को अधिक मेहनताना देने के क़ानून मंज़ूर किए हैं. जैसे न्यूयॉर्क में अभी 5 डॉलर प्रति घंटा की दर से मेहनताना मिलता है और 2016 से इसे बढ़ा कर 7.50 डॉलर प्रति घंटा किया जाएगा.

लेकिन कई रेस्त्रां कर्मचारियों की संस्थाएं इसे भी कम मानती हैं.

रेस्त्रां कर्मचारी और इन कर्मचारियों के लिए काम करने वाली संस्थाएं सरकार से वाजिब और एक समान मेहनताना देने के लिए क़ानून बनाए जाने की मांग कर रही हैं.

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