इनकी आवाज़ से घबराकर भागने लगते हैं हाथी

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हाथी को लेकर कई आम धारणाएँ हैं. पहला ये कि उन्हें चूहों से डर लगता है. दूसरा ये कि हाथियों की ख़ासी लंबी याददाश्त होती है. तीसरा ये कि जब उनकी मौत आती है तो वो ख़ुदबख़ुद कब्रिस्तान की ओर जाने लगते हैं.

ये भी कि वे शोक मनाते हैं और उनका रिश्ता पहाड़ी जानवर हायरेक्स (अफ्रीकी चूहों की प्रजाति) से है. हाथियों को लेकर ये सब बातें खूब प्रचलित हैं.

लेकिन असलियत क्या है? बीबीसी अर्थ ने अपने अध्ययन में हाथियों के बारे में सच्चाई जानने की ही कोशिश की है.

चूहों से नहीं डरते हाथी

वास्तविकता यह है कि हाथियों को मधुमक्कियों से डर लगता है.

हाथियों की कब्रिस्तान जाने की बात मिथक है हालांकि अपने परिवार के किसी के गुज़रने पर उसके प्रति लगाव भी होता है.

हालाँकि कहा जाता है कि हाथी चूहों से बहुत डरते हैं. नेचुरल हिस्ट्री में प्लिनि द एल्डर ने लिखा है, "सभी जीवों में हाथी चूहों से सबसे ज़्यादा नफ़रत करते हैं."

वाल्ट डिजनी ने भी इस विचार को 1941 में प्रदर्शित अपनी फ़िल्म डम्बो में दिखाया. लेकिन क्या इसके पीछे कोई सच्चाई भी है?

लंदन की ज़ूलोजिकल सोसायटी के क्रेग ब्रूस बताते हैं, "मिथक के मुताबिक चूहे हाथी की सूंढ़ में घुस जाते हैं." लेकिन इसके कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं.

साफ़ ये है कि हाथी मधुमक्खियों को पसंद नहीं करते. कीनिया के जंगलों में पेड़ों के नीचे आराम कर रहे हाथियों को जब अफ्रीकी मधुमक्खियों की आवाज़ सुनाई गई तो वो हाथी वहां से भाग निकले.

हाथी और मधुमक्खियों के संबंध को तलाशने वाली प्रोजेक्ट ने भी पुष्टि की है.

हाथियों की याददाश्त

हाथियों के याददाश्त के बारे में कई क़िस्से कहानियां प्रचलित हैं. हाथियों को लैंडमार्क और रास्ते याद रहते हैं. इसके अलावा उनकी सामाजिक यादाश्त भी होती है.

1990 के दशक में कीनिया के एम्बोसेली नेशनल पार्क में हाथियों के आपसी संवाद के तरीके को तलाशने के लिए शोधकर्ताओं ने प्लेबैक रिकॉर्डिंग का सहारा लिया.

एक बार, शोधकर्ताओं ने एक हाथी की रिकॉर्ड की गई आवाज़ को दो साल बाद बजाया. इसको सुनने के बाद बहुत सारे हाथी लाउड स्पीकर के पास जमा हो गए और आवाज़ लगाने लगे.

इससे हाथियों के सामाजिक जुड़ाव को भांपने का संकेत मिला है.

एक दूसरे मामले में एक हथिनी अपने परिवार को छोड़कर हाथियों के किसी दूसरे समूह में रहने चली गई. लेकिन 12 साल बाद भी उसकी आवाज़ को उसका मूल परिवार न भूला.

जब उसकी आवाज़ कि रिकॉर्डिंग बजाई गई तो उसके मूल परिवार वाले एकत्र हो गए जिससे स्पष्ट था कि उन्होंने वो आवाज़ पहचान ली थी.

हाथियों का अपना कब्रिस्तान?

हाथियों का अपना कब्रिस्तान होता है, ऐसा कहा जाता है चाहे इसके लिए कोई तर्क मौजूद नहीं है.

ये बात सही है कि कई जगहों पर बड़े पैमाने पर हाथियों की हड्डियां मिलती हैं. लेकिन इसका असल कारण कई हाथियों का एक ही जगह पर मर जाना या फिर हंटरों का शिकार हो जाना है.

इस बात की भी वैज्ञानिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है कि हाथियों को मौत के करीब होने का आभास हो जाता है और वे 'अपने कब्रिस्तान' की ओर ख़ुदबख़ुद जाने लगते हैं.

वैसे इस बात के सबूत मिले हैं कि हाथियों को अपने किसी नजदीकी की मौत का बड़ा दुख होता है.

'एलिफेंटाइन मेमोरी' नाम की किताब में मशहूर कंज़र्वेशनिस्ट सिंथिया मौस ने लिखा है कि किस तरह उनके कैंप को एक हाथी का जबड़ा मिला था.

लेकिन कई दिनों बाद वहां से गुजरते उसके परिवार के हाथियों ने उसे पहचान लिया.

उसके परिवार के हाथी वहां लंबे समय तक बने रहे. मौस और उनके साथियों ने ऐसे कई प्रयोगों के ज़रिए हाथियों के व्यवहार को समझने की कोशिश की है.

अगर हाथियों को तीन चीजें दी जाएं- लकड़ी का टुकड़ा, हाथी की खोपड़ी और हाथी दांत तो हाथी अमूमन खोपड़ी को उलटने पुलटने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं.

शोधकर्ता अब तक नहीं पता लगा पाए हैं कि हाथियों को अपने रिश्तेदारों के अवशेष से ही लगाव होता है या किसी भी दूसरे हाथी के. हाथी दातों, स्पर्श या सूंघने की क्षमता से दूसरे हाथी की पहचान कर लेते हैं.

ये सब दर्शाता है कि हाथी असाधारण जीव है जो समझदार होता है और भावनात्मक भी.

हथिनी का जननांग 3 मीटर लंबा होता है, पृथ्वी पर किसी भी जीव में सबसे बड़ा. इसके चलते हाथी कभी भी हथिनी के जननांग में पूरा प्रवेश नहीं कर पाता है. इसकी एक वजह ये भी है कि हथिनी का जननांग शरीर के 1.3 मीटर अंदर जाकर शुरू होता है.

यह समुद्री स्तनधारियों में भी पाया जाता है. यह हाथियों के जलीय पूर्वजों की वजह से हो सकता है, ताकि जल के अंदर संसर्ग के दौरान पानी प्रवेश नहीं करे.

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/story/20150601-the-truth-about-elephants" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी अर्थ </caption><url href="http://www.bbc.com/earth" platform="highweb"/></link>पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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