किम जोंग-उन शैतान हैं या भगवान

किम जोंग-उन
    • Author, स्टीफ़ेन टामकिंस
    • पदनाम, लेखक
  • प्रकाशित

उत्तरी कोरिया के बाहर की दुनिया में किम जोंग-उन को एक राक्षस के रूप में पेश किया जाता है या एक मसखरे के रूप में जो लंदन के एक नार्ई के पास अपने भाड़े के गुंडे भेजता है जो उसके बालों की कटाई का मज़ाक उड़ाता है.

या एक मोटे प्लेबॉय के रूप में जिसे स्विस चीज़, तेज कारें और तेज़तर्रार महिलाएं पसंद हैं.

लेकिन उत्तरी कोरिया में वह एक सम्राट हैं, सर्वोच्च नेता जिसका प्रभामंडल भगवान सरीखा है.

उनकी प्रजा उनके लिए तब तक ताली बजाती है जब तक उनके हाथ छिल ना जाएं.

ख़राब दिन

उत्तरी कोरिया का सरकारी मीडिया ख़बरें देता रहता है कि कैसे वह देश भर में यात्रा कर मार्गदर्शन करते हैं. उदाहरण के लिए हाल ही में उन्होंने टेरपिन (कछुए की एक किस्म) की खेती के बारे में बताया.

किम जोंग-उन

कोरिया की वर्कर्स पार्टी के आधिकारिक समाचार पत्र <link type="page"><caption> 'नोडोंग शिन्मुन' की ख़बर</caption><url href="http://www.rodong.rep.kp/en/index.php?strPageID=SF01_02_01&newsID=2015-05-19-0014&chAction=T" platform="highweb"/></link> थी कि उनके पिता किम जोंग-इल की पहल पर प्योंगयांग में टेरपिन प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया था.

इसका मक़सद लोगों को स्वादिष्ट और पौष्टिक टेरपिन उपलब्ध कराना था. टेरपिन को उत्तर कोरिया में प्राचीन काल से क़ीमती टॉनिक माना जाता है.

किम जोंग-उन सलाह की बेहद ज़रूरत इसलिए थी कि क्योंकि यह पता चला था कि यह फ़ॉर्म (प्रजनन केंद्र) ठीक से काम नहीं कर रहा था.

अख़बार के अनुसार किम जोंग-उन ने कहा, "यह समझना बहुत मुश्किल है कि इस फ़ॉर्म से क्रांतिकारी इतिहास के बारे में शिक्षा दिए जाने की भी गुंजाइश नहीं है."

और तो और समुद्री झींगे के प्रजनन की कोशिश भी नाकाम हो गई है. ताएडोन्गैन्ग टेरपिन फ़ॉर्म के लिए यह कतई अच्छा दिन नहीं था.

'अगला नंबर मेरा' का अहसास

किम जोंग-उन

इससे पता चलता है कि उस व्यक्ति को समझना कितना मुश्किल है.

दुनिया भर में जिस व्यक्ति की छवि से नफ़रत की जाती है. दोनों तरफ़ के प्रचार करने वाले या तो उनकी छवि को चमकाते हैं या दाग़दार करते हैं.

दक्षिण कोरिया की गुप्तचर एजेंसी ने हाल में आरोप लगाया था कि उत्तर कोरिया में अधिकारियों की सफ़ाई की जा रही है. इससे यह साबित होता है कि उत्तर कोरिया के विशेषज्ञों के लिए भी वह अबूझ हैं.

बाहर के विशेषज्ञों को कोई उम्मीद नहीं है. कुछ का मानना है कि उनके हालिया काम अपने पिता के समय की तुलना में ज़्यादा अनियत हैं.

किम जोंग-इल के समय उनके नज़दीकी लोग बचे रहते थे- जनरलों की नौकरी और सिर बचे रहते थे- और इसका अर्थ यह था कि नेतृत्व के इर्द-गिर्द जो घेरा था वह नेता का समर्थन करता था.

लेकिन अब कहा जा रहा है कि किम जोंग-उन के संरक्षक और चाचा चांग सोंग-थाएक और रक्षा मंत्री ह्योन योंग-चोल की अचानक हत्या से उनके आस-पास के लोग डरते होंगे कि अगला नंबर उनका हो सकता है.

किम जोंग-उन, ह्योन योंग-चोल

अचानक और अप्रत्याशित मौत के डर की वजह ताक़तवर लोग पहले हरकत में आ सकते हैं.

लीड्स विश्वविद्यालय में मानद सीनियर रिसर्च फेलो, एडान फ़ोस्टर-कार्टर कहते हैं, "अगर राजभक्तों को लगता है कि, किसी भी समय और बिना वजह के, अगला नंबर उनका हो सकता है तो उनकी राजभक्ति कमज़ोर पड़ने लगती है और इससे वह उनका साथ छोड़ने की ओर भी बढ़ सकते हैं."

या इससे भी बुरा हो सकता है, "अगर संपन्न लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते, तो आप सोचिए कि किन परिस्थितियों में वे आपके ख़िलाफ़ जा सकते हैं."

फिर यह हिसाब लगाया जाने लगता है कि ख़तरा किससे कम होता है स्वामी-भक्ति से, पूरी तरह निष्ठा नहीं दिखाने से.

प्योंगयांग में बाहरी

षड्यंत्रकारियों के जिंदा रहने की संभावना ज़्यादा नहीं रहती.

किंग जोंग-उन

हिटलर को मारने का षड्यंत्र नाकाम हो गया था और पकड़े गए सभी षड्यंत्रकारियों को मार दिया गया था.

स्टालिन ने अपने सभी संभावित विरोधियों को ख़त्म कर दिया था.

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क चुंग-ही की रात के खाने के दौरान उनके ही गुप्तचर प्रमुख ने हत्या कर दी थी, जिन पर बाद में मुक़दमा चलाया गया और फांसी दे दी गई.

किम जोंग-उन में फ़ोस्टर-कार्टर एक ऐसे आदमी को देखते हैं जिसे कुछ समझ नहीं आ रहा है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "अब तक काबिलियत का कोई सबूत नहीं मिला है. किम जोंग-इल भी कुछ समय तक अनजान रहे थे लेकिन अब हम जानते है कि वह काफ़ी सक्षम थे. उन्हें उनके पिता ने 20 साल तक नेतृत्व के लिए तैयार किया था."

किम जोंग-उन को इस काम में 30 साल से कुछ कम उम्र में ही लगा दिया गया. जोंग-उन अपना ज़्यादातर समय स्विट्ज़रलैंड के स्कूल में बिताया है. इस तरह वो प्योंगयांग में एक बाहरी व्यक्ति सरीखे थे. शायद उनके लिए उत्तर कोरिया की राजनीति को समझना आसान न रहा हो.

छवि का 'कुप्रबंधन'

किम जोंग-उन

पिछले कुछ सालों में बाहर के बहुत से विशेषज्ञों को उत्तर कोरिया की नीतियों में कुछ तर्क नज़र आया है. जब देश को विदेशी मदद की ज़रूरत होती है तो भयंकर बयान शुरु हो जाते हैं.

लेकिन किम जोंग-उन के कामों में उद्देश्य की कमी रही है. फ़ोस्टर-कार्टर कहते हैं, "मैं आपको यह नहीं बता सकता कि उनकी विदेश नीति क्या है. एक क्षण वह रूस जा रहे होते हैं और फिर वह इसे निरस्त कर देते हैं."

उन्होंने दक्षिण कोरिया के साथ सीमा पर मौजूद औद्योगिक क्षेत्र को बिना किसी स्वाभाविक वजह के बंद कर दिया, "उन्होंने केसोंग से कर्मचारियों को वापस बुला लिया. क्यों?"

उत्तरी कोरिया पर बारीक़ नज़र रखने वाले विशेषज्ञ भी किम जोंग-उन के पहले तीन साल के काम से प्रभावित नज़र नहीं आते.

ब्रायन मायर्स दक्षिण कोरिया में बुसान के डोन्गसेओ विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं. वह उत्तरी कोरिया पर लिखी गई किताब 'क्लीनेस्ट रेस' के लेखक भी हैं.

किम जोंग-उन

वह कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि किम जोंग-उन बौद्धिक रूप से अपने पिता के समान हैं. मुझे तो लगता है कि उन्होंने अपनी छवि के प्रबंधन का काम भी बहुत ख़राब ढंग से किया है."

मुश्किल है राह

उत्तर कोरिया में इस मामले पर क्या स्थिति है.

मायर्स कहते हैं, "उत्तर कोरिया में लोग उन्हें उस तरह नहीं देखते जैसे हम देखते हैं, लेकिन वे बेवकूफ़ नहीं हैं. हम जितना सोचते हैं वे उससे ज़्यादा प्रबुद्ध लोग हैं."

"दरअसल वह (किम जोंग-उन) इतने युवा और गंवार हैं और उनका बर्ताव अभिभावक सा कतई नहीं है इसलिए वह लोगों पर उस तरह का प्रभाव पैदा नहीं कर पा रहे जैसा उनके पिता ने किया था."

मायर्स अमरीकी बास्केटबॉल खिलाड़ी डेनिस रोडमैन की यात्रा को एक ग़लती बताते हैं. "किम इल-सुंग और किम जोंग-इल की विदेशियों से मिलती तस्वीरों में विदेशियों को हमेशा झुकते हुए और अपने नेताओं को सीधे खड़े दिखाया जाता है जैसे कि विदेशी महत्वपूर्ण व्यक्ति न हों."

किम जोंग-उन

"किम जोंग-उन के रोडमैन से मिलने के वीडियो में पूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी बेसबॉल कैप और धूप का चश्मा लगाए एक पैर के ऊपर दूसरा रखकर बैठे हैं और कोका-कोला की एक कैन उनके सामने है."

"आप उनके पीछे बैठे लोगों के चेहरों को देखकर यह अंदाज़ लगा सकते हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि हो क्या रहा है."

"जब मैंने उस वीडियो के अंश देखे तो मुझे यह लगा कि शायद, क्योंकि किम जोंग-उन विदेश में पले-बढ़े हैं इसलिए वह आधिकारिक संस्कृति से वाकिफ़ नहीं हैं."

"और आने वाले वक़्त में इससे उन्हें दिक़्क़त होने वाली है."

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