सऊदी अरबः ब्लॉगर को कोड़े मारने की सज़ा

रैफ़ बदावी
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सउदी अरब की शीर्ष अदालत ने ब्लॉगर रैफ़ बदावी को 1,000 कोड़े मारने और 10 साल तक जेल की सज़ा बरक़रार रखी है.

हालांकि दुनिया भर में इसका विरोध किया गया है. कनाडा से उनकी पत्नी एनसाफ़ हैदर ने बीबीसी को बताया कि उन्हें इस बात का डर है कि उनकी सज़ा शुक्रवार से फिर से शुरू हो जाएगी.

बदावी को वर्ष 2012 में 'इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज़रिये इस्लाम का अपमान' करने के आरोपों में गिरफ़्तार किया गया था.

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बढ़ी निराशा

सउदी ब्लॉगर

जनवरी में उन्हें कोड़े मारने की सज़ा के पहले चरण के बाद दुनिया भर में चल रहे विरोध के बीच सऊदी अरब के अधिकारियों ने इस मामले की समीक्षा करने के लिए भेजा है.

बदावी ने चार सालों तक 'लिबरल सउदी नेटवर्क' चलाया जिसने धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर ऑनलाइन बहस प्रोत्साहित किया.

उनकी पत्नी ने बताया कि उन्हें काफी उम्मीद थी कि उनके पति रिहा होने वाले हैं लेकिन उनके पति निराश ही रहें.

रैफ़ बदावी के समर्थक

जब उन दोनों ने तीन दिन पहले बात कि तब बदावी ने उनसे कहा कि वह उम्मीद न करें कि निकट भविष्य में वह घर आ पाएंगे.

वीडियो से बढ़ा विरोध

उनकी पत्नी ने कई देशों और मानवाधिकार समूहों से गुहार लगाई जिन्होंने उनके पति की रिहाई के लिए अभियान शुरू किया.

रैफ़ बदावी की पिटाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

बदावी को जनवरी में पहले 50 कोड़े लगाए गए थे लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया.

बाद में एक मोबाइल वीडियो भी जारी हुआ जिसमें यह नज़र आ रहा है कि बदावी को सुरक्षा बल का एक सदस्य कोड़े लगा रहा है.

रैफ़ बदावी के समर्थक
इमेज कैप्शन, सऊदी अरब में राजनीतिक विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाता है.

इस फ़ुटेज की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया.

हालांकि यह साफ़ नहीं हो पाया है कि बदावी की पिटाई का दूसरा चरण क्यों शुरू नहीं किया गया लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि वह सज़ा के लिए फिट नहीं हैं.

सऊदी अरब में राजनीतिक विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाता और वहां इससे जुड़े क़ानून सख़्त हैं. सऊदी अरब ने सज़ा के ख़िलाफ़ शुरू हुए विरोध को अपने आंतरिक मामलो में दख़ल बताया है.

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