पाकिस्तानः पहली महिला केंद्रीय मंत्री का निधन

बेगम कुलसूम सैफुल्लाह खान, पाकिस्तान
    • Author, नसरीन खटक
    • पदनाम, बेगम कुलसुम सैफ़ुल्लाह की भतीजी
  • प्रकाशित

बेगम कुलसूम सैफुल्लाह ख़ान पाकिस्तान की पहली महिला केंद्रीय मंत्री थीं. उनका 26 जनवरी को 91 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया. कारोबार, सामाजिक कार्य और सियासत सभी में उनका गहरा दखल रहा.

बेगम कुलसूम सैफुल्लाह खान से जुड़ी मेरी यादें पेशावर में उनके घर से शुरू होती हैं. वहां खिलौने बहुत थे और वे हमारे साथ कुछ इस तरह से पेश आईं कि मानो मैं कोई राजकुमारी थी.

मेरी आंटी अपने वक्त में पाकिस्तान की सबसे सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक थीं. 1947 में उन्होंने ऑल पाकिस्तान वुमेंस एसोसिएशन की (एपीडब्लूए) की स्थापना की.

औरतों की तरक्की का ख़्याल

बेगम कुलसूम सैफुल्लाह खान, पाकिस्तान
इमेज कैप्शन, बेगम कुलसूम सैफुल्लाह खान अपनी बहनों के साथ.

उन्हें पाकिस्तान के औरतों की तरक्की का बेहद ख़्याल था. मुझे उनसे बहुत प्रेरणा मिलती थी. मैं राजनीति में जाना चाहती थी और ज़िंदगी और सियासत में मैंने उनसे काफी कुछ सीखा है.

जब मैं एक बार मुश्किल में थी तो उन्होंने कहा था, "तुम्हें मजबूत बनना है. तुम पढ़ी-लिखी हो. अपनी ज़िंदगी बदलो और भविष्य की ओर देखो."

उन्होंने अपनी जिंदगी में भी यही किया था. वे कम उम्र में ही विधवा हो गई थीं और उन्हें पांच बच्चों की परवरिश करनी थी.

ये सब चुनौतियां उन्हें नहीं रोक पाईं. और रोजमर्रा की जिंदगी उनकी वैसी ही जारी रही. दोपहर के वक़्त वे हमेशा टेनिस खेला करती थीं.

पति के देहांत के बाद वे आगे बढ़ीं और बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने सैफ़ ग्रुप की कमान अपने हाथ में ले ली.

बेगम कुलसूम सैफुल्लाह खान की बदौलत ही सैफ़ ग्रुप पाकिस्तान के सबसे कामयाब कंपनियों में से एक है. इस समूह का कारोबारी दखल कई क्षेत्रों में है.

मर्दों का दबदबा

प्रांतीय असेम्बली की पूर्व सदस्य नसरीन खटक
इमेज कैप्शन, नसरीन खटक, बेगम कुलसुम को अपनी प्रेरणा मानती हैं.

मैं उन्हें 'मम्मी' कह कर बुलाती थी लेकिन ऐसा कहने वाली मैं अकेली नहीं थी. उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग भी उन्हें 'मम्मी' ही कहते थे.

संयुक्त राष्ट्र की महासभा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्होंने पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था.

राजनीतिक तौर पर उन्हें दिया जाने वाला सबसे बड़ा पद जनकल्याण मामलों का मंत्रालय था. मर्दों के दबदबे वाले माहौल में रहकर उन्होंने यहां काम किया था.

वो कहा करती थीं, "जब आप असेम्बली में बोलती हैं तो आपके पास सभी तथ्य और आंकड़ें तैयार रहने चाहिए. पूरी जानकारी रखें और अधिकार के साथ बोलें. इससे आपकी बात का असर बढ़ेंगा."

वो पाकिस्तान की सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत थीं.

(नसरीन खटक पाकिस्तान की प्रांतीय विधानसभा की सदस्य रह चुकी हैं.)

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