...तो मोदी भी खुश और इमरान भी खुश

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शनिवार को दिल्लीवासियों ने एयरपोर्ट पर अमरीका पलट मोदी का जबरदस्त स्वागत किया, जैसे कोई हरिद्वार से वापस लौटे.
रविवार को इस्लामाबादवासियों ने इमरान ख़ान का उसी तरह ज़बरदस्त इस्तेकबाल किया जैसे कोई हज करके घर लौटे.
मोदी भी खुश. इमरान भी खुश और उनके समर्थक तो इनसे भी ज़्यादा खुश.
एक भारतीय जनता के लिए अमरीका से हाउडी मोदी का तोहफा लाया तो दूसरा संयुक्त राष्ट्र में अपनी कश्मीर वाली तकरीर जेब में डाल कर लाया.
दोनों तरफ से दावा हुआ हमारा नेता जीत गया. क्या जीत गया ये पता नहीं. बस जीत गया.
भारतीय टीवी चैनल्स देखो तो लगता है दुनिया में सिवाए हाउडी मोदी के इस वक्त कोई चर्चा नहीं.
इस बार मोदी ने अमरीका और संयुक्त राष्ट्र में वो कर दिखाया जो नेहरू से मनमोहन सिंह तक कोई न कर पाए.
नेहरू ऐसा क्या न कर सके जो मोदी ने कर दिया, ये कोई नहीं बता रहा. बस कर दिया. बस हो गया. क्या ये काफी नहीं?
यही हाल पाकिस्तानी गोदी मीडिया का भी है. सौ में से 95 चैनल्स खोलें तो लगता है कश्मीर का मसला जैसा इमरान ख़ान ने पूरे विश्व को समझा दिया है, वैसा जिन्ना साहब से लेकर नवाज़ शरीफ तक कोई न समझा सका.

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ऐसा क्या नया इमरान ख़ान ने कह दिया जो लियाकत अली ख़ान का भारत को दिखाया जाने वाला मुक्का और जुल्फिकार अली भुट्टो का हज़ार साल तक जंग लड़ें वाला नारा भी न समझा सका.
बस समझा दिया. समझा दिया. ज्यादा बकबक नहीं.
दोनों ओर जिस तरह मोदी और इमरान ख़ान के मंत्री और समर्थक और गज़-गज़ भरकर सलाम करने वाला मीडिया पानी में मधानी चलाकर इसे लस्सी बताने की कोशिश कर रहा है.
इस पर मुझे वो वाकया याद आ रहा है जब एक साइंस टीचर ने बच्चों से कहा कि कल हर बच्चा कोई अद्भुत चीज बनाकर लाएगा.
अगले दिन एक बच्चा टायर की चप्पल बनाकर लाया. एक बच्चा टूटे हुए बल्ब की किरचियों से गांधी जी की तस्वीर बनाकर लाया. एक बच्चा कार्ड बोर्ड से रंगदार अंतरिक्ष रॉकेट बना लाया. इन सबकी बहुत वाह वाह हुई.
एक बच्चा कोने में बैठा था. टीचर ने पूछा आप क्या लाए हो. उसने लकड़ी का छोटा सा पहिया बस्ते से निकालकर सामने रख दिया.
टीचर ने पूछा इसमें अद्भुत क्या है. ऐसा पहिया तो आठ हज़ार वर्ष से हम सब देख रहे हैं. बच्चे ने तुरंत कहा आप आठ हज़ार वर्ष से जरूर देख रहे होंगे पर सर ये वाला पहिया मैंने खुद बनाया है.

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लड़ा होगा जिन्ना से लेकर नवाज़ शरीफ तक कश्मीर का मुकदमा हर किसी ने, पर ये मुकदमा इमरान ख़ान ने तो पहली बार लड़ा है.
हुआ होगा भारी स्वागत नेहरू का अमरीका में पर मोदी जी का तो पहली बार हुआ है ना. इसलिए इस कारनामे पर वाह-वाह तो बनती है.
वो डॉयलॉग तो आप सबने सुना ही होगा, जहां हम खड़े हो जाएं लाइन वहीं से शुरू होती है.
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