पाकिस्तान में महंगाई की मार से सबसे ज़्यादा कौन परेशान?

शमून मसिह
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    • Author, शुमाएला जाफ़री
    • पदनाम, इस्लामाबाद से, बीबीसी संवाददाता
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वह गर्मियों की एक आम सुबह थी. शमून मसिह अपने हाथों से रज़ाई सिल रहे थे. रजाई की रुई फर्श पर बिखरी पड़ी थी. उनका सिर नीचे की ओर छुका हुआ था और हाथ तेज़ी से चल रहे थे.

इसी रज़ाई के दूसरे सिरे पर शमून का भाई सिलाई कर रहा था. शमून कभी-कभी अपना सिर उठाते और भाई से बातचीत करते. शमून का यह पार्टटाइम काम था. असल में वो पाकिस्तानी सेना के साथ पेंटर के तौर पर काम करते हैं.

वो इसी तरह से और भी छोटे-छोटे काम करते हैं.

शमून कहते हैं, ''बच्चे हमेशा किसी ना किसी चीज़ की मांग करते रहते हैं. अगर मेरी जेब ही खाली रहेगी तो मैं उन्हें वो चीज़ें कैसे दे पाउंगा.''

शमून की बेटी अब स्कूल जाने लायक हो चुकी है, लेकिन शमून अभी तक उसका स्कूल में दाखिला नहीं करवा सके क्योंकि उनके पास स्कूल फीस भरने लायक पैसे नहीं हैं.

वो बताते हैं, ''बिजली, गैस, पेट्रोल सबकुछ महंगा है. मुझ जैसे माता-पिता ही इस बात को समझ सकते हैं कि बच्चों को स्कूल में ना भेजना का दर्द कैसा होता है.''

शमून अपनी बात रखते हैं, ''डॉलर लगातार ऊपर बढ़ रहा है, वह 141 रुपए का हो चुका है. लोग बता रहे हैं कि वह 150 रुपए तक पहुंच जाएगा. मैं पहले से ही तीन नौकरियां कर रहा हूं फिर भी परिवार की ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहा.''

शमून मसिह
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महंगाई की मार

बीते कुछ महीनों से पाकिस्तान में महंगाई की दर तेज़ी से बढ़ी है. सिर्फ़ एक साल के भीतर ही पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले 23 प्रतिशत नीचे गिरा है. लोगों को महसूस हो रहा है कि आने वाले दो सालों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान पाकिस्तान की खस्ता होती अर्थव्यवस्था के प्रति कड़ा रुख अपना सकते हैं.

हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट जिसका शीर्षक 'साउथ एशिया इकॉनोमिक फ़ोक- एक्सपोर्ट वॉन्टेड' था, में अनुमान लगाया गया था कि पाकिस्तान में मौजूदा वित्तीय वर्ष में औसत महंगाई दर 7.1 प्रतिशत तक बढ़ सकती है और अगले साल यह दर 13.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

ज़ाफ़रा मुस्तफा एक सिंगल मदर हैं. इस्लामाबाद के अपने घर में वो एक छोटा सा बिजनेस करती हैं. दरअसल वो घर में बना खाना बेचती हैं.

ज़ाफ़रा कहती हैं कि महंगाई ने उनके काम पर बहुत असर डाला है.

ज़ाफ़रा मुस्तफा
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वो अपने नुकसान के बारे में बताती हैं, ''जो लोग हफ़्ते में तीन बार खाना खरीदते थे वो अब दो बार ही खरीद रहे हैं. लोगों ने खाने की पसंद भी बदल दी है. महंगी चीज़ों से बना खाना जैसे पनीर आदि को लोग नहीं खरीदते.''

ज़ाफ़रा मानती हैं कि अगर सरकार ने ज़रूरी कदम नहीं उठाए तो उनका छोटा सा कारोबार बंद हो जाएगा.

वो बोलती हैं, ''मध्यम व्यापारी, मध्यमवर्ग के लोग और लघु उद्योग वाले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती गई तो छोटे व्यापारी इसे झेल नहीं पाएंगे.''

''बहुत सी महिलाएं छोटे-छोटे बिजनेस चला रही हैं. उनके पास बहुत मजबूत आर्थिक सहयोग नहीं होता. वो अपनी बचत पर ही निर्भर रहती हैं. लेकिन ताज़ा हालात में ये बचत खत्म होती जा रही है.''

ज़ाफ़रा मुस्तफा
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पाकिस्तान पर कर्ज़

विश्व बैंक की रिपोर्ट ने एक और बात सामने रखी है कि दिसंबर 2018 के अंत तक पाकिस्तान की जनता का कर्ज़ उसकी जीडीपी का 73.2 प्रतिशत तक पहुंच चुका था और इस साल तक यह 82.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. जो कि बीते 17 साल में सबसे ऊंचा स्तर होगा.

खराब आर्थिक रणनीतियों के चलते इमरान ख़ान सरकार की लगातार आलोचना हो रही है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी ने वित्त मंत्री असद उमर को पिछले हफ़्ते उनके पद से हटने के लिए कह दिया गया.

अब सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से बेलआउट पैकेज प्राप्त करने की कोशिश कर रही है. लेकिन देश के अर्थशास्त्री मानते हैं कि आईएमएफ़ के साथ होने वाली यह डील इतनी आसान नहीं रहेगी.

पाकिस्तानी मुद्रा

देश के जानेमाने अर्थशास्त्री डॉ. तलत अनवर मानते हैं कि आईएमएफ के साथ होने वाली डील से आम लोगों की समस्याएं और बढ़ जाएंगी.

वो कहते हैं, ''अगर आईएमएफ़ ने अपनी शर्तें रखते हुए पाकिस्तानी मुद्रा का मूल्य घटा दिया तो दिन प्रतिदिन चीजों की कीमतें बढ़ने लगेंगी. और अगर आईएमएफ़ ने सरकार से ब्याज़ दरें बढ़ाने के लिए कह दिया तो निवेश और धीमा हो जाएगा. पहले से ही देश में ब्याज़ दरें 10.75 प्रतिशत हैं.''

डॉ. तलत मानते हैं कि निवेश में कमी होती है तो विकास दर के साथ साथ रोजगार भी कम हो जाएगा.

अर्थशास्त्री डॉ. तलत अनवर
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चीन का सहारा

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था महज़ 3.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, इसके अगले साल तक और धीमा होकर 2.7 प्रतिशत तक गिरने की संभावनाएं हैं.

ऐसे हालात हैं, पाकिस्तान के लिए चीन का सहारा और ज़्यादा बढ़ जाएगा. पाकिस्तान पहले से ही चीन सहारे अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान एक बार फिर बीजिंग का दौरा करने वाले हैं.

पिछले साल अगस्त में सत्ता पर आने के बाद से यह उनका दूसरा चीन दौरा होगा. उम्मीद की जा रही है कि इमरान ख़ान वहां बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव फ़ोरम में भाषण दे सकते हैं, जिसमें 40 देशों के नेता शामिल रहेंगे.

इसके अलावा इमरान ख़ान चीन के साथ कई व्यापारिक सौदे भी कर सकते हैं. चीन के महत्वपूर्ण बेल्ट एंड रोड परियोजना में चीन एक महत्वपूर्ण हिस्साधरक है. पाकिस्तान को भरोसा है कि चीन अपनी इस परियोजना से पाकिस्तान की बीमार अर्थव्यवस्था को सुधार देगा.

लेकिन इसके बीच सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान-चीन आर्थिक कोरिडोर ही पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियों के तमाम सवालों का एकमात्र जवाब है?

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