पाक उर्दू प्रेस- बीजेपी पाक विरोधी और मुसलमानों की दुश्मन: इमरान ख़ान

इमरान ख़ान
    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का इमरान ख़ान के नाम एक ख़त और इमरान ख़ान का एक इंटरव्यू सुर्ख़ियों में रहा.

सबसे पहले बात अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़त की.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि कर दी ही कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को एक ख़त लिखा है.

अख़बार के व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ने इस बात की तो पुष्टि कर दी है कि ट्रंप ने इमरान ख़ान को एक ख़त लिखा है, लेकिन ख़त में क्या लिखा है इसकी कोई ख़ास जानकारी नहीं दी है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि ट्रंप ने इमरान ख़ान से अपील की है कि वो अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पूरा सहयोग दें. प्रवक्ता के अनुसार ट्रंप ने अपने ख़त में लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तानी मदद पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों के लिए बुनियादी अहमियत रखती है और पाकिस्तान में वो सामर्थ्य है कि वो अपनी धरती पर तालिबान के ठिकाने न बनने दे.

इमरान ख़ान

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत ज़िलमे ख़लीलज़ाद ने इमरान ख़ान से मुलाक़ात की.

ख़लीलज़ाद ने अमरीकी राष्ट्रपति का संदेश देते हुए इमरान ख़ान से कहा कि अफ़ग़ानिस्तानी संकट के सियासी हल के ज़रिए पूरे क्षेत्र में शांति बहाल करने के साझे उद्देश्य को हासिल करने के लिए अमरीका पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करना चाहता है.

अख़बार लिखता है कि इमरान ख़ान ने ट्रंप के इस ख़त का स्वागत किया है.

अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इमरान ख़ान के रवैये की जमकर तारीफ़ की. क़ुरैशी ने कहा कि इमरान ख़ान पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति से दो टूक बात की.

अमरीकी राष्ट्रपति के ख़त का ज़िक्र करते हुए अख़बार लिखता है, "राष्ट्रपति ट्रंप ने एक साल पहले ही दक्षिण एशिया को लेकर अपनी नीति स्पष्ट कर दी थी, लेकिन अब हमें 'डू-मोर डू-मोर' कहने वालों ने ही हम से मदद मांग ली है."

डोनल्ड ट्रंप

इस मौक़े पर शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान अपनी भूमिका निभाएगा.

उन्होंने कहा कि वो 15 दिसंबर को काबुल जा रहे हैं जहां चीन और अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रियों से मुलाक़ात करेंगे.

इमरान ख़ान ने अमरीका के अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट को इसी हफ़्ते एक इंटरव्यू दिया है. पाकिस्तान के सभी अख़बारों में उस ख़ास इंटरव्यू की चर्चा हो रही है.

अख़बार जंग ने इमरान के उस इंटरव्यू के हवाले से हेडिंग लगाई है, "पाकिस्तान अब किराए की बंदूक़ नहीं बनेगा. अमरीका से चीन जैसा संबंध चाहते हैं."

इसी इंटरव्यू के हवाले से अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, "किसी के सामने झुकेंगे नहीं. न किराए के क़ातिल हैं, न अमरीका के बंदूक़. बनेंगे."

अफ़गानिस्तान सुरक्षाबल

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार वॉशिंगटन पोस्ट की संवाददाता से लंबी बातचीत के दौरान इमरान ख़ान ने कहा कि वो अमरीका से बराबरी के आधार पर संबंध रखना चाहते हैं.

इमरान ख़ान का कहना था, "सुपरपावर के साथ संबंध कौन नहीं रखना चाहेगा लेकिन अमरीका के साथ चीन जैसे संबंध चाहते हैं. अमरीका की जंग लड़ते हुए पाकिस्तान ने बहुत ज़्यादा नुक़सान उठाया है. अब हम वो करेंगे जो हमारे लोगों के हक़ में बेहतर होगा."

इसी इंटरव्यू के दौरान इमरान ख़ान ने कहा कि ट्रंप ने आरोप लगाए हैं कि "पाकिस्तान की धरती पर तालिबान चरमपंथी सक्रिय हैं लेकिन सच्चाई ये है कि पाकिस्तान की धरती पर तालिबान का कोई पनाहगाह नहीं है"

इमरान ख़ान ने कहा कि अमरीका ने हमेशा ही पाकिस्तान पर तालिबान चरमपंथियों का समर्थन करने के आरोप लगाए हैं लेकिन सुबूत कभी पेश नहीं किया.

इमरान ने कहा कि उन्होंने ट्रंप के ख़त का जवाब दे दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण अफ़ग़ानिस्तान हमेशा से ही पाकिस्तान के हक़ में है और अफ़ग़ानिस्तान के अंदर शांति बहाल करने के लिए पाकिस्तान हर संभव प्रयास करेगा.

इमरान ख़ान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी जंग में शामिल होने के लिए पाकिस्तान को कहा गया, जिसका 9/11 से कोई लेना देना नहीं था.

शाह महमूद कुरैशी

इमरान का कहना है, "अगर हम इस जंग में न पड़ते तो ख़ुद को तबाही से बचा सकते थे. दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ अमरीका की जंग में शामिल होने से पाकिस्तान को 150 मिलियन डॉलर का नुक़सान हुआ और हमने 80 हज़ार लोगों की जान गंवाई है."

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार जब इमरान ख़ान से भारत के संबंध में प्रश्न पूछा गया तो उनका जवाब था, "भारत में सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी पाकिस्तान विरोधी और मुसलमानों की दुश्मन है. भारत में आम चुनाव होने वाले हैं इसीलिए दोस्ती की हमारी कोशिशों को रद्द किया जा रहा है."

मुंबई हमलों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में इमरान ख़ान का कहना था, "मैंने अपने अधिकारियों से मुंबई हमलों का स्टेटस देखने को कहा है. इस केस का हल होना ख़ुद हमारे हक़ में है क्योंकि ये दहशतगर्दी का अमल था."

ऑडियो कैप्शन, रेहाम ख़ान की नज़रों में इमरान ख़ान

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