अमरीका ने फ़लस्तीनियों को बातचीत न रोकने की चेतावनी दी

ट्रंप की ग्रैफ़िटी के सामने बच्चे
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अमरीका ने फ़लस्तीनियों को चेतावनी दी है कि उसे अमरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेन्स के साथ बातचीत नहीं रोकनी चाहिए.

माइक पेन्स इस महीने के आख़िर में फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मिलने वाले हैं. अमरीका के मुताबिक़ अगर फ़लस्तीनियों ने बातचीत से पीछे हटने का फ़ैसला किया तो उसका नतीजा उल्टा होगा.

प्रदर्शनकारी
इमेज कैप्शन, ट्रंप के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते लोग

फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन, 31 घायल

इससे पहले ग़ज़ा पट्टी और इसराइली कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में यरूशलम को इसराइल की राजधानी मानने के डोनल्ड ट्रंप के फ़ैसले के बाद विरोध प्रदर्शन किए गए.

प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक झड़पों में 31 फ़लस्तीनी नागरिक ज़ख़्मी हो गए.

दुनिया के कई नेताओं ने ट्रंप के घोषणा की आलोचना की थी. उनका कहना था कि अमरीका ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी नीति बदल दी है.

वेस्ट बैंक में हज़ारों की संख्या में फ़लस्तीनी नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किए और सड़कों पर निकल आए. इसराइल ने स्थिति पर काबू पाने के लिए सैकड़ों अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया है.

विरोध प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, जॉ़र्डन में अमरीकी दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन

हमास ने जन आंदोलन की अपील की

प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों के टायरों में आग लगाई और सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके. जवाबी कार्रवाई में इसराइली सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां और फ़ायरिंग की.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ग़ज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी नागरिकों ने सीमा पार तैनात इसराइली सैनिकों के ऊपर पत्थर फेंके. इसराइली सैनिकों ने जवाब में गोलियां चलाईं.

अमरीका के कई क़रीबी सहयोगियों ने कहा है कि वो राष्ट्रपति ट्रंप के इस फ़ैसले से सहमत नहीं हैं.

जल्द ही इसराइल और फलीस्तीन की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अरब देशों के लीग के साथ मुलाक़ात होने वाली है. बैठक में आगे की रणनीति के बारे में विचार किया जाएगा.

आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप की घोषणा के बाद इलाके में व्यापक स्तर पर हिंसा बढ़ सकती है. फ़लस्तीनी इस्लामी समूह हमास पहले ही इंतेफ़ादा यानी जन आंदोलन के लिए अपील कर चुका है.

विरोध प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, पॉपुलर फ़्रंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ पैलेस्टाइन के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान अमरीकी और इसराइली झंडो़ं में आग लगाई

क्यों किया ट्रंप ने अमरीकी विदेश नीति में बदलाव?

बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें लगता है कि "वक्त आ गया है जब यरूशलम को आधिकारिक तौर पर इसराइल की राजधानी के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए."

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अमरीकी हितों के लिए और इसराइल और फ़लस्तीन के बीच शांति स्थापित करने के लिए ऐसा करना बेहतर होगा."

ट्रंप का कहना था कि वो अमरीकी विदेश मंत्रालय से कहेंगे कि वो तेल अवीव से अमरीकी दूतावास हटा कर उसे यरूशलम में स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करे.

बताया जा रहा है कि इस तरह के किसी भी फ़ैसले से इलाके में अशांति फैलने की चेतावनी के बावजूद ट्रंप के अतिवादी समर्थक उनके इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं.

इस फ़ैसले के साथ ट्रंप अपने एक चुनावी वादे को भी पूरा कर रहे हैं.

विरोध प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, तुर्की के शहर इस्तांबुल में अमरीकी दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शनों के दौरान फ़लस्तीनी झंडे देखने को मिले. यहां हज़ारों लोगों ने ट्रंप के फ़ैसले के विरोध में नारे लगाए.

ट्रंप के चुनावी वादों में से एक था यरूशलम

ट्रंप ने अपने चुनावी वादे में कहा था कि सत्ता में आने के बाद वो अमरीकी दूतावास को यरूशलम में स्थानांतरित करेंगे.

इस सप्ताह ट्रंप ने कहा था "यरूशलम को इसराइल की राजधानी मानना वास्तविकता को स्वीकार करने जैसा है" और "ऐसा करना सही है".

विरोध प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, लंदन में आज़ाद फ़लस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किए गए

इसराइल-फ़लस्तीन को ही निकालना होगा समाधान

ट्रंप का कहना था कि वो द्वि-राष्ट्र समाधान के पक्ष में हैं जो कि आखिरी समाधान की तरफ़ एक कदम होगा. उनका कहना था कि "यदि दोनों पक्ष इस बात को मान लें" तो इसके साथ 1967 से पहले युद्धविराम के वक्त वेस्ट बैंक, ग़ज़ा पट्टी और पूर्वी यरूशलम के लिए बनाई गई उन सीमाओं के अनुसार एक नए और आज़ाद फ़लस्तीन का जन्म होगा जो इसराइल के साथ शांति से एक पड़ोसी की तरह रह सकेगा.

ट्रंप ने अपनी घोषणा में यरूशलम का वर्णन "अखंड और अविभाजित राजधानी" के रूप में नहीं किया. फ़लस्तीनी दावा करते हैं कि पूर्वी यरूशलम भविष्य के फ़लस्तीन की राजधानी बनेगा.

विरोध प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, वेस्ट बैंक के शहर नाबलुस में इसराइली सेना के वॉ़टर कैनन वाहन पर फ़लस्तीनी नागरिकों ने पत्थर फेंके

यरूशलम इतना अहम क्यों है?

इसराइल और फ़लस्तीनियों के लिए यरूशलम बहुत महत्वपूर्ण जगह है. इस एक जगह पर तीन एकेश्वरवादी धर्म यानी यहूदी, इस्लाम और ईसाई से जुड़े महत्वूर्ण स्थान हैं.

यरूशलम पर इसराइल के आधिकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी स्वीकार नहीं किया गया और सभी देशों ने अपने दूतावास तेल अवीव में ही बनाए हैं.

वीडियो कैप्शन, यरुशलम पर क्यों है विवाद?

1967 के युद्ध के छठे दिन की लड़ाई के बाद इसराइल ने पूर्वी यरूशलम (जिसमें पुराना शहर शामिल है) को अपने कब्ज़े में कर लिया था.

इसराइल ने शहर को अपनी अविभाज्य राजधानी घोषित कर दिया था.

1993 में हुइ इसराइल-फ़लस्तीन शांति समझौते के अनुसार शांति वार्ता के आगे बढ़ने के बाद ही यरूशलम की स्थिति का फैसला लिया जाना है.

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