सऊदी अरब में इन तीन घटनाओं से आया राजनीतिक भूकंप

साद हरीरी
इमेज कैप्शन, लेबनन के प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ते हुए साद हरीरी ने ख़ुद के लिए जान का ख़तरा बताया
    • Author, लिस डुसेट
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में यह बड़ी राजनीतिक घटनाओं और लंबी दूरी की मिसाइलों वाली रात थी, जिसने पूरे मध्य पूर्व को हिलाकर रख दिया और भविष्य को लेकर अनिश्चितताएं पैदा कर दीं.

शनिवार को सऊदी अरब की राजधानी में तीन बड़ी घटनाएं हुईं, जिनका आपस में कोई रिश्ता नहीं था, लेकिन कुल मिलाकर यह एक बड़ा परिवर्तन था.

ख़ास तौर से ऐसे समय में जब सऊदी अरब और अमरीका समेत उसके बाकी सहयोगी अपने पक्के प्रतिद्वंद्वी ईरान के ख़िलाफ़ अभूतपूर्व आवाज़ बुलंद कर रहे थे.

लेबनान के प्रधानमंत्री का इस्तीफा

मध्य-पूर्व के लिए पहली और सबसे विस्फोटक घटना थी, रियाद से साद अल-हरीरी का चौंकाने वाला ऐलान कि वह लेबनान के प्रधानमंत्री का पद छोड़ रहे हैं. जानकारों का कहना है कि उन्हें बेरुत से समन किया गया था और फिर सऊदी सहयोगियों ने उन्हें पदमुक्त कर दिया गया.

साद अल-हरीरी के टीवी संबोधन पर अरब सरकार के एक मंत्री ने कहा, "यह उनकी अपनी भाषा नहीं थी."

हिज़बुल्लाह नेता
इमेज कैप्शन, हिज़बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह ने सऊदी अरब पर हरीरी को पद छोड़ने के लिए मज़बूर करने का आरोप लगाया

हरीरी परेशान दिख रहे थे. उन्होंने अपने ही देश में जान का ख़तरा होने की बात कही. उन्होंने 'अव्यवस्था और विनाश' फैलाने के लिए ईरान पर आरोप भी लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान का लेबनानी सहयोगी हिज़बुल्लाह राज्य के भीतर एक और राज्य बना रहा है.

रिमोट के ज़रिये जिन मिसाइलों की दिशा तय करने की ज़रूरत नहीं पड़ती, उनका ज़िक्र करते हुए बेरुत के कार्नेगी मिडल ईस्ट सेंटर से जुड़े सीनियर असोसिएट यज़ीद सयख़ी कहते हैं, "सऊदी अरब की ओर से छोड़ी गई यह 'फायर एंड फॉरगेट मिसाइल' थी."

इसका मुख्य निशाना लेबनान नहीं, बल्कि ईरान था, जिसे सऊदी अरब क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए ज़िम्मेदार मानता है.

लेकिन इस राजनीतिक प्रक्षेपण ने पहले लेबनान को ही हिलाकर रख दिया. हिज़बुल्लाह और हरीरी के सुन्नी धड़े की शुमारी वाली लेबनन की संतुलित सरकार गिर गई.

फिर आई असली मिसाइल

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
इमेज कैप्शन, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

लेकिन हरीरी के ऐलान के कुछ घंटों बाद पता लगा कि यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से छोड़ी गई एक असली लंबी दूरी की मिसाइल रियाद के किंग ख़ालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के क़रीब आ चुकी थी, लेकिन इसे लक्ष्य से पहले नष्ट कर दिया गया. मिसाइल के कुछ टुकड़े एयरपोर्ट परिसर में गिर गए और कोई हताहत नहीं हुआ.

लेकिन इसने अपनी सीमाओं के भीतर ईरान की पहुंच को लेकर सऊदी अरब का डर और बढ़ा दिया.

अरब फाउंडेशन के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अली शिहाबी मानते हैं कि यह मिसाइल सिर्फ शुरुआत है. वह कहते हैं, "अगर अभी जैसी स्थिति छोड़ दी गई तो आने वाले पांच साल में 40 हज़ार मिसाइलें रियाद से टकराएंगी."

तीसरी घटना

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
इमेज कैप्शन, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

तीसरा राजनीतिक बम आधी रात को फूटा. सऊदी अरब में दर्जनों राजकुमारों, अरबपति और पूर्व मंत्रियों को या तो गिरफ़्तार कर लिया गया या बर्ख़ास्त कर दिया गया.

32 वर्षीय क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का नए सऊदी अरब में सत्ता पर नियंत्रण मज़बूत करने की दिशा में यह एक साहसी फ़ैसला था.

भविष्य के शाह के इस फैसले पर एक अरब अधिकारी ने कहा, "इसका संदेश था कि कोई क़ानून से ऊपर नहीं है. बल्कि साफ-साफ कहें तो कोई उनके क़ानून से ऊपर नहीं है."

सऊदी सूत्रों का कहना है कि साद हरीरी को लेकर सऊदी की बेचैनी बीते कुछ वर्षों से बढ़ रही थी, क्योंकि वह लेबनान की सरकार पर हिज़बुल्ला के प्रभुत्व को कम नहीं कर पा रहा था.

अली शिहाबी कहते हैं, "हरीरी ने अपने प्रयासों से हिज़बुल्ला के प्रभुत्व वाले राज्य पर सम्मान की परत चढ़ाना शुरू कर दिया था."

और फिर हरीरी की विलायती से मुलाक़ात

हरीरी और विलायती की मुलाक़ात
इमेज कैप्शन, हरीरी और विलायती की मुलाक़ात

रही सही कसर संभवत: शुक्रवार को पूरी हो गई जब हरीरी ने शुक्रवार को बेरुत में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़मैनी के वरिष्ठ सलाहकार अकबर विलायती से मुलाक़ात की.

विलायती ने लेबनन की गठबंधन सरकार की तारीफ़ की और इसे लेबनान और ईरान दोनों देशों के मीडिया में प्रमुखता से जगह मिली. इसके थोड़ी ही देर बाद उनके एक करीबी सहयोगी के मुताबिक, उनकी परेशानी बढ़ गई थी.

इनमें से एक ने कहा, "उन्होंने हमसे शुक्रवार और शनिवार के उनके सारे कार्यक्रम रद्द करने को कहा और फिर वो चले गए."

लेकिन आगे क्या होगा?

इस्तीफ़ा देने के अगले दिन सऊदी अरब के शाह सलमान से मिले हरीरी
इमेज कैप्शन, इस्तीफ़ा देने के अगले दिन सऊदी अरब के शाह सलमान से मिले हरीरी

यज़ीद सयख़ी कहते हैं, "सऊदी अरब ने लेबनान में कुछ शुरू तो किया है लेकिन वहां सत्ता के ध्रुवों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है."

एक अनुभवी पश्चिमी राजनयिक ने इन संभावित घटनाओं का ज़िक्र किया- सऊदी बैंकों में जमा रकम का वापस लिया जाना, व्यापार पर पाबंदी और लेबनन की सेना की ओर से कार्रवाई, जिसे हिज़बुल्ला को नियंत्रित रखने के मक़सद से अमरीका और ब्रिटेन प्रशिक्षण वगैरह में सहयोग देते रहे हैं.

पिछले महीने ही अमरीकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने ईरान पर दबाव बनाने के राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों के क्रम में हिज़बुल्ला पर नए प्रतिबंधों की बात की.

अमरीका और इसरायल पर भी नज़रें

हिज़बुल्लाह
इमेज कैप्शन, हिज़बुल्लाह सीरिया के गृह युद्ध में राष्ट्रपति बशर अल असद की सेनाओं के साथ लड़ रहा है

ये उपाय अभी कानून के तौर पर सामने नहीं आए हैं. लेकिन इसमें यूरोपीय संघ से यह अपील करने का प्रस्ताव भी है कि हिज़बुल्लाह के सैन्य अंग के साथ उसकी राजनीतिक शाखा को भी आतंकी संगठन घोषित किया जाए.

नज़रें इसरायल पर भी हैं, जो ईरान से तनाव में सऊदी और अमरीका का साझेदार है.

पिछले हफ़्ते लंदन के एक आधिकारिक दौरे पर इसरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान पर तुरंत कार्रवाई करने की ज़रूरत है जो सीरिया को एक और लेबनान बनाने की कोशिश कर रहा है.

अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद प्रत्येक पक्ष के हर क़दम पर सबकी निगाहें हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)