ज़िद कर रहे हैं क़तर के अमीर तमीम बिन: अरबी मीडिया

क़तर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी
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क़तर संकट सुलझने के मुक़ाबले लगातार उलझता जा रहा है. दोनों पक्षों की तरफ़ से जो बयान आते हैं उनसे कलह को और हवा मिलती है.

21 जुलाई को क़तर के अमीर (कमांडर, जनरल या राजकुमार) तमीम बिन हमद अल थानी ने वर्तमान संकट पर पहली बार बोला था.

क़तर से पिछले महीने पांच जून को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिस्र ने राजनयिक और व्यापार संबंध ख़त्म कर लिए थे. इन चार देशों ने क़तर से जल, ज़मीन और हवाई सभी मार्गों से संपर्क तोड़ने की घोषणा की थी.

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
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क़तर अब भी इन देशों से अलगाव झेल रहा है. सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिस्र का कहना है कि क़तर आतंकवाद का समर्थन कर रहा है और ईरान से अपना संबंध मजबूत कर रहा है.

21 जुलाई को क़तर के अमीर तमीन बिन ने पहली बार इस संकट पर बोला तो खाड़ी देशों के मीडिया में उनके बयान को प्रमुखता से जगह मिली.

क़तर के मीडिया में तमीम बिन के बयान की प्रशंसा की गई वहीं अरबी भाषा के अख़बारों में उनके बयान की निंदा हुई. अरबी मीडिया ने क़तर के अमीर के बयान को बेकार और असंतुलित बताया है.

सऊदी अरब

सऊदी अख़बार ओकाज़ ने लिखा है, ''क़तर के अमीर के भाषण से नाउम्मीदी बढ़ी है. इस संकट से निपटने के लिए जो क़तर के अमीर से उम्मीद की जा रही थी वैसा उन्होंने कुछ भी नहीं बोला. उन्होंने क़तर की जिद और हठ को ही सही ठहराया है. वह तानाशाह के अंदाज़ में दिख रहे हैं.''

अख़बार ने लिखा है कि तमीम बिन हमद क़तर की जिद का ही प्रतिनिधित्व करते दिखे. अख़बार ने लिखा है कि वह बातचीत के ज़रिए संकट को सुलझाने की पेशकश तो कर रहे हैं, लेकिन सऊदी अरब के साथ 2013 में हुए समझौतों का उल्लंघन कर रहे हैं.

खाड़ी के इस अख़बार ने लिखा है कि तमीम का बयान अस्थिर और सच से भागने वाला था. अख़बार ने लिखा है कि उनके बयान में संकट से बाहर निकलने की प्रतिबद्धता नहीं है और इससे भ्रम ही बढ़ा है.

अख़बार ने अपनी संपादकीय में लिखा है, ''चारों देश चाहते हैं कि क़तर आतंकवाद के मसले पर कुछ ठोस करे लेकिन अमीर के बयान में ऐसा कुछ दिखा नहीं.''

सऊदी अरब

इसी तरह बहरीन गल्फ़ न्यूज़ ने लिखा है कि अमीर के भाषण में कुछ भी नया नहीं है जबकि वह इस संकट पर पहली बार बोलने सामने आए थे.

क़तर के अमीर ने अरब की मांगों को ख़ारिज कर दिया है. क़तर इन देशों से सशर्त बातचीत के लिए तैयार है.

मिस्र के अख़बार अल-अहराम मोहम्मद साद ने लिखा है, ''क़तर के अमीर ने संकट को सुलझाने के संदर्भ में कुछ भी नहीं कहा. उनका भाषण पूरी तरह असंतुलित था और अहम मुद्दों से बचने की कोशिश थी. एक तरफ़ क़तर बातचीत की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ़ वह पश्चिम के देशों और तुर्की से संबंधों को बढ़ा रहा है. इसके साथ ही अमीर ईरान के साथ अपने संबंधों के मसले पर खामोश रहे.''

दूसरी तरफ़ क़तर के अख़बारों ने तमीम बिन के भाषण की प्रशंसा की है.

क़तर के मीडिया का कहना है कि अमीर के भाषण से साजिशों का पर्दाफाश हुआ है और उन्होंने बातचीत का दरवाज़ा भी खुला रखा है. क़तर के मीडिया में इस बात को रेखांकित किया गया है कि वर्तमान संकट संप्रभुता, सुरक्षा और स्थिरता के ख़िलाफ़ साजिश है.

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