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भारत की वजह से धड़केगा ये पाकिस्तानी दिल
भारत में पकिस्तान के जिस चार महीने के बच्चे का इलाज चल रहा था, वो अब घर जाने की तैयारी में है.
दो महीने की उम्र में लाहौर के रोहान कंवल सिद्दीक़ को डॉक्टरों ने कुछ दिन का मेहमान बताया था, क्योंकि उनके दिल में छेद था.
पाकिस्तान में जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया तब उनके परिवार ने भारत में इलाज कराने की सोची.
कंवल सिद्दीक़ बताते हैं कि उनके बड़े भाई ने भारत के कुछ बड़े डॉक्टरों के बारे में बताया तो थोड़ी उम्मीद बंधी.
दबाव
उन्होंने बताया, "जब हमें पता चला कि बेटे का इलाज भारत में संभव है तो बड़ी उम्मीद बंधी. लेकिन जल्द ही समझ आ गया कि वीज़ा नियम इतने कड़े हो चुके हैं कि शायद हमारा बच्चा इलाज से वंचित रह जाए".
ये बात इसी वर्ष के मई महीने की है, जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव बढ़ा हुआ था और कूटनीतिक संबंध दबाव में थे.
पाकिस्तान में कथित तौर पर जासूसी के आरोप में पकड़े गए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की सज़ा पर भी तनाव बढ़ा हुआ था.
हताश होते रोहान के पिता के एक दोस्त ने उन्हें भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद की गुहार लगाने की सलाह दी थी.
सुषमा की मदद
नोएडा के एक बड़े निजी अस्पताल में पत्नी के साथ वापस जाने की पैकिंग कर रहे कंवल सिद्दीक़ भावुक हो उठते हैं.
उन्होंने कहा, "मैंने ट्विटर अकाउंट खोला और सुषमा स्वराज जी से मदद मांगी. उम्मीद ही नहीं थी कि एक आम आदमी की मदद हो सकेगी. उन्होंने तुरंत आश्वासन दे दिया."
जून महीने के पहले हफ़्ते में भारत ने रोहान और उसके माता-पिता को चार महीने का मेडिकल वीज़ा दे दिया था.
सफल ऑपरेशन
भारत में रोहान के जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले ह्रदय चिकित्सकों में से एक डॉक्टर आशुतोष मारवाह भी हैं.
उन्होंने बताया, "रोहान की दिल की बीमारी में बचने की संभावना बहुत कम थी और वो हार्ट फ़ेल की तरफ़ बढ़ रहा था. दो दिन, घंटों चली सर्जरी में हमने उसके ह्रदय में रक्त जाने की नस से लेकर फेफड़ों तक पर काम किया."
बड़ी सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने रोहान को एक महीने तक अस्पताल में रखा और अब रोहान वापस लाहौर जाने को तैयार है.
उसके पिता का कहना है कि, "दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों का असर आम नागरिकों, ख़ासतौर से मरीज़ों, पर बिलकुल नहीं पड़ना चाहिए".
वीज़ा आवेदन
बेटे को दिन भर गोद में रखने वाली रोहान की माँ किसी से भी बात नहीं करती हैं और उनके पति का कहना है कि, "खुश तो हैं लेकिन वे अभी भी सदमे में हैं".
विदेशों से भारत आकर इलाज कराने वाले मरीज़ों की तादाद लाखों में रहती है और पाकिस्तान से भी मरीज़ इलाज के लिए आते रहे हैं.
लेकिन दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों में बढ़ते तनाव के बाद वीज़ा नियम कड़े हुए हैं जिसका असर मरीज़ों की संख्या पर पड़ सकता है.
इस माहौल में सीधे भारतीय या पाकिस्तानी विदेश मंत्रालयों से सोशल मीडिया पर मदद करने वालों की तादाद भी बढ़ी है.
मंगलवार को ही सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के एक छात्र मरीज़ को मेडिकल वीज़ा देने का ट्वीट किया है.
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