ये हैं दूसरे वानी...नबील अहमद वानी..

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित

उधमपुर के नबील अहमद वानी ने सीमा सुरक्षा बल की असिस्टेंट कमाडेंट की परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया है.

नबील ने ये कामयाबी उस समय हासिल की है, जब बुरहान वानी की मौत के बाद से ही जम्मू कश्मीर में प्रदर्शनों और हिंसा का दौर जारी है.

पहला स्थान मिलने पर नबील अहमद वानी की मां बहुत खुश हैं.

मां कहती हैं कि नबील ने इस स्थान पर पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है. नबील के पिता की मौत दो साल पहले हो गई थी तब से परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी नबील के ही कंधो पर थी.

नबील की मां बताती हैं कि ''पैसों की कमी के चलते उनके परिवार ने कभी भारत के कश्मीर की उस घाटी को नहीं देखा है जिसे धरती का ''जन्नत'' कहा जाता है.''

हनीफ़ा बेग़म ख़ुशी के मारे फूली नहीं समा रहीं हैं क्योंकि उनके बेटे का नाम पूरे भारत में रौशन हुआ है और चारों तरफ से उसे शाबाशियां मिल रहीं हैं.

शाबाशी देने वालों में भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह और गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू भी हैं.

नबील अहमद वानी जम्मू के पास उधमपुर के रहने वाले हैं जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की. फिर उन्होंने पठानकोट से इंजीनियरिंग की.

हनीफ़ा बेग़म ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उनका बेटा हमेशा से फ़ौज में ही जाना चाहता था. वो कहती हैं :"फ़ौज में शामिल होना उसका सपना था.

उसी हिसाब से वो तैयारी भी करता था. इसलिए मैं बहुत खुश हूँ."

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नबील के साथ मुलाक़ात के बाद कहा :" नबील की कामयाबी दिखाती है कि जम्मू कश्मीर के युवाओं में काफी कुछ करने का माद्दा है. नबील की कामयाबी कश्मीरी युवाओं को प्रेरणा देगी ."

नबील के पिता रफ़ीक़ अहमद वानी एक शिक्षक थे जो उधमपुर में ही पढ़ाया करते थे. मगर दो वर्ष पहले उनका देहांत हो गया था. पिता की मौत के बाद नबील पर परिवार का बोझ आ गया था.

उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर अपना और अपने परिवार वालों का खर्च उठाया. और, यही उनकी माँ की ख़ुशी का सबसे बड़ा कारण भी है.

रविवार को नबील के लिए शाबाशियों के मिलने का दौर था.

राजनाथ सिंह के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के के शर्मा ने भी नबील की कामयाबी पर बधाई दी.

लेकिन नबील के लिए सब इतना आसान नहीं था. नबील ने अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात एक किया है.

हनीफ़ा बेग़म बताती हैं कि एक बार तो ऐसा वक़्त भी आया जब नबील को लगने लगा कि वो अपना सपना पूरा नहीं कर पाएंगे.

2013 में नबील सीमा सुरक्षा बल की परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे, उसी वर्ष उनके पिता का निधन हो गया था.

उनका मानना है कि नबील की कामयाबी से हिंसा ग्रस्त जम्मू-कश्मीर के युवाओं में अच्छा सन्देश गया है.

हनीफ़ा बेग़म कहती हैं कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं को पता चल गया है कि क़लम और मेहनत के रास्ते ही कामयाबी हासिल की जा सकती है.

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