'कांग्रेस ने असम को बर्बाद कर दिया'

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कभी असम गण परिषद के नेता रहे केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, अब असम में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं.

पिछली बार असम में भाजपा को सिर्फ़ चार-पांच सीटें ही मिली थीं.

बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत में सोनोवाल ने इसे बड़ी चुनौती बताया.

उन्होंने कहा, "चुनौती बहुत बड़ी है, लेकिन हम आम जनता के साथ मिलकर इसका जवाब देने के लिए तैयार हो गए हैं. असम की सारी जनता असम के विकास के लिए बीजेपी के साथ है, क्योंकि कांग्रेस केवल एक- दो साल नहीं पूरे 55 साल मौक़ा देने के बाद भी कुछ नहीं कर पाई".

सोनोवाल कहते हैं, "दूसरी तरफ उन्होंने सारे सिस्टम को बर्बाद कर दिया. आम जनता को बहुत भुगतना पड़ा. किसी भी वर्ग को कोई सुरक्षा नहीं मिली, इसलिए लोग नाराज़ हैं. लोग चाहते हैं कि जैसे अन्य राज्य विकास की तरफ़ बहुत ज़बरदस्त ढंग से आगे जा रहे हैं. उसी हिसाब से असम भी जाना चाहता है."

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हम सब तरह से देश को सुरक्षा देने में लगे हुए हैं, क्योंकि विदेशी घुसपैठियों ने जितनी ज़मीन पर कब्ज़ा किया है, वहां से उनको निकालना है.

उन्हें निकालने के लिए हमें अपनी जो इन्डिजनस पॉपुलेशन (मूल आबादी है), यहां के जो भूमिपुत्र हैं, सबको साथ लेकर आगे जाना होगा, तो सबने कहा हम एक साथ चलेंगे आप नेतृत्व में रहिए.

बीपीएफ, राभा, टिवा और अन्य भी कई ने कहा. इससे हमारी शक्ति बहुत बढ़ गई है.

उसी हिसाब से कांग्रेस और एआईयूडीएफ जो दो दल असम की धरती को बर्बाद करने में लगे हुए हैं. दोनों को रोकना है, दोनों को हराना है. आम जनता ने लक्ष्य तय कर लिया है.

कांग्रेस और एआईयूडीएफ़ का रिश्ता सदियों से है. उनके बारे में तो देश की जनता को अच्छे से मालूम है.

इस पेड़ का अधिकार सबको मिलेगा, एकाधिकार किसी का नहीं होगा. हमने ये सोचा है. हमारी सोच व्यवस्था के विकेंद्रीकरण की है ताकि सबको फ़ायदा मिले. आम किसान से लेकर जो भी लोग उत्पादन करते हैं. उन्हें लाभ मिले.

ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी व्यक्ति के अधीन में सब कब्जा हो. ये ग़ैर क़ानूनी है, ग़ैर प्रजातांत्रिक है.

बांग्लादेश से भारत ने साल 2015 में ज़मीन समझौता किया था. इस समझौते का असम में भारी विरोध हुआ था.
इमेज कैप्शन, बांग्लादेश से भारत ने साल 2015 में ज़मीन समझौता किया था. इस समझौते का असम में भारी विरोध हुआ था.

देखिए हमारे यहां प्रजातंत्र में एक बार जनता ने मन बना लिया तो जनता के मन को नहीं बदला जा सकता. जनता खुद इस विषय के लिए काम कर रही है.

जनता ने कहा हम साथ हैं. आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कांग्रेस ने पिछले शासन काल में जो अन्याय किया है और उनके शासन में लोगों को जो भुगतना पड़ा उससे लोग नाराज़ हैं. वह नहीं चाहते कि कांग्रेस फिर से आए.

देखिए विदेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए हमने मज़बूत कदम उठाया है. पहली बार अगर किसी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा सील करने में क़दम उठाया तो वह बीजेपी है. इस वजह से विदेशी घुसपैठियों को असम आने का मौका नहीं मिलेगा.

ऐसे ही लैंड स्वैप को लेकर शुरूआत में लोगों में भ्रम पैदा किया गया था, बाद में लोगों को लॉजिक मालूम हो गया.

असम चुनाव

जो भी ज़मीन बांग्लादेश की तरफ गई वो उनके पास सदियों से थी. ये हमारे कब्जे में थी, हमें कोई नुकसान नहीं हुआ. हमें लाभ हुआ है. हमको ज़मीन मिली है.

इसका सबसे बड़ा लाभ होगा कि विदेशी घुसपैठियों को असम आने के लिए और मौका नहीं मिलेगा. मवेशियों की तस्करी नहीं होगी. हथियारों की तस्करी नहीं होगी.

आतंकवादियों को यहां आने की इजाज़त नहीं मिलेगी. पहले तो कांग्रेस ने पूरी सीमा खोल रखी थी. बॉर्डर खोल कर रखने की वजह से सुबह-शाम जो जैसे मर्ज़ी आ सकता था. अभी हम लोगों ने उसको बंद कर दिया.

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