'ख़ुशहाली मंत्रालय' बदलेगा मप्र की तस्वीर?

    • Author, शूरैह नियाज़ी
    • पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सरकार में ‘हैप्पीनेस मिनिस्ट्री’ यानी ख़ुशहाली मंत्रालय बनाने जा रहे हैं.

उन्होंने इसकी घोषणा भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में की. मध्य प्रदेश भारत का पहला राज्य होगा जहां पर ये मंत्रालय होगा.

उन्होंने कहा, “जिनके पास पैसा और दौलत है वे आत्महत्या कर रहे हैं. वहीं झोपड़ी में रहने वाले ख़ुश हैं. इसी तरह से मुख्यमंत्री, मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद लोग भी रो रहे हैं. इसे बदलना होगा. हैप्पीनेस मंत्रालय योग, ध्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा और ऐसे चीज़ों को करेगा जिससे लोग ख़ुश रह सकें.”

लेकिन शिवराज सिंह चौहान की हैप्पीनेस योजना से बदलाव की उम्मीद किसी को भी नज़र नहीं आ रही है. विपक्षी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी इसे एक शिगूफ़ा मान रहे हैं.

वो कहते हैं, “मुख्यमंत्री की कोशिश प्रदेश की समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने की है. उन्हें चाहिए कि वो यहां की मूलभूत समस्याओं जैसे ख़राब आर्थिक स्थिति, किसानों की खस्ता हालात का सही तरह से हल करें तो हैप्पीनेस अपने आप आ जाएगी.”

महिलाओं के साथ होने वाले अपराध को देखें तो मध्य प्रदेश का नंबर देश में अव्वल है. राज्य विधानसभा में पेश आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल एक फरवरी से इस साल 31 जनवरी तक 4744 महिलाओं के साथ बलात्कार दर्ज किए गए हैं जिसमें 2552 नाबालिग थीं.

इसी तरह शिशु मृत्यु दर के मामले में भी प्रदेश असम के साथ पहले स्थान पर है. प्रत्येक 1000 हज़ार बच्चों में से 54 बच्चे ऐसे होते हैं जो अपना पहला जन्मदिन भी नहीं देख पाते हैं.

इसी तरह मातृ मृत्यु अनुपात के मामले में भी प्रदेश की स्थिति काफी ख़राब है. 1,00,000 महिलाओं में से 221 की प्रसव के दौरान मौत होती है जबकि देश में दूसरी जगह इनका अनुपात 167 है.

शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. व्यापमं जैसा घोटाला प्रदेश के लिए दाग़ है. वही पेट्रोल पर टैक्स सबसे ज़्यादा मध्य प्रदेश में ही है यहां 31 प्रतिशत वैट चार्ज किया जाता है.

सामाजिक कार्यकर्ता राकेश दीवान मुख्यमंत्री की घोषणा को सिरे से ख़ारिज करते हैं. उनका कहना है, "ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं जिसमें मध्य प्रदेश पूरी तरह से फिसड्डी है. लेकिन उन चीज़ों को आप ठीक न करके आप लोगों से कह रहे हैं कि आप ख़ुश रहें."

वह आरोप लगाते हैं, "ये पूरी तरह से रईसों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है ताकि उनके लिए तमाशा किया जा सके. मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा है कि ग़रीब अपनी झोपड़ी में ख़ुश है लेकिन अमीर परेशान है. तो ये सारी कोशिश उस अमीर को ख़ुश करने के लिए ही है.”

आम शहरी भी इस मंत्रालय के गठन को सही नहीं मान रहे हैं. अमिताभ पांडे कहते है, “मंत्रालय से कुछ नहीं होना है. किसान को बिजली नहीं मिल रही, नकली बीज मिल रहे हैं. किसान क़र्ज़ में दबा हुआ है. आम आदमी महंगाई से परेशान है अगर आप इसे ठीक कर दें तो अपने आप हैप्पीनेस आ जाएगी.”

इसी तरह के विचार मनोज कुमार के हैं जो अपना निजी कार्य करते है. वो कहते है, “ये एक जुमले की तरह है. आख़िर किस तरह से कोई सरकार एक मंत्रालय के ज़रिए लोगों की हैप्पीनेस का ध्यान रखेंगी. ये नामुमकिन है.”

प्रदेश में इस नए विभाग से लोगों को किसी तरह की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रहा है. उनका यही मानना है कि ये सिर्फ़ लोगों को भ्रमित करने वाली चीज़ है.

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