'जबरन कहलवाने पर नहीं बोलेंगे किसी की जय'

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 2 मिनट

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम विधायक वारिस यूसुफ़ पठान कहते हैं कि उनकी वतनपरस्ती उनके दिल में है और वह किसी के कहलवाने पर 'भारत माता की जय' का नारा नहीं लगाएंगे.

उनका कहना है कि महाराष्ट्र विधानसभा में उनके साथ जो हुआ, वह 'नाइंसाफ़ी' है.

बीबीसी से बातचीत में पठान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विधायक राम कदम ने उन्हें सदन में 'भारत माता की जय' बोलने की चुनौती दी थी.

वह कहते हैं, ''राम कदम खड़े हो गए और कहने लगे भारत माता की जय बोलो. भारत माता की जय बोलो. मैं भी खड़ा होकर बोला, भाई तुम्हारे बोलने से नहीं बोलूंगा. फिर मैंने हिंदुस्तान ज़िंदाबाद और जय हिंद के नारे लगाए. मगर राम कदम को बोला, तुम्हारे बोलने से नहीं बोलूंगा."

पठान का कहना था कि भाजपा और शिवसेना विधायक ज़ोर डालने लगे कि उन्हें यह नारा लगाना ही पड़ेगा. "वो कहने लगे कि भारत में रहना है तो 'भारत माता की जय' बोलना ही पड़ेगा."

दक्षिण मुंबई के बायकुला से विधायक वारिस यूसुफ़ पठान कहते हैं कि देशभक्ति का जज़्बा उनके दिल में है.

"मैं इस देश का बच्चा हूँ. यहीं पैदा हुआ हूँ और यहीं पर मरूंगा. मुझे अपने वतन से कितनी मुहब्बत है, उसके लिए मुझे किसी के सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं है. मुझे आप फ़ोर्स करोगे तो कभी नहीं बोलूंगा, जो आप ज़बर्दस्ती कहलवाना चाहते हो."

वारिस पठान को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष हरिबाबू बगाड़े ने सदन से निलंबित कर दिया है. मगर उन्होंने स्पीकर के इस क़दम को चुनौती दी है और दावा किया है कि उन्होंने न तो कोई ग़ैरक़ानूनी काम किया है और न कोई ग़ैरविधायी काम, जिसके लिए उन्हें यह सज़ा दी गई है. जानकारों को भी ऐसा ही लगता है.

इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष का आदेश भी कहीं से यह नहीं कहता कि पठान ने कोई अमर्यादित आचरण दिखाया या कोई ग़ैरविधायी आचरण पेश किया हो. अध्यक्ष का कहना है कि सदन की राय की वजह से पठान को निलंबित किया जाता है.

पठान कहते हैं, "मैं न तो कोई भाषण दे रहा था और न जो कुछ हो रहा था, वह विधानसभा पटल पर दर्ज ही हो रहा था. मैंने कुछ किया ही नहीं. मेरे साथ यह नाइंसाफ़ी हुई है."

हालांकि उनकी पार्टी के दूसरे सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर पठान का निलंबन वापस लेने की मांग की है.

पठान कहते हैं कि अगर उन्हें फिर भी इंसाफ़ न मिला तो वह अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे.

वारिस पठान के ख़िलाफ़ सदन में सिर्फ़ भाजपा और शिवसेना नहीं थे बल्कि कांग्रेस, एनसीपी और समाजवादी पार्टी के सदस्य भी थे.

वह कहते हैं, "जेएनयू विवाद के दौरान बढ़-चढ़कर बोलने वाली कांग्रेस पार्टी भी बेनक़ाब हो गई. यह पहली बार देश में हुआ होगा, जब सदन के अंदर सारे दल एक तरफ़ होकर किसी की देखभक्ति का इम्तेहान ले रहे हों."

पठान मानते हैं कि जेएनयू विवाद के बाद माहौल ख़राब हो रहा है.

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