‘भूखे बुंदेलखंड’ में अब अनाज की लूट

बुंदेलखंड
    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में अनाज लूटने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं.

पिछले दिनों बांदा ज़िले में हुई ऐसी एक घटना में लोगों ने सार्वजनिक वितरण के लिए आईं राशन की बोरियां लूट लीं. हालांकि प्रशासन इससे इनकार कर रहा है और कोटा चलाने वाले दुकानदार की ग़लती बताकर उसके ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है.

लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यहां जैसे हालात हैं, उसके चलते ऐसी घटनाएं हो रही हैं.

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बांदा ज़िले के नरैनी में हुई इस घटना में पता चला है कि ग्रामीणों ने वहां सस्ते गल्ले की दुकान पर जा रही राशन की गाड़ी पर धावा बोलकर 76 बोरियां लूट लीं.

बांदा के ज़िलाधिकारी सुरेश कुमार ने बीबीसी को बताया कि अनाज लूटने की कोई घटना नहीं हुई है बल्कि दुकानदार ने ही घपलेबाज़ी के चलते यह कहानी गढ़ी है. ज़िलाधिकारी के अलावा अन्य अधिकारी भी कुछ ऐसा ही कह रहे हैं. मगर स्थानीय लोगों की राय अलग है.

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भारतीय किसान यूनियन के स्थानीय पदाधिकारी आशीष सागर दीक्षित कहते हैं कि घटना को कई लोगों ने देखा और उसके बाद अनाज लूटने वालों ने सड़क पर जाम भी लगाया, जिसे बाद में प्रशासन ने हटा दिया.

आशीष सागर दीक्षित के मुताबिक़, ''यहां सरकारी राशन की दुकानों पर लोगों को पिछले कई महीने से राशन नहीं मिल रहा था. जब दिया गया, तो निर्धारित मात्रा से बहुत कम. ऐसे में ग़रीब ग्रामीण उत्तेजित हो गए और उन्होंने सरकारी अनाज लूट लिया.''

कई स्थानीय लोगों का भी कहना है कि अनाज की बोरियां लूटी गईं या नहीं, इस पर बहस हो सकती है लेकिन भूख से बेहाल बुंदेलखंड में स्थिति ये है कि लोग अब भूख मिटाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं.

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नरैनी के जिस गांव में कथित तौर पर अनाज लूटने की यह वारदात हुई, वहां के स्थानीय निवासी देवी दयाल कहते हैं, "तीन साल से खेतों में अनाज नहीं हो रहा है. लोगों के पास खाने को कुछ नहीं. जो सरकारी मदद आ रही है, वह किसे मिल रही है पता नहीं. ऐसे में लोगों के पास से भूख से बचने का जो रास्ता दिख रहा है, वही अपना रहे हैं."

उधर, सरकार बार-बार बुंदेलखंड को हरसंभव मदद का भरोसा देती रहती है और सरकारी आंकड़ों में अतिरिक्त अनाज भी बुंदेलखंड को मुहैया कराया गया है, पर उन्हें मिल कितना रहा है, यह देवीदयाल जैसे ग्रामीणों से बात करने पर पता चलता है.

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मौसम की मार झेल रहे बुंदेलखंड के बिगड़े हालात नए नहीं हैं, लेकिन इस बार मुसीबत ज़्यादा है.

पानी के स्रोत सूख गए हैं और लोग नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं. लोग पलायन तक करने को मजबूर हैं.

सरकार ने मदद की तमाम घोषणाएं की हैं लेकिन लोगों का कहना है कि उन तक कोई मदद नहीं पहुँची है.

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