वाराणसीः मोदी से रिक्शा लेने आए दिव्यांग की 'मौत'

    • Author, रोशन जायसवाल
    • पदनाम, बनारस से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 'दिव्यांगों' को उपकरण बांटे जाने के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए एक दिव्यांग की कथित तौर पर ठंड लगने और समय पर इलाज न मिलने से मृत्यु हो गई.

बनारस के डीएलडब्लू मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ़ से क़रीब 9096 'दिव्यांगों' को सहायक यंत्र और उपकरण बांटे गए.

रोहनिया के 18 वर्षीय प्रकाश अपने पिता के साथ मोदी से ट्राई साइकिल लेने आए थे.

प्रकाश के पिता राजकुमार ने बीबीसी से कहा, " पीएम के कार्यक्रम के दौरान ही प्रकाश के सीने में दर्द होने लगा. इतने में कुछ कर्मचारी वहां आए और बाहर निकालकर ले गए. फिर कर्मचारियों ने कहा कि दवा यहां नहीं मिलेगी बीएचयू अस्पताल में मिलेगी. डीएलडब्लू के अंदर ही स्वास्थ केंद्र है वहां चले जाइये."

राजकुमार ने बताया कि जब स्वास्थ केंद्र पहुचा तो वो बंद मिला. वहां से निकलने के बाद प्रकाश के पेट मे तेज़ दर्द हुआ और सड़क किनारे पटरी पर ही उसकी मौत हो गई.

प्रकाश के पिता का दावा है कि ये सब तब हुआ जब मोदी जी मंच पर आ चुके थें और मोदी जी भाषण के पहले कोई और मंच से भाषण दे रहा था. अंत में बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस उन्हे प्रशासन की गाड़ी छोड़ने आ गई.

वहीं इस पूरे मामले पर स्थानीय बीजेपी इकाई से जिला अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा ने बताया कि प्रकाश की तबियत पहले से ही कुछ खराब थी और कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों ने प्रकाश को डीएलडब्लू के अस्पताल उसके पिता के साथ भेजा था, लेकिन बिना पढ़े लिखे होने के चलते वो वहां से लौट गए.

लेकिन जिला अध्यक्ष ने ये भी कहा कि वक्त रहते उनको जानकारी हो पाती तो प्रकाश की जान बचाई जा सकती थी.

ये पूछने पर कि क्या इस दौरान पीएम मोदी मंच पर मौजूद थें? हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि घटना के दौरान पीएम मोदी मौजूद रहे हों.

मगर समारोह के बाद जिन क़रीब 24 हज़ार खाने के डिब्बों से 'दिव्यांगों' को भोजन बांटा गया उसे 'बाटा' और 'पावर' ब्रांड के जूते के डिब्बों में रखकर लाया गया था.

इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे जो भोजन शुरू होने तक जा चुके थे.

वाराणसी

अपने बच्चे निशम को "ईअर ऐड" उपकरण दिलवाने अपनी पत्नी के साथ आए जैतूपुरा के नरेंद्र ने बीबीसी हिंदी से कहा कि खाने के डिब्बों को अलग बॉक्स में पैक किया जाना चाहिए था. पैक करते वक्त आयोजकों को सिर्फ अपनी सुविधा ही नहीं देखना चाहिए.

वहीं नरेंद्र की पत्नी रेखा ने इसकी आलोचना की और कहा कि खाने की चीजों को जूते के डिब्बों में रखना ठीक नहीं. आखिरकार ये सेहत से जुड़ा मामला है.

उपकरण वितरण से लेकर लंच वितरण का इंतजाम करने वाली पीएसयू 'एलिम्को' के सीएमडी डीआर सरीन ने भी माना कि जूते के बॉक्स में भोजन की पेकिंग नहीं होनी चाहिए थी और आगे से इस बात का ख्याल रखा जाएगा.

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इमेज कैप्शन, वितरण में मिली साइकिलें बाहर निकलते ही टूट गईं और साइकिल के दुकानदारों की चांदी हो गई

'दिव्यांगों' की समस्या यहीं खत्म नहीं हुई.

कार्यक्रम से निकलने के बाद मुख्य सड़क पर दर्जनों 'दिव्यांग' वितरण में मिली अपनी-अपनी ट्राईसाइकिल की मरम्मत कराते दिखे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रेडियो पर 'मन की बात' कार्यक्रम में शारीरिक रुप से अक्षम लोगों के लिए दिव्यांग शब्द इस्तेमाल करने का आग्रह किया था.

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