पठानकोट: क्या ख़राब थी भारत की प्लानिंग?

पठानकोट हमले के विरोध में प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, पठानकोट में हमले के विरोध में प्रदर्शन
    • Author, प्रवीण स्वामी
    • पदनाम, सामरिक मामलों के विशेषज्ञ
  • प्रकाशित

पठानकोट हमले में पहले ही झटके में डिफ़ेंस सिक्योरिटी कोर के पांच जवानों के मारे जाने से यह साफ़ हो जाता है कि सुरक्षा बल न तो ऐसे हमले के लिए तैयार थे और न ही उनका ऐसा प्रशिक्षण है.

दूसरी बात यह है कि हमले की शुरुआत में ही इस हमले का जवाब देने के लिए जितने फौजी लगाए जाने चाहिए थे उतने नहीं लगाए गए.

पठानकोट क्षेत्र में ही 50,000 से अधिक फौजियों की तैनाती है जिनमें से कई पलटनों की कश्मीर में तैनाती रही है. लेकिन एयरफ़ोर्स स्टेशन पर बहुत कम, मात्र 50-60 फौजियों की ही तैनाती की गई.

कहा जा सकता है कि इस पूरे ऑपरेशन की प्लानिंग बहुत ख़राब थी.

सुरक्षा बल को अंदाज़ा ही नहीं था कि 25-26 किलोमीटर बड़े क्षेत्र को संभालने के लिए उन्हें कितने संसाधनों की आवश्यकता होगी.

सबसे हैरत की बात यह है कि पठानकोट में ऐसी हालत से निपटने के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई थी.

ऐसे में भारत में किसी को इस पर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि चरमपंथी कभी भी कहीं से भी हमला कर सकते हैं, वह भी ऐसी जगह पर जहां सेना तैनात है.

पठानकोट में ऐसी कोई योजना नहीं बनाई गई थी कि अगर ऐसा कोई हमला हो तो फौज कैसे प्रतिक्रिया करेगी.

जबकि इस बार पहले से सूचना थी फिर भी आखिरी वक्त में सारी योजना बनाई गई, सारी तैयारी की गई.

इसके अलावा ये भी मतभेद था कि कौन कमांड करेगा, कौन नहीं. भारत में हम सालों से ऐसे ही भ्रम में जी रहे हैं.

मुझे बहुत हैरानी होती है कि इस बात की पहले से जानकारी होने के बावजूद कि वहां ऐसे हमले हो सकते हैं, कोई तैयारी नहीं की गई थी, कोई प्लान नहीं बनाए गए थे.

साल 2008 के मुंबई हमलों के बाद यह उम्मीद थी कि भारत के सुरक्षा इंतज़ामों में बड़े सुधार आएंगे लेकिन अफ़सोस ऐसा नहीं हुआ.

किसी भी चरमपंथी हमले के मौके पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देने के लिए जो सुरक्षाकर्मी मौजूद होते हैं उन्हीं को स्थिति संभालनी होती है.

अाज भी उनके प्रशिक्षण, उनकी तैयारी में कोई विशेष अंतर नहीं आया है.

पंजाब की स्पेशल फ़ोर्सेस का हाल अभी गुरदासपुर में दिखा था. वहां भी मुठभेड़ कई घंटे चली थी और कई पुलिसकर्मी मारे गए थे.

और यह कहते हुए दुख होता है कि अगर भारत के किसी शहर में फिर 26-11 के हालात बने तो नतीजा बहुत अलग नहीं होगा.

(बीबीसी संवाददाता अशोक कुमार से बातचीत पर आधारित)

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