पठानकोट हाइवे पहले भी रहा है निशाने पर

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जम्मू से सटे और पाकिस्तान की सीमा से क़रीब बसे पठानकोट से लेकर सांबा सेक्टर तक का क्षेत्र चरमपंथियों के निशाने पर रहा है.

पठानकोट में शनिवार को हुए हमले के बाद अब तक जम्मू-पठानकोट हाइवे के आसपास के इलाकों में पिछले दो वर्षों में सात हमले हो चुके हैं.

इससे पहले तीन चरमपंथियों ने 27 जुलाई, 2015 को पंजाब में गुरदासपुर ज़िले के दीनानगर में एक थाने पर हमले किया था. कई घंटों तक चली मुठभेड़ के बाद तीनों चरमपंथी मारे गए थे.

पंजाब का गुरदासपुर ज़िला भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के जम्मू से सटा हुआ है.

इस हमले में एक पुलिस अधीक्षक सहित चार पुलिसकर्मी और तीन आम नागरिक मारे गए थे.

20 मार्च 2015 को दो चरमपंथियों ने जम्मू—पठानकोट हाइवे पर कठुआ ज़िले में स्थित राजबाग पुलिस स्टेशन पर हमला किया था.

इस हमले में सीआरपीएफ के दो जवान और एक पुलिसकर्मी सहित नौ व्यक्ति मारे गए थे. दोनों हमलावर भी मुठभेड़ में मारे गए.

21 मार्च, 2015 को सांबा सेक्टर स्थित आर्मी कैंप पर हुए हमले में दो चरमपंथियों समेत नौ लोग मारे गए थे.

चरमपंथियों ने जम्मू—पठानकोट हाइवे पर स्थित मेसर कैंप पर हमला किया था. यह कैंप जम्मू से 40 किलोमीटर दूर स्थित है.

26 सितंबर 2013 को चरमपंथियों ने कठुआ ज़िले के हीरानगर पुलिस स्टेशन पर हमला करने के बाद फिर मेसर कैंप को निशाना बनाया. इसमें 12 लोग मारे गए थे.

जम्मू के अरनिया सब सेक्टर में स्थित कठहर गांव पर हुए चरमपंथी हमले में आठ लोग मारे गए थे. 27 और 28 नवंबर, 2014 को हुए इस हमले में तीन भारतीय सैनिक भी मारे गए थे.

28 मार्च, 2014 को कठुआ ज़िले में हुई मुठभेड़ में तीनों चरमपंथी मारे गए. इस हमले में चरमपंथियों ने एक व्यक्ति को मार दिया जबकि एक जवान समेत चार लोग घायल हो गए थे.

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