मंत्री और नौकरशाह में पटरी क्यों नहीं बैठती?

हरियाणा के मंत्री अनिल विज और फतेहाबाद की पूर्व एसपी संगीता कालिया

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इमेज कैप्शन, हरियाणा के मंत्री अनिल विज और फतेहाबाद की पूर्व एसपी संगीता कालिया.
    • Author, अनुराग शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित

हरियाणा के मंत्री अनिल विज और फतेहाबाद की पूर्व एसपी संगीता कालिया के बीच हाल ही में सामने आया <link type="page"><caption> कहासुनी का मामला</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/11/151128_haryana_sp_transferred_ps" platform="highweb"/></link> नया नहीं है.

इससे पहले भी मंत्रियों और और नौकरशाहों के बीच अंतरविरोध कई बार सामने आ चुका है.

कुछ समय पहले हरियाणा के ही एक आईएएस अधिकारी <link type="page"><caption> अशोक खेमका</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/04/150402_khemka_transfer_profile_sr" platform="highweb"/></link> ने रॉबर्ट वाड्रा के कथित अवैध भूमि सौदे उजागर किए थे जिसके बाद उनका कई बार ट्रांसफर किया गया.

अशोक खेमका

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इमेज कैप्शन, हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का 22 साल में 46 बार ट्रांसफ़र हुआ था.

आख़िर इस तरह के अंतरविरोधों की वजह क्या है?

अनिल विज और संगीता कालिया वाले मामले पर पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम कहते हैं, "वो दिखाना चाहते थे कि वो हीरो हैं और अवैध शराब की सप्लाई एसपी की लापरवाही के कारण हो रही है."

वो कहते हैं, "उन्होंने अफसर पर दोष लगाया कि यह सब उनकी वजह से हो रहा है. जिसके जवाब में महिला अफसर ने उनको जवाब दिया और कहा कि ये सरकार की नीति है मेरी नहीं."

अवैध शराब

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सुब्रमण्यम ने कहा, "वो उम्मीद कर रहे थे कि एसपी चुपचाप रहेंगी और उनके आरोपों को सुनती रहेंगी. लेकिन उन्होंने पलटकर जवाब देते हुए कहा कि नहीं हम पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं."

लेकिन क्या शिष्टाचार और निरादर के बीच फर्क नहीं होना चाहिए?

इसके जवाब में सुब्रमण्यम कहते हैं, "होता है बिल्कुल होता है. मंत्री का जो लहज़ा था वो बहुत ही आक्रामक था. आप किसी भी अधिकारी को इस तरह से 'गेट आउट' नहीं कह सकते."

अनिल विज

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संगीता कालिया के समर्थन में वो कहते हैं, "वो कानूनी तौर पर वहां थीं और अपना काम कर रही थीं. अगर कोई अपना पक्ष रखे तो उसे 'गेट आउट' कहना कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता."

सुब्रमण्यम अधिकारी के ट्रांसफर को भी ग़लत मानते हैं.

वो कहते हैं, "2013 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार एक न्यूनतम कार्यकाल के बाद ही किसी अधिकारी का ट्रांसफर किया जा सकता है. लेकिन इस मामले में इसका पालन नहीं हुआ."

दूसरी तरफ पूर्व आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंह का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों में भी भ्रष्टाचार की कमी नहीं है.

वो कहते हैं, "फतेहाबाद एसपी के साथ जो भी हुआ वो एकदम सही था. अगर कोई प्रशासनिक अधिकारी सार्वजनिक तौर पर कह रहा है कि वो अवैध शराब के धंधे नहीं रोक सकता तो मंत्री ने जो किया वो सही किया."

मोदी और बस्तर के डीएम

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी करते समय काला चश्मा लगाने वाले बस्तर के कलेक्टर अमित कटारिया को नोटिस जारी किया गया था.

वो कहते हैं, "मंत्री ने जब उनसे पूछा कि ग़लत धंधे क्यों नहीं बंद हो रहे तो उन्हें अपनी ग़लती माननी चाहिए थी. बजाय इसके वो खुद को सही ठहराने में लगी हुई थीं."

वाईपी सिंह का यह भी मानना है कि मंत्रियों को नौकरशाहों पर सख़्त रहने की ज़रूरत है.

वो कहते हैं, "अगर नौकरशाहों पर सख़्ती न की जाए तो वो भ्रष्टाचार में मंत्रियों से भी आगे निकल जाएं. उनका नाम मीडिया में इतना नहीं आता इसलिए वो बेखौफ़ भ्रष्टाचार करते हैं."

नौकरशाहों के बारे में वो कहते हैं, "हमारे संविधान के तहत उन्हें बहुत शक्तियां और सुरक्षा दी गई है. ऐसे में वो पूरी तरह से बेखौफ़ हो गए हैं."

(पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम और पूर्व आइपीएस अधिकारी वाईपी सिंह के साथ बातचीत पर आधारित)

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