महाराष्ट्रः 68 टन दाल ज़ब्त

महाराष्ट्र दाल
    • Author, अश्विन अघोर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
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दाल की आसमान छूती कीमतों को कम करने के मकसद से महाराष्ट्र सरकार ने अब तक कुल 68 टन अरहर दाल अलग अलग शहरों के जमाखोर व्यापारियों से ज़ब्त की है.

इसमें ज़्यादातर व्यापारी मुंबई से सटे ठाणे तथा नवी मुंबई के हैं.

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर दाल की कीमतों पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें अवैध रूप से जमा की गयी दाल की ज़ब्ती एक अहम कदम है.

सरकार अब तक देश भर में कुल 98 हजार टन अरहर की दाल ज़ब्त कर चुकी है.

इस दाल के बाजार में आने से कीमतों में गिरावट आने की संभावना है.

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लेकिन यह इतना आसान नहीं है. यह सारा ज़ब्त किया गया स्टॉक बाजार में लाकर कम कीमतों पर बेचने से पहले सरकार को इस ज़ब्ती से जुड़ी कानूनी कार्रवाई पूरी करनी होगी. इसमें कम से कम दो महीने लग सकते है.

ग्राहक पंचायत के अध्यक्ष शिरीष देशपांडे ने बताया कि प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार जमाखोर व्यापारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा. इसका जवाब आने में 15 दिन लगेंगे.

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उसके बाद आगे की कानूनी तथा न्यायिक प्रक्रिया ख़त्म होते होते, यह सारी दाल सरकारी गोदामों में सड़ जायेगी.

देशपांडे ने कहा,"यदि इस स्टॉक की नीलामी भी होती है तब भी कोई न कोई व्यापारी ही इसे खरीदेगा, जिस पर सरकार का किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं होगा."

महाराष्ट्र के जनआपूर्ति मंत्री गिरीश बापट ने कहा, "इस समस्या का हल निकालने के लिए यह प्रक्रिया एक हफ्ते में पूरी करने के आदेश संबंधित अधिकारियों को दे दिए गए है. इस संबंध में ज़रूरी सरकारी आदेश भी जारी कर दिए गए है. बड़े पैमाने पर छापेमारी कर इतनी भारी मात्रा में दाल ज़ब्त करने से जमाखोर डर गए हैं. इससे अरहर की दाल की कीमतों में गिरावट ज़रूर आयी है, लेकिन अब भी दाल 170 रुपये प्रति किलो के दर पर बिक रही है."

शिरीष देशपांडे ने इस समस्या के हल पर बात करते हुए बीबीसी को बताया, "वर्ष 1975 में महाराष्ट्र सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट में संशोधन कर, इस तरह ज़ब्त किये गए स्टॉक की कीमतें निश्चित कर बाजार में लाने का प्रावधान किया था. उसके तहत सरकार इस सारे स्टॉक की कीमतें निश्चित कर इस दाल को राशन की दुकानों से कम कीमत पर लोगों में वितरित कर सकती है.”

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