महाराष्ट्र: कहीं सूखा कहीं पानी ही पानी

पानी की किल्लत
इमेज कैप्शन, स्थिति का मुआयना करते मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस
    • Author, अश्विन अघोर
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

एक ओर जहां महाराष्ट्र में पानी की कमी और सूखे की वजह से क़र्ज़ में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं, वहीं राज्य के कुछ इलाक़े ऐसे हैं जहां ज़रूरत से ज़्यादा पानी खेती-किसानी को चौपट कर देता है.

अकोला ज़िले के तेल्हारा गाँव में हर साल बारिश के बाद गौतमी नदी में बाढ़ आने से फसल बह जाती है.

बाढ़ का पानी गाँव में घुसने से काफ़ी नुक़सान होता है.

वहीं लातूर ज़िले के गंगापुर गाँव को रोज़ क़रीब एक लाख लीटर पानी की ज़रूरत पड़ती है, जिसकी आपूर्ति वहां के 'गोल तालाब' से होती है.

लेकिन गर्मी के चार महीने अकाल जैसी स्थिति रहती है और पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाता है.

राज्य में कहीं पानी की कमी और कहीं ज़रूरत से अधिक पानी एक बड़ी समस्या है.

इससे निपटने के लिए 'जलयुक्त शिवार' नामक कार्यक्रम की पहल की गई है.

भूजल स्तर बढ़ा

पानी की कमी अब नहीं
इमेज कैप्शन, कई स्रोतों में बढ़ा है पानी का स्तर

‘जलयुक्त शिवार’ कार्यक्रम के तहत नदी-तालाब की लंबाई-चौड़ाई बढ़ाने, गाद निकालने और बांध बनाने जैसे तरीक़े अपनाए जा रहे हैं.

इसके तहत पानी को ज़मीन में रोकने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी. गौतमी नदी से गाद निकाली जा रही है जिससे नदी की गहराई और चौड़ाई बढ़ी है.

इससे बाढ़ का ख़तरा टला है और नदी से निकली उपजाऊ मिट्टी मुफ़्त में गाँव के खेतों में फैला दी गई है.

लातूर में भी गाँव के लोगों ने सरकार के साथ मिलकर गोल तालाब का आकार और गहराई बढ़ाकर पानी की समस्या हल की है.

4000 गाँवों का फ़ायदा

पानी की मुश्किल

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी. लेकिन उनके कार्यकाल के अंत में शुरू हुई यह योजना कुछ ख़ास गति नहीं पकड़ पाई.

नए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की देखरेख में ‘जलयुक्त शीवार’ योजना परवान चढ़ी और अब सरकार का दावा है कि महाराष्ट्र में अकालग्रस्त क़रीब 4,000 गाँवों को फ़ायदा होगा.

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री एकनाथ खडसे के मुताबिक़, "हम पानी तैयार नहीं कर सकते. लेकिन पानी की हर बूंद का संवर्धन करना अपने हाथ में ही है."

वे कहते हैं, "इस अभियान की सफलता और लोगों में उत्साह देखते हुए मैं कह सकता हूँ कि यह अब महज़ सरकारी कार्यक्रम न रहते हुए एक सकारात्मक जनांदोलन बन गया है."

लोगों का सहयोग

पानी की मुश्किल ख़त्म
इमेज कैप्शन, फिर से जीवित हुई चित्ते नदी

सरकार के मुताबिक़ पानी के स्रोतों के संवर्धन के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने से कार्यक्रम को बहुत मदद मिली है.

इसके साथ ही जिस गाँव में इस योजना के अंतर्गत काम हो रहे है, वहाँ के लोगों को श्रमदान या आर्थिक सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

औरंगाबाद शहर में ‘ग्राम विकास’ नामक संस्था ने इस कार्यक्रम के ज़रिए शहर के क़रीब चित्ते नदी को पुनर्जीवित किया है. इससे नदी के क्षेत्र में बसे 25 गावों को पानी का ज़रिया मिला.

संस्था के संचालक नरहरी शिवपुरे कहते हैं, "लोगों को सरकारी योजना से जोड़ना एक अनोखी पहल है. इससे इन स्रोतों को लंबे समय तक ऐसा ही बनाए रखने में लोगों की रुचि बनी रहेगी."

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