भोपाल: कहां निपटाया जाए ज़हरीला कचरा?

भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा
    • Author, राजेश चतुर्वेदी
    • पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

भोपाल हादसे के 31 साल होने वाले हैं लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने में पड़े करीब 350 मीट्रिक टन ज़हरीले रासायनिक कचरे को कहां जलाया जाए?

पिछले दिनों मध्य प्रदेश के पीथमपुर के रामकी प्लांट में 10 मीट्रिक टन कचरे को निपटाने के एक और गुपचुप ट्रायल से यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है.

मध्य प्रदेश सरकार अब तक यहां कचरा जलाए जाने का विरोध करती रही है.

भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा

इस मामले पर बनी निरीक्षण समिति की पहली बैठक 27 सितंबर 2010 को हुई थी. इसमें राज्य के पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने कहा था, ''जहां यह जलेगा, चूंकि वो इलाका इंदौर को पेयजल मुहैया कराने वाले यशवंत सागर बांध के कैचमेंट एरिया में आता है, इसलिए इससे पूरे मालवा क्षेत्र का भूजल प्रदूषित हो सकता है.''

22 अक्तूबर 2012 को जीओएम की बैठक में गैस राहत और पुनर्वास मंत्री बाबूलाल गौर ने भी पीथमपुर में कचरे के निपटान का विरोध किया था.

भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा

मध्य प्रदेश सरकार के 'रुख में आए बदलाव' के बारे में मौजूदा गैस राहत और पुनर्वास मंत्री नरोत्तम मिश्र ने बीबीसी से कहा कि उन्होंने सारे पक्षों से बात करने के बाद कोर्ट के आदेश पर ट्रायल किया है.

लेकिन जिस तारापुर गांव के नज़दीक ट्रायल किया गया वहां के लोग सरकार के तर्क से सहमत नहीं दिखते हैं.

भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा

पीथमपुर-तारापुर गांव बचाओ समिति के अध्यक्ष डॉक्टर हेमंत हिलोले कहते हैं कि वो इसके ख़िलाफ़ नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) में अर्ज़ी लगाएंगे.

उन्होंने कहा, "ट्रायल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया. किसी को कानों-कान खबर नहीं लगने दी गई. अगर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी जैसे हालात पीथमपुर-तारापुर में भी बने तो इसका जिम्मेदार कौन होगा.''

मध्य प्रदेश में सरकार चला रही भाजपा में भी इस मुद्दे पर एक राय नहीं है.

भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा

धार की भाजपा विधायक नीना वर्मा तो पीथमपुर में इसको जलाने के ही पक्ष में नहीं हैं. पीथमपुर उनके ही चुनाव क्षेत्र में आता है. वो कहती हैं, "जितने रुपए सरकार पूरी प्रकिया पर खर्च कर रही है, उतने में पांच रामकी प्लांट स्थापित हो जाएंगे. सरकार को चाहिए कि वह जंगल में नया संयंत्र बनाकर रासायनिक कचरे को ठिकाने लगाए.''

भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा

वहीं भोपाल ग्रुप ऑफ़ फ़ॉर इनफ़ार्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारें ट्रायल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन कर रही हैं.

वो कहती हैं कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई और पूरी प्रक्रिया चुपचाप की गई. डायोक्सिंस और फ्यूरेंस के मामले में सात में से छह टेस्ट फेल हो चुके हैं.

ज़ाहिर है मध्य प्रदेश सरकार के लिए न सिर्फ़ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) बल्कि सुप्रीम कोर्ट के सामने भी अपने क़दम का बचाव करना मुश्किल होगा.

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