जहां हाथियों को ट्रेनिंग दी जाती है

हथिनी सुनीता
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    • Author, प्रगित परमेश्वरन, कोच्ची से
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

चौदह साल की सुनीता महावत थॉमस कुंजु से इस तरह घुली-मिली है कि उनसे हर तरह की बातें करती रहती है. वह उन्हें थोड़े समय के लिए भी नहीं छोड़ती है.

सुनीता हथिनी है और केरल के कोडानाड स्थित हाथी प्रशिक्षण केंद्र में रहती है. उसके साथ दूसरे पांच हाथी भी रहते हैं. इन्हें असम से लेकर दक्षिण भारत के अलग-अलग इलाक़ों से यहां लाया गया है.

कोच्चि से 35 किलोमीटर दूर यह प्रशिक्षण केंद्र 1895 में ही बना था. यहां एक छोटा चिड़ियाघर भी है.

कोडानाड में प्रशिक्षण ले रहे हाथी.
इमेज कैप्शन, कोडानाड में प्रशिक्षण ले रहे हाथी.

प्रशिक्षण केंद्र के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, "हम किसी हाथी को तब तक नहीं पकड़ सकते जब तक वह ज़ख़्मी न हुआ हो. अमूमन हाथी पानी पीने के लिए जाते हैं तो कुएं में गिर जाते हैं. हम ऐसे हाथियों को बचाते हैं और लकड़ी के ख़ास तौर पर बने पिंजड़े में उन्हें यहाँ लाते हैं."

परियार नदी में छोड़ देते हैं

महावत थॉमस कुंजु
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महावत थॉमस कुंजु हाथियों को प्रशिक्षण देते हैं.

वे कहते हैं, "पहले हम हाथियों को पेरियार नदी में घंटे भर के लिए छोड़ देते हैं. फिर हम उन्हें नहलाते हैं, जिसमें चार-पांच घंटे का समय लगता है. एक महावत दो हाथियों को प्रशिक्षित करता है. हाथी काफ़ी समझदार जानवर है. वे हमारी भाषा समझ लेते हैं और हमारा कहा मानते हैं."

प्रशिक्षण के तुरंत बाद इन हाथियों को जंगल नहीं भेजा जाता है. वे ख़तरनाक हो सकते हैं.

दरअसल, हाथी 15 किलोमीटर तक की चीजों को सूंघ सकते हैं और इसको ध्यान में रखते हुए ही उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है.

हाथियों का पिंजड़ा 'क्राल'
इमेज कैप्शन, हाथियों का पिंजड़ा 'क्राल'

एर्नाकुलम ज़िला पर्यटन संवर्द्धन परिषद की कार्यकरी समिति के सदस्य एमपी प्रकाश कहते हैं कि लकड़ी के बने इन विशाल पिंजड़ों यानी क्रॉल को विशेष तौर पर संभाल कर रखा गया है. साल 1965 में 40,346 रुपए खर्च कर इनकी मरम्मत की गई थी.

सालाना तक़रीबन एक लाख पर्यटक कोडानाड आते हैं.

पत्तनमथिट्टा ज़िले के कोट्टूर में भी एक हाथी प्रशिक्षण केंद्र है.

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