'ब्लॉगर डरे हुए हैं कि अगला कौन होगा'

ब्लॉगर हत्या
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बांग्लादेश में ब्लॉग के ज़रिए आवाज़ उठाना जान पर खेलने जैसा हो गया है.

हर महीने ब्लॉगरों की होने वाली हत्याओं से दहशत का माहौल है.

शुक्रवार को राजधानी ढाका में <link type="page"><caption> एक और ब्लॉगर की हत्या</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2015/08/150807_bangladesh_blogger_hacked_to_death_dil.shtml" platform="highweb"/></link> कर दी गई. पुलिस के मुताबिक़ ब्लॉगर निलॉय नील की उनके घर में ही धारधार हथियार से हत्या की गई है. बीते कुछ महीनों में यहां चार ब्लॉगरों की हत्या हो चुकी है.

बांग्ला भाषा में ब्लॉग लिखने वाले हसीब महमूद दस साल पहले जर्मनी चले गए थे और वहीं से ब्लॉग लेखन कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने हसीब महमूद से बात की.

हसीब महमूद की राय

निलॉय नील
इमेज कैप्शन, बांग्लादेशी ब्लॉगर निलॉय नील की हत्या कर दी गई

मैं निलॉय नील को उनके कुछ लेखों की वजह से जानता था. वो आम तौर पर धार्मिक मुद्दों और समाज में पड़ने वाले इसके असर पर लिखते थे.

कुछ दिन पहले ही उन्हें धमकी मिली थी और दो लोगों ने उनका पीछा किया था. इस बारे में उन्होंने अपने ब्लॉग पर जानकारी दी थी.

उन्होंने इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज करवानी चाही, लेकिन पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया था.

जिस तरह से बांग्लादेश में ब्लॉगरों की हत्याएं हो रही हैं, उससे हम खुद के लिए बहुत फ़िक्रमंद हो गए हैं. क्योंकि कोई नहीं जानता कि कल क्या होगा.

अब तक कोई पकड़ा नहीं गया है. पिछली कुछ हत्याओं के मामले में कोई प्रगति भी नज़र नहीं आती. हम सोचते हैं कि अगला कौन होगा?

'मैं सावधानी नहीं बरतता'

ब्लॉगर की हत्या पर विरोध प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, बीती फ़रवरी में ब्लॉगर अविजीत रॉय की हत्या पर विरोध प्रदर्शन

बांग्लादेश में स्थिति चिंताजनक है. सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं कर रही है. हम असहाय हैं. कुछ ब्लॉगरों का कहना है कि फिलहाल देश के सभी ब्लॉगरों की जान ख़तरे में है. कुछ ब्लॉगर बांग्लादेश छोड़ रहे हैं.

इसका असर लेखन पर होना स्वाभाविक है लेकिन निजी तौर पर मैं लिखते वक़्त कोई सावधानी नहीं बरतता हूँ. क्योंकि लोग विचार पर सेंसर पसंद नहीं करते.

लेकिन कुछ ब्लॉगर ऐसा कुछ लिखने को लेकर सावधानी बरतते हैं.

बांग्लादेश में ब्लॉगिंग की शुरुआत दस साल पहले हुई थी. यहां प्रमुख रूप से क्मयुनिटी ब्लॉगिंग होती है.ये ब्लॉगिंग सोसाइटी मुख्य रूप से प्रगतिशील सोसायटी है.

चूंकि यह एक प्रगतिशील माध्यम है इसलिए ब्लॉगर अपने लेखों में अलग अलग मुद्दों पर सेक्युलर नज़रिए से लिखते हैं. ब्लॉगिंग सोसायटी में लोग जुड़ते जा रहे हैं.

'ब्लॉगिंग पांचवां स्तंभ है'

ब्लॉगर अनंत बिजॉय
इमेज कैप्शन, बीते मई में सेक्युलर ब्लॉगर अनंत बिजॉय दास की हत्या कर दी गई थी

नाइंसाफ़ी और अन्य मुद्दों पर संघर्ष के लिए बांग्लादेश में ब्लॉग लेखन एक आधुनिक हथियार बनकर उभरा है.

ब्लॉगिंग में सेंसरशिप नहीं है. ब्लॉगिंग पर कॉरपोरेट कंट्रोल भी नहीं है.

आप जो कहना चाहते हैं आप वो कह सकते हैं. आप पारंपरिक मीडिया के बारे में ये बात नहीं कह सकते. उनका अपना राजनीतिक एजेंडा है.

सरकार ने उनके लिए अलग नियम और क़ायदे बना रखे हैं. अगर न्यूज़ पेपर चौथा खंबा है तो मैं कहूंगा कि ब्लॉगिंग पांचवां खंबा है.

इसलिए ब्लॉगिंग बांग्लादेश और दूसरे देशों के लिए भी अहम है. क्योंकि लोग ब्लॉग के जरिए अपनी आवाज उठा सकते हैं.

(हसीब महमूद जर्मनी की हाइल ब्रॉन यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और उन्होंने 'टेररिज़्म' पर टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ ड्रेस्डेन से पीएचडी की है.)

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