उत्तराखंड राजनीति में 'स्टिंग' का बवाल

    • Author, शिव जोशी
    • पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा आलाकमान ने एक तीर से दो शिकार करने की रणनीति बनाई है.

एक तो संसद में कांग्रेस के हमलों की धार को भोथरा करना और दूसरा राज्य स्तर पर सुस्त पड़े संगठन को हमलावर बनाना.

दो दिन पहले जब देहरादून में मुख्यमंत्री हरीश रावत आम महोत्सव में रसीले आमों का स्वाद ले रहे थे तो उधर भाजपा आलाकमान दिल्ली में एक कथित स्टिंग के ज़रिए उन्हें घेरने की रणनीति बना रहा था.

बुधवार शाम को दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने एक सीडी जारी की जिसमें उनके मुताबिक ये दिखाया गया है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव मोहम्मद शाहिद एक शराब व्यवसायी को लाइसेंस दिलाने के लिए करोड़ों रूपए की मांग कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री का इंकार

भाजपा के मुताबिक ये स्टिंग ऑपरेशन एक गैरसरकारी संस्था ने किया है.

हरीश रावत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, “केंद्रीय राजनीति में अपनी हताशा के चलते भाजपा बिना सीडी को ऑथेंटिकेट किए ही बेबुनियाद आरोप लगा रही है और इसे अपना "दीनदयाल उपाध्याय सत्य" मान कर चल रही है.”

उनका कहना है कि पहले “इस सीडी में दिखाए दृश्यों और टूटे-फूटे ऑ़डियो के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल है. सीडी की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता की फ़ोरेंसिक जांच की जाएगी. उसके बाद ही किसी के खिलाफ कार्रवाई का प्रश्न उठता है.”

इस मुद्दे ने राज्य में एक तरह से शिथिल पड़ी भाजपा में नई जान फूंक दी है. राज्य में 2017 के शुरू में विधानसभा में चुनाव होने हैं.

भाजपा के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं और राज्य भर में धरना-प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है.

शराब सिंडीकेट

इसी कड़ी में भाजपा नेता सचिवालय का भी घेराव कर रहे हैं. राज्य के सभी बीजेपी नेताओं ने एक सुर में मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की मांग की है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा, “सरकार आपदा घोटाले की लीपापोती में जुटी थी कि ये एक और मामला आ गया. सरकार शराब सिंडीकेट के दबाव में है. मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए. हम लोग जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर रहे हैं.”

जवाब में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि “हमने आबकारी नीति के तहत ठेकेदारी को निजी हाथों से लेकर पब्लिक अंडरटेंकिंग को दिया है और इस बारे में हमारी नीति बिल्कुल पारदर्शी है.”

गौरतलब है कि हरीश रावत ने दो फरवरी 2014 को सत्ता में आते ही राज्य की 14 साल पुरानी आबकारी नीति को बदल दिया था.

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