एचआईवी पीड़ितों का विवाह मेला

    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

एचआईवी बीमारी 'वर्जित' से कम नहीं है और एचआईवी पीड़ित व्यक्ति से लोग मिलने में कतराते हैं ऐसे में उनके विवाह की बात सोचना बेहद कठिन है.

पुणे निवासी डॉक्टर अरुंधति सरदेसाई एचआईवी रोगियों का घर बसाने की इसी कठिन काम में जुटी हैं.

अब तक अपनी कोशिश से वो 15 एचआईवी संक्रमित जोड़ों की शादी करवा चुकी हैं.

नई ज़िंदगी

गैर सरकारी संस्था 'मानव्य' के माध्यम से अरुंधति एड्स रोगियों को विवाह बंधन में बांध कर उनके अकेले जीवन में खुशियां लाना चाहती हैं.

वो कहती हैं, "समाज में हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार है और हमारे प्रयास से एचआईवी संक्रमित लोगों को ऐसा इंसान मिल जाता है जो उन्हें समझ सके. इसकी मदद से वो एक सामान्य जीवन बिता सकते हैं."

5 सालों से ये संस्था इस काम में जुटी है और पुणे में फ़रवरी के महीने में एक मेला लगाती हैं जिसके तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और यहां तक कि नेपाल से भी एचआईवी संक्रमित लोग अपना जीवन साथी ढूंढने के लिए आते हैं.

डॉक्टर अरूंधति के अनुसार हर साल 150 से भी ज़्यादा लोग इस मेले में शिरकत करते हैं.

जोड़े

'मानव्य' में शादी करने आए लोग एक फ़ॉर्म में खुद से जुड़ी सभी बातें लिख देते हैं और इस फ़ॉर्म की जांच के बाद ही वो शादी के लिए रजिस्टर कर सकते हैं.

अरूंधति बताती हैं, "इस फ़ॉर्म में पढ़ाई, परिवार के सदस्य, नौकरी, वेतन और मेडिकल रिपोर्ट के ब्यौरे भरे जाते हैं."

इसी बायोडाटा को एक स्टेज पर पढ़ा जाता है जो लड़का या लड़की इच्छुक होते हैं तो वे या तो यहीं शादी कर लेते हैं या फिर यहां जान पहचान बढ़ाने के बाद में शादी करते हैं.

जोड़ियां

इस मेले में आकर शादी करने वालों में से एक नागपुर की हेमा कहती हैं, "तीन साल पहले अपनी बेटी को लेकर मैं इस 'वरवधू मिलाप' समारोह में आई थी और यहाँ मेरी मुलाक़ात आनंद से हुई."

हेमा ने बताया, "आनंद के भी दो बच्चे थे और उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद वो किसी ऐसी महिला को ढूंढ रहे थे जो उनके बच्चों की मां बन सके, अच्छा लगने पर हमने मेले में ही शादी करने का फैसला कर लिया."

आज हेमा-आनंद का पूरा परिवार बेहद खुश है.

ऐसी ही कहानी पुणे शहर में रहने वाले पाण्डुरंगा की है जो बचपन से एचआईवी संक्रमण से ग्रस्त हैं और दो साल लगातार यहां आने के बाद ही उन्हें उनकी जीवन साथी तेजस मिली.

धोखा

ऐसा नहीं कि यहां होने वाली शादियों की कहानियां हमेशा खुशनुमा ही रही हैं, मुंबई की रहने वाली रचना की कहानी कुछ अलग है.

डॉक्टर अरुंधति बताती हैं,"रचना को एचआईवी अपने पहले पति से हुआ, पहले पति की मृत्यु के बाद एक जीवनसाथी को तलाशती हुई यहां आई और यहां एक और रोगी विनोद से उनकी शादी भी हुई लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनका तलाक़ हो गया क्योंकि विनोद को रचना की प्रॉपर्टी चाहिए थी."

डॉक्टर अरुंधति कहती हैं, "ऐसी बीमारी में भी कुछ मर्दों की बहुत मांग होती हैं. वो हमारे पास ऐसी ऐसी फरमाइशें लाते हैं जो सोच भी नहीं सकते. सुन्दर लड़की से लेकर नौकरीपेशा लड़की, अमीर लड़की जैसी मांगें आम हैं."

आजकल कई मेट्रोमोनियल वेबसाइट भी एचआईवी संक्रमण से जुड़े लोगों की शादी करवा रही हैं, लेकिन डॉक्टर अरूंधति इसे ख़तरनाक मानती हैं.

वो कहती हैं, "ऑनलाइन में कोई नहीं बताता कि वो बीमारी की कौन सी स्टेज पर हैं, वो कितने सक्षम हैं, कितने साल जीवित रहेंगे, इसके अलावा परिवार का बर्ताव भी बाद में बुरा हो सकता है."

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