डिजिटल इंडियाः भविष्य बनाने का सपना

डिजिटल इंडिया बैनर
    • Author, पारुल अग्रवाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

'मेक इन इंडिया' के बाद 'डिजिटल इंडिया' मोदी सरकार का अगला महत्वाकांक्षी अभियान है. इस अभियान का मक़सद देश के ढाई लाख गाँवों को इंटरनेट से जोड़ना और सरकारी योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाना है.

इस अभियान के तहत क्या हो रहा है? मंसूबे कैसे पूरे होंगे? अचड़नें क्या हैं? एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं? डिजिटल इंडिया अभियान के हर पहलू की बारीक़ी से पड़ताल कर रही है बीबीसी हिंदी की विशेष सिरीज़.

भारत इंटरनेट स्पीड

आज की कड़ी में मिलिए कंप्यूटर सीखकर अपनी दुनिया बदलने की कोशिश में लगे कुछ युवाओं से.

कुलबीर सिंह

बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी बनने का सपना पाल रहे कुलबीर सिंह रोज़ 100 किलोमीटर का सफ़र कर शहर में कंप्यूटर सीखने जाते हैं.

कुलबीर सिंह

पट्टी तहसील से वाणिज्य में स्नातक करने के बाद कुलबीर ने अमृतसर से एनआईआईटी में डिप्लोमा करने का फ़ैसला किया. एनआईआईटी से टैली, इआरपी9 डिप्लोमा के लिए उन्होंने 35,000 रुपए इस उम्मीद में खर्च किए कि वे प्रतियोगी परीक्षा में पास हो जाएंगे.

भारत कंप्यूटर

डिजिटल इंडिया अभियान के बारे में कुलबीर कहते हैं कि या तो एनआईआईटी ग्रामीण इलाक़ों में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र खोले या सरकार यह सुनिश्चित करे कि शिक्षण संस्थान वहाँ लोगों को कंप्यूटर सिखाए.

मनदीप कौर

अमृतसर से छह किलोमीटर दूर गांव में कंप्यूटर डिप्लोमा केंद्र खुलना मनदीप कौर के लिए वरदान साबित हुआ.

मनप्रीत कौर

कंप्यूटर की मूलभूत जानकारी 12वीं की पढ़ाई कर रही मनदीप को नौकरी हासिल करने में मददगार साबित होगी.

उन्होंने ग़ैर सरकारी संगठन 'सरबत्त दा भला' (एसटीबी) चैरिटिबेल के मुफ़्त कंप्यूटर शिक्षा केंद्र में छह महीने के डिप्लोमा कोर्स के लिए दाख़िला ले लिया है.

मनदीप बताती हैं कि सरकारी स्कूल में कंप्यूटर साइंस की कक्षा में उन्होंने सिर्फ़ 'थ्योरी' पढ़ी है, उन्हें कभी व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिला.

भारत कंप्यूटर

आधारभूत शिक्षा के साथ ही उन्होंने यहां फ़ोटोशॉप, कोरल ड्रॉ, एमएस ऑफ़िस और एक्सल सीखा है. वे कहती हैं, "यहां मैं न सिर्फ़ कंप्यूटर सीख रही हूं, बल्कि खूब अभ्यास भी कर रही हूं."

हालांकि वह 'डिजिटल इंडिया सप्ताह' के बारे में नहीं जानतीं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि ऐसे डिप्लोमा से उन्हें बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी मिल जाएगी.

शुभश्री नायक

विज्ञान की छात्रा शुभश्री नायक ओडीशा के रायगडा सहर के 'डाटाप्रो' सेंटर में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लिकेशन्स (पीजीडीसीए) कर रही हैं.

पढ़ाई के साथ ही कंप्यूटर शिक्षा के सवाल पर वह कहती हैं, "आज की तारीख़ में चाहे आप कुछ भी करें, कंप्यूटर की जानकारी बहुत ज़रूरी है. अगर आपको नौकरी करनी है, तो बिना कंप्यूटर जाने आपको कोई नहीं लेगा."

डिजिटल इंडिया

उनका कहना था कि आगे चल कर वह कुछ और एडवांस्ड कोर्स करना चाहेंगी, जिससे नौकरी मिलने में आसानी हो.

शुभश्री के पिता ट्रेज़री में नौकरी करते हैं और कंप्यूटर के आदी हैं. उनकी गृहिणी मां भी कंप्यूटर से वाकिफ़ हैं. शुभश्री का कंप्यूटर से परिचय सातवीं कक्षा में हुआ था.

डिजिटल इंडिया अभियान के बारे में वह काफी उत्साहित हैं और उम्मीद करती हैं कि इससे कंप्यूटर और इंटरनेट उन इलाकों में भी पहुंचेंगे जहां अभी तक पहुंच नहीं पाए हैं.

कल्याणी बेनिया

ओडिशा के दक्षिणी शहर रायगडा में कंप्यूटर शिक्षा ले रहीं कल्याणी बेनिया मानती हैं कि चाहे आदमी किसी भी सामाजिक श्रेणी या उम्र का हो, कंप्यूटर और इंटरनेट की सामान्य जानकारी ज़रूरी है.

पहली कक्षा से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहीं 20 वर्षीय कल्याणी कहती हैं, "आदमी अगर सेवानिवृत भी हो, तो उसे पेंशन संबंधी जानकारी इंटरनेट के ज़रिए आसानी से मिल सकती है. इसके ज़रिए दुर्गम से दुर्गम इलाके के पंचायत सीधे प्रधानमंत्री से संपर्क साध सकते हैं."

आकाश टैबलेट

वे वह नौकरी से पहले कंप्यूटर में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करना चाहती हैं और आईटी के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं.

गौरव गुप्ता

कानपुर में रहने वाले 25 साल के गौरव गुप्ता को डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से काफी उम्मीदें हैं.

एक प्रतिष्ठित संस्थान से हार्डवेयर और नेटवर्किंग की डिग्री हासिल कर चुके गौरव कहते हैं, "अभी तो सरकारी नौकरी करने वालों को भी ठीक से कंप्यूटर चलाना नहीं आता है. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से अगर गांव में रहने वाले भी जुड़ जाएंगे तो बहुत अच्छा होगा."

एक साइबर कैफ़े चलाने वाले गौरव कहते हैं, "डिजिटल इंडिया कार्यक्रम उनके लिए अच्छा होगा जो कंप्यूटर के बारे में जानना चाहते हैं. कंप्यूटर की जानकारी से लोग एक जगह बैठकर ही नौकरी ढूंढ सकते हैं."

लवली कांत

लवलीकांत

पटना से सटे खुसरुपुर गाँव की लवली कांत एक निजी कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान से ओ-जावा का एडवांस कोर्स कर रही हैं.

वह कहती हैं कि इस विषय से जुड़े जितने भी कोर्स हैं उनकी मांग बाज़ार में काफी है. वे यह सब अच्छी नौकरी की उम्मीद में कर रही हैं.

वे कहती हैं कि बिहार में गुंजाइश कम है लेकिन, बाहर है. सरकार की डिजिटल इंडिया योजना के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

फ़राज अनवर

पटना से सटे फुलवारी शरीफ़ के फ़राज़ अनवर बी टेक कर चुके हैं और एक निजी संस्था से इन्फॉर्मेशन सिक्यूरिटी के अंतर्गत एथिकल हैकिंग की एडवांस्ड पढ़ाई कर रहे हैं.

वह कहते हैं कि आईटी सेक्टर ही ऐसा क्षेत्र है जिसमें अपार संभावनाएं हैं.

फ़राज़ अहमद

सरकार के डिजिटल इंडिया योजना की वजह से भी आईटी से जुड़ी नौकरी बढ़ने की संभावना है, क्योंकि अगर इस योजना को सफल बनाना है तो ज्यादा हाथों की ज़रूरत होगी.

(पंजाब से रविंद्र सिंह रॉबिन, भुवनेश्वर से संदीप साहू, कानपुर से रोहित घोष, पटना से नीरज सहाय बीबीसी हिंदी के लिए)

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