जासूसी के लिए पाकिस्तान भेज रहा है कबूतर?

पाकिस्तानी कबूतर भारत में
    • Author, सुहैल हलीम
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता
  • प्रकाशित

जब जासूसी के आधुनिक उपकरण विकसित नहीं हुए थे, कबूतरों से जासूसी कराना आम बात थी. पर क्या आज के इस आधुनिक युग में भी कबूतरों से जासूसी होती है?

यह सवाल इसलिए उठा है क्योंकि पंजाब के पठानकोट में एक कबूतर पुलिस के क़ब्ज़े में है. आशंका जताई जा रही है इसे भारत में जासूसी करने के लिए पाकिस्तान से भेजा गया है.

कबूतर से जासूसी?

पाकिस्तानी कबूतर भारत में

पठानकोट के एसएसपी राकेश कौशल कहते हैं, "इसमें कोई संदेह नहीं कि यह कबूतर पाकिस्तान से आया है. बुधवार को उसे एक आदमी ने पाकिस्तान की सीमा से तीन चार किलोमीटर दूर मनवाल गांव में पकड़ा था. कबूतर के पंखों पर ‘तहसील शुक्र गढ़, जिला नरवाल’ लिखा है."

पाकिस्तानी कबूतर भारत में

उन्होंने बताया, "इसके अलावा और कुछ उर्दू में लिखा है, जिसे पढ़ा नहीं जा सका है. कबूतर के पंखों पर एक नंबर भी लिखा हुआ है, लेकिन यह फ़ोन नंबर नहीं है. बहरहाल, एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है.”

इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि कबूतर भेजने का मक़सद जासूसी ही है.

कौशल ने कहा, “अभी ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जिनके आधार पर उसे जासूस कहा जा सके. हमने कबूतर का एक्स-रे भी कराया है. पर हमे उसके अंदर कोई कैमरा या ट्रासंमीटर नहीं मिला है.”

राह भटका कबूतर?

कौशल इससे इनकार नहीं करते कि संभव है ये कबूतर भूल से राह भटक कर भारत की सीमा में दाख़िल हो गया हो.

दूसरी ओर, चंडीगढ़ के पत्रकार रवींद्र सिंह का कहना है कि पाकिस्तान से कबूतर राह भटक कर भारत आते रहते हैं और भारत के कबूतर भी कई बार पाकिस्तान चले जाते हैं.

पाकिस्तानी कबूतर भारत में

पाकिस्तानी कबूतर महंगे होते हैं. लिहाजा, लोग दाना डाल उसे पकड़ लेते है और बाज़ार में ऊंची क़ीमत पर बेच देते हैं.

फ़िलहाल पुलिस अभी मामले की जाँच कर रही है. इस इलाक़े में कई सैन्य प्रतिष्ठान हैं इसलिए ज़्यादा सतर्कता बरती जा रही है.

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