इन भारतीय छात्रों ने बना दी सोलर कार

    • Author, डेविड के. गिब्सन
    • पदनाम, बीबीसी ऑटोस
  • प्रकाशित

भारत के कर्नाटक में मनिपाल यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग के छात्रों ने सोलर कार बनाने का कारनामा कर दिखाया है.

छात्रों ने कॉन्सेप्ट कार बनाई है, ये दिखाने के लिए कि ऐसी कार बनाई और चलाई जा सकती है. कमर्शियल स्तर पर इस कार को बनाने की बात बाद में आएगी.

एक बार में 90 मील तक का फ़ासला तय करने वाली ये कार, अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चल सकती है.

इसे नाम दिया गया है - सोलर इलेक्ट्रिक रोड व्हीकल और ये मनिपाल इंस्टीच्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी और टाटा पावर सोलर का ज्वाइंट प्रोजेक्ट है. टाटा पावर सोलर भारत की सबसे बड़ी सोलर कंपनी है.

वैसे मोटरगाड़ियों के बाज़ार में टाटा ग्रुप टाटा मोटर्स, जगुआर और लैंड रोवर जैसे ब्रांड की वजह से मज़बूत दख़ल रखता है. हालांकि इस प्रोजेक्ट में टाटा मोटर्स की सहभागिता नहीं है.

रास्पबैरी पाई और फ़ाईबर ग्लास

वैसे इस सोलर कार की कल्पना पहले 1985 में की गई थी. तब यह कार कंसेप्ट कार भी नहीं थी, बल्कि प्री-कंसेप्ट जैसा मॉडल था. इसलिए डिज़ाइन के बारे में आकलन उस वक्त बनावट बहुत अच्छी नहीं थी.

समय के साथ इसके डिज़ाइन को बेहतर बनाया गया है. इसकी छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं और कार का डिज़ाइन काफ़ी एयरोडायनमिक और संतुलित नज़र आता है.

कार की बैटरी और पावर सिस्टम को यूनिवर्सिटी के छात्रों ने रास्पबैरी पाई (सिंगल बोर्ड वाला) कंप्यूटर को प्रोग्राम करके तैयार किया है. ये इसी से नियंत्रित भी होता है.

कार की बॉडी फ़ाइबर ग्लास से बनी है, इसके अंदर है स्टील की ट्यूब.

कार का वजन करीब 1300 पाउंड (करीब 590 किलोग्राम) है. इसमें लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया जा रहा है. दो सीटों वाली कार इस बैटरी के साथ 90 मील की दूरी तय कर सकती है.

कार की अधिकतम स्पीड लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटे हो सकती है. कार की सामान्य गति इससे आधी लगभग 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक की है. यह गति आम गाड़ियों की तुलना में कम है.

लेकिन ये स्पीड इसके चेन-ड्राइव ट्रान्समिशन पर ज़्यादा दबाव नहीं डालती है.

मनिपाल यूनवर्सिटी के छात्रों की बनाई सोलर कार एमआईटी और दूसरी बड़ी यूनिवर्सिटी की तरह बढ़ चढ़कर दावे पेश नहीं करती.

ना तो ये सबसे तेज़ कार होने का दावा करती है और न ही सबसे अधिक दूरी तय करने वाली कार का. इसमें किसी अविश्वसनीय तकनीक का इस्तेमाल भी नहीं किया गया है.

दरअसल इस कार की सबसे बड़ी ख़ासियत यही है कि मनिपाल यूनिवर्सिटी के छात्र ऐसी सोलर कार बनाने में कामयाब रहे हैं जो काम भी करे और कमर्शियल तौर पर भी व्यवहारिक हो.

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/autos/story/20150515-where-is-my-solar-car" platform="highweb"/></link> यहाँ पढ़ें जो <link type="page"><caption> बीबीसी ऑटो</caption><url href="http://www.bbc.com/autos" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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