बेबी पाटणकर: दूध बेचने से 'ड्रग माफ़िया' तक

    • Author, अश्विन अघोर
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

नशीली दवाओं की तस्करी करने के आरोप में मुंबई की कथित ड्रग माफ़िया बेबी पाटणकर को पुलिस अधिकारियों ने गिरफ़्तार कर लिया है.

पाटणकर को बुधवार को नवी मुंबई के पनवेल इलाके से गिरफ़्तार किया गया.

पिछले कई महीनों से पुलिस पाटणकर की तलाश कर रही थी.

कांस्टेबल ने खोला राज़

नशीली दवाओं की तस्करी करने के सिलसिले में पिछले महीने सतारा पुलिस ने कांस्टेबल धर्मा कालोखे को गिरफ़्तार किया था.

कालोखे ने अपने बयान में बेबी पाटणकर का नाम लिया था.

मेफ़ेड्रोन

पुलिस के अनुसार पाटणकर मेफ़ेड्रोन नशीली दवा की तस्करी में माहिर थी.

फ़रवरी 2015 में सरकार ने मेफ़ेड्रोन को नारकोटिक्स ड्रग्ज एंड सायकोट्रोपिक सबस्टन्स कानून के तहत नशीली दवा करार दिया.

इसके बाद पुलिस हरकत में आ गई थी.

पाटणकर को पकड़ने के लिए पुलिस के दस दस्ते काम कर रहे थे.

बस से गिरफ़्तार किया गया

पुलिस अधिकारी

इससे पहले इसी सिलसिले में पुलिस ने बेबी के बेटे सतीश पाटणकर को गिरफ़्तार किया था.

बुधवार को पुलिस को मिली खबर के आधार पर पनवेल में मुंबई की तरफ जाने वाली एक बस से बेबी पाटणकर को गिरफ़्तार किया गया. इनके पास से 110 किलो मेफ़ेड्रोन बरामद की गई है.

यह मामला अब अपराध शाखा को सौंपा गया है. अपराध शाखा के सह पुलिस आयुक्त अतुलचन्द्र कुलकर्णी ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए दावा किया कि इस रैकेट को तोड़ने में इस गिरफ़्तारी की अहम भूमिका होगी.

बेबी पाटणकर को 28 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है.

'30 साल पहले शुरू की तस्करी'

मुंबई के वरली इलाके में दूध की बोतल बेचनेवाली शशिकला माजगांवकर उर्फ़ बेबी रमेश पाटणकर आज ड्रग माफ़िया बेबी पाटणकर के नाम से जानी जाती हैं.

पुलिस का कहना है कि पाटणकर ने नशीली दवाओं की तस्करी की शुरुआत लगभग 30 साल पहले की थी. पुलिस का आरोप है कि पहले वे मुंबई के कॉलेजों के सामने गांजा, हशीश, ब्राउन शुगर जैसी नशीली दवाईयां बेचती थी.

पुलिस का कहना कि वह ये दवाईयां राजस्थान तथा मध्यप्रदेश से लाती थी.

इसी बीच पाटणकर की मुलाक़ात कांस्टेबल धर्मा कालोखे से हुई. धर्मा की मदद से बेबी नशीली चीज़ों को पुलिस से सुरक्षित रखती थी.

कई बार तो इस तस्करी के लिए पुलिस की गाड़ी का इस्तेमाल किया गया.

पुलिस की ख़बरी

जानकारों ने बताया कि 2002 तक ड्रग तस्करी में जम जाने के बाद बेबी पाटणकर ने पुलिस के ख़बरी के तौर पर काम किया और कुछ बड़े ड्रग का काम करने वालों को पकड़वाने में पुलिस की मदद की.

पुलिस

इस तरीके से उसके कुछ अधिकारियों के साथ अच्छे रिश्ते बने और साथ ही इसी कारोबार में लगे कई अन्य लोग या पुलिस की गिरफ़्त में आए या धंधा छोड़ गए.

पुलिस यहाँ तक दावा करती है कि नशीले पदार्थों की तस्करी और व्यापार में बेबी पाटणकर के परिवार का पूरा परिवार लिप्त है, जिसमें उसके पाँच बड़े भाई भी शामिल है.

पिछले साल पुलिस ने इनकी बहु को भी नशीली पदार्थों के व्यापार में कथित तौर पर जुड़े होने के कारण गिरफ़्तार किया था.

पति से हुईं अलग

जानकारों ने बताया कि बेबी पाटणकर की अपने पति के साथ भी अनबन हुई और वह अलग हो गए.

पुलिस का दावा है कि बेबी के दो बेटे, बेटी, बहू- लगभग सारा परिवार इसी काम में लिप्त है.

पिछले कुछ दिनों से मेफ़ेड्रोन की लत बढ़ी है, जिसे नशीली दवाओं के बाजार में “म्याव म्याव” के नाम से जाना जाता है.

पुलिस की जानकारी के अनुसार बेबी के नाम पर मुंबई, पुणे, लोनावाला, कोंकण में कई बंगले, बैंक बैलन्स, शराब की दुकानें और आलिशान गाड़ियां हैं.

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